पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, कवि और एक्टर दिनेश बैरवा, कवि रोहित शर्मा, कवि डॉ. राम अकेला और कवयित्री आयुषी राखेचा मचाएगी धूम
राइजिंग भास्कर की मांग : अनुराधा अडवानी ने लिखी सेवा की शिला पर समर्पण की कहानी, उनके सौम्य, सरल और समर्पित व्यक्तित्व और समाज में महान सेवा के जज्बे को देखते हुए मिले पद्मश्री
राखी पुरोहित. जोधपुर
अनुबंध वृद्धजन कुटीर। बुजुर्गों की निशुल्क सेवा में 24 साल से देश में अपनी विशिष्ट पहचान। अडवानी दंपती के समर्पण की मिसाल बन चुका अनुबंध वृद्धजन कुटीर 24 साल का जश्न अखिल भारतीय विराट हास्य कवि सम्मेलन के साथ मनाने जा रहा है। यह आयोजन 18 नवंबर को शाम 6:30 बजे एफडीडीआई ऑडिटोरियम मंडोर , नागौर रोड पर होगा। अनुबंध की संचालिका अनुराधा अड़वानी ने बताया कि कार्यक्रम में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, कवि और एक्टर दिनेश बैरवा, कवि रोहित शर्मा, कवि डॉ. राम अकेला और कवयित्री आयुषी राखेचा अपनी हास्य, व्यंग्य और चुटीली कविताओं के माध्यम से बुजुर्गों के जीवन में खुशी के पल भरेंगे। यह वह क्षण होगा जब बुजुर्ग अपने जीवन की तन्हाई, अपनी परेशानियों से दूर कुछ पल सुकून के और खुशी के तलाशेंगे। अनुराधा अड़वानी हर साल ऐसे आयोजन के माध्यम से बुजुर्गों के लिए कुछ अलग करने का प्रयास करती हैं।
सुंदरकांड पाठ 25 को :
अनुराधा अड़वानी ने बताया कि इसी कड़ी में 25 नवंबर को 1 से 4 बजे तक सुंदरकांड पाठ अनुबंध वृद्धजन कुटीर निमा निंबड़ी मंडोर में आयोजित होगा। साथ ही शाम 4 बजे हाई टी और कल्चरल इवनिंग भी होगी। कार्यक्रम की तैयारी में अनुबंध की संचालिका अनुराधा अड़वानी और नरेंद्र अडवानी लगे हुए हैं।
इसलिए है पद्मश्री की हकदार : मदर टेरेसा की तरह दीदी अनुराधा
जिस तरह मदर टेरेसा ने मानव मात्र की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया, उसी तरह दीदी अनुराधा ने बुजुर्गों की सेवा में अपना जीवन लगा दिया। जब राइजिंग भास्कर ने कुछ समय पूर्व उनका साक्षात्कार लिया तो उन्होंने एक-एक कर अपने अनुबंध की शुरुआत और आज की स्थिति में पहुंचने की यात्रा सुनाई। अनुराधा अडवानी खुद कलाकार, कवयित्री और लेखिका होने के साथ कुशल संचालिका हैं। उनकी पुस्तकों में बुजुर्गों की पीड़ा की पराकाष्ठा का वर्णन है। ऐसा कार्य करने का जज्बा अनुराधा अडवानी ने दिखाया है जो केवल किताबों में पढ़ने को मिलता है, लेकिन यह जोधपुर की धरती के लिए सौभाग्य की बात है कि हमारे बीच ऐसी महिला कार्यरत हैं, जिन्होंने समाज में बदलाव की पहल की। जब उन्होंने अनुबंध की नींव रखी थी तब किसी को भरोसा नहीं था कि अनुबंध का सफर मीलों लंबर चलेगा और देश में एक ज्योति बनकर समाज को आलोकित करेगा। 24 साल पहले अनुबंध शुरू हुआ। एक बुजुर्ग की दस्तक हुई। अनुराधा अडवानी, उनकी माताजी और पति नरेंद्र अडवानी ने समर्पित भाव से सेवा की। वो दिन और आज का दिन अनुबंध बुजुर्गों की निशुल्क और निस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण बन गया है। राइजिंग भास्कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह करता है कि जोधपुर की अनुराधा दीदी को उनके सेवा के जज्बे को देखते हुए पद्मश्री अवार्ड दिया जाए।










