अपीलार्थी के अधिवक्ता बोहरा ने कहा कि राजस्थान सेवा नियम के नियम 7(30) में केवल परिवीक्षाकाल को परिभाषित किया गया है। परिवीक्षाकाल वाले कार्मिक को कार्यमुक्त नहीं करने का कहीं पर भी कोई उल्लेख नहीं है।
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण जोधपुर ने बीकानेर निवासी मनीषा विश्नोई की अपील को स्वीकार करते हुए उसे कार्यमुक्त करने का आदेश पारित किया है। बीकानेर निवासी मनीषा वर्तमान में संस्कृत शिक्षा विभाग में राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल 5 सीएचएम काकरवाला बीकानेर में कार्यरत है। संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा आदेश 23 सितंबर 2025 द्वारा उसका स्थानान्तरण वर्तमान विद्यालय से राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल रानी बाजार बीकानेर कर दिया गया। इसके पश्चात् आयुक्त, संस्कृत शिक्षा राजस्थान जयपुर द्वारा आदेश 23 सितंबर 2025 द्वारा यह स्पष्टीकरण जारी किया गया जो कि कार्मिक परिविक्षाकाल में है उन पर स्थानान्तरण आदेश प्रभावी नहीं होगा।
अधिवक्ता प्रमेंद्र बोहरा के तर्कों से सहमत हुआ अधिकरण : अपीलार्थी को कार्यमुक्त किया
विभाग के इस आदेश से व्यथित होकर अपीलार्थी ने अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से एक अपील अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की। चूंकि अपीलार्थी की नियुक्ति संस्कृत शिक्षा विभाग में 2 फरवरी 2024 को लेक्चर के पद पर हुई थी। इसी आदेश के तहत उसने लेक्चरर के पद पर 9 फरवरी 2024 को कार्यग्रहण किया। इस तरह वह अभी परिवीक्षाकाल में है। अतः विभाग द्वारा उसका स्थानान्तरण तो कर दिया पर यह इस शर्त के साथ किया कि जो परिवीक्षाकाल में है उन पर यह आदेश प्रभावी नहीं होगा। विभाग के इस कृत्य को चुनौती देते हुए अपीलार्थी के अधिवक्ता का यह तर्क था कि राजस्थान सेवा नियम के नियम 7(30) में केवल परिवीक्षाकाल को परिभाषित किया गया है। परिवीक्षाकाल वाले कार्मिक को कार्यमुक्त नहीं करने का कहीं पर भी कोई उल्लेख नहीं है। साथ ही यदि स्थानान्तरण किया जा सकता है तो उसे कार्यमुक्त क्यों नहीं किया जा सकता है, विभाग द्वारा उसे कार्यमुक्त नहीं किया जाना अनुचित व नियम विरूद्ध है।
अधिवक्ता बोहरा ने कहा- स्थानांतरण कर सकते हैं तो कार्यमुक्त क्यों नहीं, विभाग की दलील में दम नहीं
अधिवक्ता बोहरा ने तर्क दिया कि यदि स्थानांतरण कर सकते हैं तो कार्यमुक्त क्यों नहीं कर सकते? संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा जवाब प्रस्तुत करते हुए विभाग के कृत्य को उचित ठहराने का प्रयास किया गया। अपीलार्थी के अधिवक्ता द्वारा अपने तर्कों के समर्थन में अनेकों न्यायिक दृष्टांतों का हवाला दिया गया। जिसमें उच्च न्यायालय की खण्डपीठ में यह व्यवस्था प्रतिपादित की कि परिवीक्षाकाल में स्थानान्तरण किया जा सकता है। प्रार्थी के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होेते हुए अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत अपील को स्वीकार किया व अपीलार्थी के स्थानान्तरण आदेश दिनांक 23 सितंबर 2025 के तहत उसे कार्यमुक्त करने का आदेश प्रदान किया गया।



