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Sunday, August 23, 2026, 3:22 pm

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Lifestyle

शत्रुंजय की ‘भाव यात्रा’ कर साध्वी वृन्द ने किया मंगल विहार

कहा- भले ही दूरी हो पर जिनवाणी से जुड़े रहेंगे

राइजिंग भास्कर. जोधपुर

जैन समाज के लिए कल का दिन भावुक और ऐतिहासिक रहा, जब पूज्य माता महाराज सा और पीयूष पूर्णा महाराज सा आदि ठाणा 6 ने मुँहता जी मंदिर जैन तीर्थ से अपना मंगल विहार आरंभ किया। विहार से पूर्व, 5/11/2025 की सुबह 6 बजे, ढेर सारे भक्तों की उपस्थिति में साध्वी वृन्द के सान्निध्य में शत्रुंजय महातीर्थ की भाव यात्रा का अद्भुत आयोजन किया गया।

​शत्रुंजय की अलौकिक ‘भाव यात्रा’

मंदिर प्रांगण में आयोजित इस भाव यात्रा का माहौल इतना भक्तिमय और सजीव था कि उपस्थित श्रद्धालु सचमुच में शत्रुंजय तीर्थ की पहाड़ियों पर होने का अनुभव करने लगे। धीरे-धीरे यह ‘भाव यात्रा’ एक वास्तविक तीर्थयात्रा का रूप ले लिया। उपस्थित साधर्मिक बंधु यात्रा के भाव में ऐसे बहे कि मानों वे साक्षात् उस पावन भूमि पर ही मौजूद हों, उनकी आँखों में श्रद्धा के आँसू और चेहरे पर भक्ति की चमक साफ दिखाई दे रही थी।

​ ढ़ोल-नगाड़ों के साथ मंगल विहार

भाव यात्रा के समापन के बाद, मंदिर प्रांगण ढ़ोल-नगाड़ों की गूंज से भर गया। भक्तों की भीड़ साध्वी वृन्द के चातुर्मास विहार के लिए उनके समक्ष हाथ जोड़े खड़ी होकर आशीर्वाद मांगने लगी। मंगल विहार के गीतों के बीच, साध्वी श्री का मुँहता मंदिर से विहार आरंभ हुआ।

अध्यक्ष संजय मेहता व सचिव पवन मेहता ने बताया कि, “यात्रा में धीरे-धीरे इतने लोग जुड़ते चले गए कि लगा मानो कोई मेला लगा हो, हर कोई इस यात्रा का हिस्सा बन भाग्यशाली अनुभव करना चाहता था।”

​शिप हाउस पर गुरु के जयकारे

यह मंगलमयी यात्रा गुरुवर के जयकारों की गूंज से होती हुई अपने गंतव्य शिप हाउस पर पहुँची।
​सचिव पवन मेहता के अनुसार, शिप हाउस पर पहुँचकर साध्वी श्री ने अपने श्री मुख से संघ, लाभार्थी बन्धुओं और ट्रस्ट की इस ऐतिहासिक चातुर्मास को लेकर भरपूर प्रशंसा की।

​धर्म से जुड़े रहने का आह्वान

साध्वी श्री ने उपस्थित भक्तों को धर्म से जुड़े रहने और इस मंगलमयी विहार यात्रा का हिस्सा बनने के लिए अनुमोदना की। कार्यक्रम के अंत में, सुरेन्द्र इन्द्रचंद सा मेहता परिवार द्वारा सभी भक्तों को प्रभावना और सेव लड्डू वितरित किए गए।

​यह भावुक विदाई और मंगल विहार यात्रा धर्म, आस्था और गुरु-भक्ति की एक अविस्मरणीय गाथा बन गई, जिसने जोधपुर के जैन समाज को एक सूत्र में पिरो दिया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor