“दीप जलाना आसान है दीप बनकर जलना आसान नहीं… वरिष्ठ हैं हम वरिष्ठ हैं, भावों से गरिष्ठ हैं। मत समझो लाचार हमको, जीवन में विशिष्ट हैं..
राइजिंग भास्कर. बीकानेर
राष्ट्रीय कवि चौपाल की 540 वीं कड़ी “कवि हृदय – रवि उदय” संदर्भ समर्पित रही। यानी सर्वहित में जीवन समर्पित.. कार्यक्रम की अध्यक्षता में नरसिंह भाटी, सरोज भाटी व सुधा आचार्य आदि मंच शोभित हुए। रामेश्वर साधक ने कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए बौद्धिक में कहा कि साहित्य संरक्षण से संस्कृति व देश संरक्षण दोनों संरक्षित हो जाते हैं। वर दे, वर दे वीणा वादिनि… कृष्णा वर्मा ने प्रार्थना से मां सरस्वती का आह्वान कर कार्यक्रम को गति दी।
कार्यक्रम अध्यक्ष नरसिंह भाटी ने समय की महत्ता पर बौद्धिक के साथ काव्य धारा में अपनी बात कही
समय.. तू मेरा है .. मेरा ही रहेगा, तू कल भी अच्छा था, आज भी अच्छा है… कल भी अच्छा रहेगा, मैं रीते घट सा हूं ,..तू मुझे में भरेगा…। मुख्य अतिथि श्रीमती सुधा आचार्य ने “दीप जलाना आसान है, दीप बनकर जलना आसान नहीं। तमस फैलाना आसान है, तमस भगाना आसान नहीं।। विशिष्ट अतिथि सरोज भाटी ने
वरिष्ठ हैं हम वरिष्ठ हैं, भावों से गरिष्ठ हैं। मत समझो लाचार हमको, जीवन में विशिष्ट है… सरदार अली परिहार ने साहित्य संदेश में कहा कि बगैर समय गवांए रचनाधर्मी बनों,.. शकूर बीकाणवी : कैसे पार मैं पाऊं? मेरी नैया पार लगाऊं? बीच भंवर में डगमग डोले,.. मैं कहीं डूब ना जाऊं? आध्यात्म दर्शन समाहित रचना सुनाकर सदन का मन मोह लिया। आकाशवाणी, अध्यात्म उद्घोषक प्रमोद शर्मा ने अब खड़ा ही क्यों रहूं जब सत्य नहीं बाजार में, मानता हूं लाठियों के हैं नफा बाजार की अभिव्यक्ति दी। रामेश्वर साधक ने सिद्धियां… डिग्रियां… विधि… विधाएं. माना सिद्धहस्त भी है विभिन्न कलाएं…प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि बिना ‘‘अर्थ-समृद्धि’’ के सिद्धि किस काम की। सिद्धहस्त की सफल कृतियां.. बन जाती है बिन दाम की.. राजकुमार ग्रोवर ने पूर्व वाले जाने हैं रिश्तों की कदर, पश्चिम में कोई नहीं पूछता कौन है फादर कौन मदर,.. लीलाधर सोनी ने जीवण रा दिन चार, जागति ज्यौति है,… विशाल भारद्वाज ने राष्ट्रीय कवि चौपाल में वर्षों से हो रही, नेमीचंद जी को समर्पित हर रचना हो रही, मोहम्मद शकील गौरी ने बरसे बिरखा मुसलाधार, म्हारो कद आसी भरतार। इंया कियां पड़े पार मरसी आ थारी गजनार,… शानदार रचना सुना कर वाह वाह लूंटी।
कैलाश चारण ने प्राणी पूछे ईश्वर से किस विध पाऊं तोय, प्रभू कहे तू मन को जीत ले पा जायेगा मोय .. मन मोहन कपूर ने मरहुगे मारि जाओगे कोई ना लेना नाम, उजड़ जाय बसाओगे छाड़ि बसंता गाम .. कृष्णा वर्मा ने भोतिक सुख की चाह निर्जीव वस्तुएं बन रही खुशियों का आधार भोतिक सुख की चाह में खोया अपनों का प्यार, तुलसी राम मोदी ने अपने ही अपनो को डुबाने आ जाते हैं लोग,.. पवन चड्ढ़ा ने आंख है भरी भरी तूम मुस्कुराने की बात करते हो..से रंग जमाया। कार्यक्रम में 16 कवि वृंद ने अपनी प्रस्तुति दी… कार्यक्रम में भवानी सिंह, धर्मा, घनश्याम सौलंकी लोकेश हेमकार, महेन्दु, विमला राजपुरोहित, निसार अहमद, छोटू खां, गोविंद सिंह कच्छावा, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम बेहतरीन संचालन शायरी दोहे व दृष्टांत के साथ चुटिले अंदाज में अब्दुल शकूर बीकाणवी ने किया, आभार रामेश्वर साधक ने व्यक्त किया।





