पूर्व नरेश गज सिंह ने प्रदर्शनी का किया उद्घाटन
शिव वर्मा. जोधपुर
बिहार संग्रहालय पटना में मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा प्रदर्शित लघु चित्र प्रदर्शनी “शक्ति – दी सुप्रीम गॉडेस का शुक्रवार को जोधपुर के पूर्व नरेश गज सिंह ने फीता काटकर उद्घाटन किया । प्रदर्शनी बिहार संग्रहालय पटना के सहयोग से बिहार संग्रहालय बिएनाले के तृतीय संस्करण के तहत आयोजित गई है । यह प्रदर्शनी 31 दिसंबर तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी ।
पूर्व नरेश गज सिंह ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रदर्शनी हमें नारी शक्ति, धैर्य, सृजन व सामर्थ्य की याद दिलाती है। उन्होंने बिहार संग्रहालय व मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के चल रहे सांस्कृतिक व क्यूरेटोरियल संबंधों की सराहना की । पूर्व नरेश गज सिंह व राज परिवार के अन्य सदस्यों ने बिहार संग्रहालय का भ्रमण भी किया व बिहार संग्रहालय की सुंदर वास्तु कला, क्यूरेशन और प्रदर्शन की सराहना की ।
कार्यक्रम के समापन पर महानिदेशक अंजलि कुमार सिंह ने कहा कि इस वर्ष बिहार म्यूजियम बिएनाले के तीसरे संस्करण में इथोपिया, इंडोनेशिया, इक्वाडोर, श्रीलंका जैसे देशों की भागीदारी हुई । उन्होंने बिहार के विद्यार्थियों और युवाओं को ” शक्ति ” जैसी प्रदर्शनी से प्रेरणा लेने को कहा और मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट जोधपुर द्वारा प्रदर्शित प्रदर्शनी की सराहना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो डेबोरा स्वालो ने कहा कि शक्ति आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है । यह प्रदर्शनी हमें नारी शक्ति, धैर्य, सृजन और सामर्थ्य की याद दिलाती है ।
बिहार संग्रहालय के प्रभारी अपर निदेशक प्रशासन रणजीत सिंह राजपूत ने बताया कि शक्ति प्रदर्शनी का सह आयोजन मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की क्यूरेटर डॉ. सुनयना राठौड़ व डॉ. सौरव पाल ने आयोजित किया।स्वागत उद्बोधन उपनिदेशक बिहार संग्रहालय मौमिता घोष ने किया । कार्यक्रम का संचालन सहायक संग्रहालीय स्वाति सिंह ने किया ।
इनकी रही मुख्य अतिथि के रूप में गरिमा में उपस्थिति
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की क्यूरेटर डॉ. सुनयना राठौड़ ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्घाटन चिल्ड्रन्स गैलरी क्लासरूम में पूर्व नरेश गज सिंह द्वारा किया गया व महारानी हेमलता राज्ये व बाइजीलाल शिवरंजनी राज्ये व प्रो डेबो रा स्वामी की मुख्य अतिथि के रूप में गरिमामय उपस्थिति रही ।
20 लघु चित्र किए गए प्रदर्शित
क्यूरेटर डॉ. सुनयना राठौड़ ने बताया कि यह प्रदर्शनी मेहरानगढ़ के संग्रहालय से चयनित 20 लघु चित्रों के माध्यम से मारवाड़ के राठौड़ शासको की देवी शक्ति के प्रति अटूट भक्ति और उनके देवी को परम शक्ति के रूप में पूजने की परंपरा को प्रदर्शित करती है । उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षणों में 18 वीं शताब्दी की देवी माहात्म्य श्रृंखला के चित्र शामिल है ,जिसमें देवी के अनेक रूपों का चित्रण है, दैत्य संहारिणी , सृष्टि संतुलन की पुर्नर्स्थापिका और वह शक्ति जो संपूर्ण ब्रह्मांड को धारण करती है । उन्होंने बताया कि यह अनुपम चित्रकृतियां मारवाड़ रियासत के चित्रकारों की कला कुशलता का उत्कर्ष उदाहरण है और उसे आस्था, आध्यात्मिकता व सृष्टि को प्रतिबिंबित करती है जो राठौड़ वंश की देवी शक्ति में निहित श्रद्धा का आधार रही है ।
प्रदर्शनी में इनकी भी है भागीदारी
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के साथ-साथ अन्य कई प्रतिष्ठित भारतीय संस्थान नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट नई दिल्ली, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली व इंडियन काउंसिल फॉर कल्चर रिलेशन आईसीसीआर भाग ले रहे हैं । इसके अतिरिक्त वैश्विक दक्षिण के विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोगी भी इसमें सहभागी है । उन्होंने बताया कि पटना संग्रहालय बिएनाले जिसे अंतर सांस्कृतिक संवाद के एक अग्रणी मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है ।दक्षिणी एशिया के संग्रहालय संस्कृति परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण आयोजन बन चुका है । इस वर्ष का संस्करण ” वैश्विक दक्षिण : सांझी इतिहास यात्राएं ” विषय पर केंद्रित है । जिसका उद्देश्य एशिया अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका की परस्पर जुड़ी सांस्कृतिक कथाओं और सांझा विरासत का अन्वेषण करना है ।
Author: Dilip Purohit
Group Editor











