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Thursday, July 9, 2026, 5:33 am

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बिहार को चाहिए बदलाव….नीतीश कुमार, डॉ. जगन्नाथ मिश्रा, राबड़ी, लालू ने लंबा राज किया पर दशा नहीं बदल सके; अब महागठबंधन के युवा चेहरे तेजस्वी से जनता को उम्मीदें

-हर ”परिवार सरकारी नौकरी” के तेजस्वी यादव के दांव के सामने एनडीए बैकफुट पर आ गया है, मजबूरी में ही सही उसे अपने घोषणा पत्र में 1 करोड़ नौकरियां, केजी से पीजी तक पढ़ाई फ्री की घोषणा करनी पड़ी…बिहार की जनता असमंजस में जरूर है मगर इस बार बदलाव की आहट सुनाई दे रही है।

-बिहार के वोटर्स बोले- नीतीश कुमार, डॉ. जगन्नाथ मिश्रा, राबड़ी, लालू ने लंबा राज किया पर दशा नहीं बदल सके; अब महागठबंधन के युवा चेहरे तेजस्वी से उम्मीदें…बिहार में गली-गली, चौराहों पर तेजस्वी के चर्चे, नीतीश के नाम पर युवाओं की चुप्पी…युवा बोले- इस बार बदलाव होकर रहेगा

-हालांकि तेजस्वी ने हर परिवार सरकारी नौकरी का दांव चला है और उस पर बिहार की जनता को पूरा होने का पूरा-पूरा भरोसा नहीं है। लेकिन इसके बावजूद बिहार की जनता में तेजस्वी ने एक भरोसा जगाया है। यह भरोसा ही उनकी ताकत बन गया है। तेजस्वी युवा हैं और नीतीश उम्रदराज। उम्र बढ़ने के साथ ही उनकी कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। बिहार की जनता को चाहिए युवा खून जो युवाओं की भावनाओं को समझ सकें।

पटना से राइजिंग भास्कर की विशेष रिपोर्ट 

बिहार में इस बार बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। महागठबंधन का तेजस्वी यादव का चेहरा जनता को लुभाता नजर आ रहा है। वहीं नीतीश की राह कठिन नजर आ रही है। भाजपा फिलहाल नीतीश के साथ अपने को बराबरी की दौड़ में रख रही है। भाजपा के पास इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है। भाजपा का स्टैंड साफ है- अगर सीटें अधिक आई तो सीएम के नाम पर बहस होगी और अगर जेडीयू को सीटें अधिक आई तो नीतीश दसवीं बार सीएम बन सकते हैं।

लेकिन नीतीश की राह इस बार बड़ी मुश्किल है, क्योंकि बिहार की जनता बदलाव का संकल्प ले चुकी है। हालांकि तेजस्वी ने हर परिवार सरकारी नौकरी का दांव चला है और उस पर बिहार की जनता को पूरा होने का पूरा-पूरा भरोसा नहीं है। लेकिन इसके बावजूद बिहार की जनता में तेजस्वी ने एक भरोसा जगाया है। यह भरोसा ही उनकी ताकत बन गया है।

तेजस्वी युवा हैं और नीतीश उम्रदराज। उम्र बढ़ने के साथ ही उनकी कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। बिहार की जनता को चाहिए युवा खून जो युवाओं की भावनाओं को समझ सके। युवा दिल की धड़कन बनकर उभरे हैं तेजस्वी यादव। बिहार में हर परिवार सरकारी नौकरी देना संभवतया असंभव है, मगर इस नारे से घबरा कर एनडीए को भी एक करोड़ सरकारी नौकरियां देने की घोषणा करनी पड़ी। यही नहीं एनडीए ने केजी से पीजी तक पढ़ाई फ्री करने की भी घोषणा की है।

एनडीए के घोषणा पत्र पर एक नजर :  

एनडीए ने शुक्रवार को पटना में चुनावी घोषणा पत्र जारी किया। 69 पन्नों के संकल्प पत्र में बड़े वादों के जरिए बिहार को नई रफ्तार देने का वादा किया गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन ने अगले पांच साल में 50 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है। न्यू एज इकोनॉमी के तहत सुई से लेकर सेमीकंडक्टर, हवाई जहाज की मशीनरी, बैटरी, सोलर पैनल, इनवर्टर और टेक्सटाइल उद्योग लगाने का वादा किया गया है। एनडीए ने एक करोड़ युवाओं को नौकरी, एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने और गरीब छात्रों को केजी से पीजी तक मुफ्ट पढ़ाई देने की घोषणा की है। एससी/एसटी को उच्च शिक्षा के लिए रुपए 2 हजार माह देने की घोषणा की है। बिहार में 7 एक्सप्रेसवे, 10 इंडस्ट्रियल पार्क बनाने, पीएम किसान सम्मान निधि 6 से बढ़ाकर 9 हजार करने, 50 लाख पक्के घर बनाने, अति पिछड़ी जातियों के कामगारों को 10 लाख तक। मजदूरों के लिए प्रवासी कल्याण बोर्ड, न्यू पटना बनाने की घोषणा की है। सैटेलाइट टाउनशिप। मां जानकी की जन्मस्थली का सीतापुरम के रूप में विकास। विष्णुपद और महाबोधि कॉरिडोर का निर्माण।

नीतीश नौ बार मुख्यमंत्री रहे, क्या किया? अब घोषणाओं का पुलिंदा चुनावी स्टंट, जनता बोली- बदलाव के लिए वोट देंगे

चुनावी स्टंट : नागेश

युवा नागेश बोले- नीतीश नौ बार मुख्यमंत्री रहे, क्या किया? अब घोषणाओं का पुलिंदा सामने आया है। यह चुनावी स्टंट से अधिक कुछ नहीं। हम तो बदलाव के लिए वोट देंगे।

नौ बार सीएम रहे सुई तक नहीं बना पाए, क्यों? : राही

राही बोले-सत्तारूढ़ गठबंधन ने अगले पांच साल में 50 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है। न्यू एज इकोनॉमी के तहत सुई से लेकर सेमीकंडक्टर, हवाई जहाज की मशीनरी, बैटरी, सोलर पैनल, इनवर्टर और टेक्सटाइल उद्योग लगाने का वादा किया गया है। अगर बिहार के विकास का इतना ही ध्यान था तो नौ बार मुख्यमंत्री रहे सुई तक क्यों नहीं बनाई गई?

अब तक 1 करोड़ नौकरियां नहीं दी, अब 5 साल में कैसे देंगे? : देवेश

देवेश ने कहा- नीतीश नौ बार सीएम रहे और 1 करोड़ नौकरियां नहीं दे पाए। अब 5 साल में कैसे देंगे? तेजस्वी की घोषणा से घबराकर एनडीए बैकफुट पर आ गया है। हम एनडीए के दावों पर भरोसा नहीं।

बिहार में किसका कितना राज, अभी भी बिहार में जंगलराज :

नीतीश कुमार नौ बार मुख्यमंत्री रहे। बिहार के राजनीतिक इतिहास में कई मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल दिलचस्प रहा है, जिनमें सबसे छोटा कार्यकाल सतीश प्रसाद सिंह का था। राबड़ी देवी लालू प्रसाद से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहीं। सबसे छोटा कार्यकाल सतीश प्रसाद सिंह के नाम दर्ज है। वे 1968 में 28 जनवरी से एक फरवरी तक इस पद पर रहे। वे शोषित दल के थे। इसी दल के वीपी मंडल ने एक फरवरी को मुख्यमंत्री का पद ग्रहण किया। उनका कार्यकाल 50 दिनों का रहा। तीन बार मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य भोला पासवान शास्त्री को भी प्राप्त हुआ। उनका पहला टर्म 22 मार्च 1968 को शुरू हुआ और उसी साल 29 जून (कुल 99 दिन) को समाप्त हो गया। दूसरा कार्यकाल 12 दिन (22 जून 04 जुलाई 1969) और तीसरा 221 दिन (02 जून 1971-09 जनवरी 1972) का रहा। कांग्रेस ने तीन बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर डॉ. जगन्नाथ मिश्रा को भी दिया। उनका कार्यकाल था-11 अप्रैल 1975 से 30 अप्रैल 1977 (दो साल 19 दिन), 08 जून 1980 से 14 अगस्त 1983 (तीन साल 67 दिन) और 06 दिसंबर 1989 से 10 मार्च 1990 (94 दिन)। राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री राबड़ी देवी सात साल 190 दिन मुख्यमंत्री रहीं, लेकिन उन्हें भी पांच साल का लगातार कार्यकाल नहीं मिला। उनका दूसरा कार्यकाल 11 मार्च 2000 को शुरू हुआ। छह मार्च 2005 को समाप्त हो गया। वह दूसरे और अंतिम टर्म में चार साल 360 दिन तक मुख्यमंत्री रहीं। यह महत्वपूर्ण है कि राबड़ी देवी का कार्यकाल लालू प्रसाद की तुलना में 60 दिन अधिक मुख्यमंत्री रहीं। लालू प्रसाद का कार्यकाल सात साल 130 दिन रहा। हां, लालू प्रसाद इस मामले में राबड़ी देवी से आगे रहे कि उनका पहला कार्यकाल 10 मार्च 1990 से 28 मार्च 1995 तक रहा। यह पांच साल 18 दिन था। कई ऐसे मुख्यमंत्री हुए जिनकी चर्चा तो खूब हुई, लेकिन उन्हें एक साल से कम का कार्यकाल मिला। महामाया प्रसाद सिन्हा, दारोगा प्रसाद राय, रामसुंदर दास, जीतनराम मांझी, सत्येंद्र नारायण सिन्हा, भोला पासवान शास्त्री और वीपी मंडल शामिल हैं।

बिहार की बागडौर किसके हाथ- तेजस्वी, नीतीश या कोई और

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार बिहार की बागडौर किसके हाथ होगी? क्या नीतीश कुमार दसवीं बार सीएम बनेंगे या तेजस्वी यादव पहली बार सीएम बनेंगे? या बिहार का ताज किसी और चेहरे के सिर पर रहेगा। इस बार बिहार में बदलाव के लिए जनता तैयार नजर आ रही है। वोटर्स अभी खामोश हैं। पूरी तरह रंग में नजर नहीं आ रहे हैं। कुछ उत्साही युवा जरूर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, मगर अधिकतर वोटर्स खामोश हैं। मगर उनकी खामोशी में एक दर्द है, एक पीड़ा है, एक संकल्प है बिहार को जंगलराज से बचाने का। इतना तय है कि महारथियों ने जो लंबा राज बिहार में किया उसके बावजूद ना सुशासन आ पाया, ना विकास की रफ्तार बढ़ी, आज भी एनडीए को सुई से लेकर सेमीकंडक्टर, हवाई जहाज की मशीनरी, बैटरी, सोलर पैनल, इनवर्टर और टेक्सटाइल उद्योग लगाने का वादा करना पड़ रहा है। नौ बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद भी जब सुई तक नहीं बना पाए तो आगे वादे कैसे पूरे होंगे? जनता यही सवाल अपने जेहन में पाले हुए हैं, जिनके उत्तर जल्द ही ईवीएम में कैद होंगे और नतीजे आने पर सबकुछ खुलासा भी हो जाएगा।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor