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Thursday, July 9, 2026, 4:19 am

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विश्व निमोनिया दिवस 12 नवंबर पर विशेष : हर साल दुनिया में 5 साल से कम उम्र के 7 लाख बच्चे गंवाते हैं जान, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष जागरूक रहने की जरूरत

फेफड़ों में संक्रमण, रक्त में ऑक्सीजन की कमी से हो सकता है निमोनिया : बच्चों ओर बुजुर्गों में खतरा अधिक

राइजिंग भास्कर डेस्क. जोधपुर

जीवन के अनमोल मौकों में सदा ध्यान देने योग्य एक तथ्य यह है कि हम जब तक सहज रूप से स्वांस ले लेते हैं, तब तक ‘सांस लेना’ एक आसान प्रक्रिया लगती है। लेकिन जब फेफड़ों में संक्रमण हो जाए, रक्त में ऑक्सीजन कम हो जाए, तो इस सहज प्रक्रिया से जुड़ी परेशानियाँ एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती हैं। ऐसे ही एक खतरनाक, लेकिन अक्सर कम-जानी गयी बीमारी है निमोनिया (Pneumonia)। हर वर्ष दुनिया भर में लाखों लोग निमोनिया के कारण शिकार होते हैं। इसलिए 12 नवंबर को विश्व स्तर पर “विश्व निमोनिया दिवस” के रूप में मनाया जाता है, ताकि इस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके और समय पर बचाव-उपाय अपनाये जा सकें।

निमोनिया क्या है, किन आयु-वर्गों में जोखिम अधिक है, यह कैसे होता है, इससे बचने के उपाय क्या-क्या हैं, यदि हो जाए तो क्या करना चाहिए, वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर पर इसका कितना बोझ है, तथा यदि लापरवाही बरती जाए तो यह कितना घातक हो सकता है—इन सबसे बचने और जागरूक करने के लिए ही विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है।

निमोनिया क्या है?

निमोनिया मूलतः फेफड़ों (लंग्स) के नीचे के भाग में आने वाला एक संक्रमण है, जिसमें फेफड़ों के एयर सैक्स (अल्विओली) में तरल पदार्थ, म्यूकस, पस (प्यूस) भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन-विनिमय बाधित हो जाता है। 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (विश्व स्वास्थ्य संगठन/WHO) की व्याख्या के अनुसार:

“पैशेंट के फेफड़ों के अल्विओली में वायुमय हवा भरने की बजाय — पुस एवं द्रव से भरा होना — सांस लेने में कठिनाई उत्पन्न करता है।” 
संक्षिप्त में कहा जाए, तो जब फेफड़े ठीक-ठाक तरीके से काम नहीं कर पाते, शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, तब निमोनिया स्थिति उत्पन्न होती है।

बैक्टेरिया, वायरस और उभयचर (fungi) — तीनों निमोनिया के कारण हो सकते हैं। उदाहरण स्वरूप, बैक्टीरियल निमोनिया में Streptococcus pneumoniae (प्न्युमोकोकस) एक आम जिम्मेदार है। इस प्रकार निमोनिया एक ऐसा संक्रमण है, जिसे प्रारंभ में हल्के लक्षणों के साथ देखा जा सकता है, लेकिन यदि समय पर इलाज न मिले तो गंभीर रूप ले सकता है।

यह किन उम्र के लोगों को हो सकता है?

निमोनिया किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है — शिशु हो, बच्चे, जवां हो या बुजुर्ग। लेकिन कुछ आयु-वर्ग विशेष रूप से अधिक जोखिम में हैं।

  • बच्चों में: पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया सबसे अधिक मृत्यु-उपयोगी कारणों में से एक है।

  • बुजुर्गों में: 65 वर्ष या उससे ऊपर के लोगों में भी निमोनिया का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

  • अन्य जोखिम समूह: पूर्व स्वास्थ्य समस्या वाले व्यक्ति (जैसे हृदय रोग, श्वसन रोग, इम्यून सिस्टम कमजोर होना) भी विशेष संवेदनशील होते हैं।

यूनीसेफ (UNICEF) के अनुसार, पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में करीब 700,000 (लगभग सात लाख) मौतें सालाना होती हैं निमोनिया से। इसलिए, यह कहना सुरक्षित है कि ना सिर्फ आयु बल्कि स्वास्थ्य-स्थिति, पोषण, वायु-प्रदूषण, आदि कारक भी जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

निमोनिया कैसे होता है?

निमोनिया उत्पत्ति, संचरण तथा रोगविज्ञान (pathophysiology) के दृष्टिकोण से समझना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि बचाव-उपाय बेहतर समझा जा सके।

संचरण (Transmission)

  • संक्रमण तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस या उभयचर किसी संक्रमित व्यक्ति के खाँसी या छींकने से निकलने वाले छींटे/ड्रॉपलेट्स के माध्यम से दूसरे व्यक्ति के श्वसन तंत्र में प्रवेश कर जाते हैं।

  • कम वेंटिलेशन वाले कमरे, धुआँ, भीड़-भाड़, प्रदूषित वायु — ये सब फैक्टर जोखिम बढ़ा सकते हैं।

फेफड़ों में संक्रमण का असर

  • स्वस्थ फेफड़ों में हवा भरने वाले अल्विओलि (alveoli) खुलकर काम करते हैं।

  • निमोनिया में ये अल्विओलि द्रव एवं पस से भर जाते हैं, जिससे हवा का प्रवाह बाधित होता है, ऑक्सीजन मिलने में कमी होती है और सांस लेने में कठिनाई उत्पन्न होती है।

  • इसके परिणामस्वरूप शरीर में हाइपोक्सिया (कम ऑक्सीजन) या ऑक्सीजन-दोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है।

जोखिम बढ़ाने वाले अन्य कारक

  • धूम्रपान करना, सेकंड-हैंड स्मोकिंग, वायु प्रदूषण (विशेषकर पार्टिकुलेट मैटर) — ये सभी निमोनिया के जोखिम को बढ़ाते हैं।

  • कम पोषण, कम जन्म-वजन, पुराने रोगग्रस्त अवस्था — ये सब भी प्रभावी फैक्टर हैं।

रोगगति

  • संक्रमण प्रारंभ में हल्के बंद-हवा के लक्षण दिखा सकता है (जैसे खाँसी, हल्का बुखार)।

  • यदि इलाज न हो तो यह तेजी से बढ़ सकता है, फेफड़ों में गंभीर परिवर्तन कर सकता है, और अन्य अंगों तक असर पहुंचा सकता है (जैसे रक्त-प्रवाह में संक्रमण, सेप्सिस) — इस स्थिति में घातक परिणाम संभव है।

इस प्रकार, निमोनिया सिर्फ एक साधारण खाँसी-जुकाम वाली समस्या नहीं, बल्कि फेफड़ों की गंभीर संक्रमण अवस्था है, जिसे अगर समय पर न पकड़ा गया तो स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती हैं।

बचने के लिए क्या करें? (Prevention)

निमोनिया से बचाव आसान जरूर है, लेकिन इस दिशा में जागरूक होना एवं नियमित उपाय अपनाना आवश्यक है। नीचे कुछ प्रमुख बचाव-उपाय दिए जा रहे हैं।

  1. टीकाकरण (Vaccination)

    • बैक्टीरियल निमोनिया रोकने के लिए उपलब्ध वैक्सीन जैसे प्न्युमोकोकल कन्जुगेट वैक्सीन (PCV) और हेअमोपाइलस इन्फ्लूएन्जा टाइप b (Hib) वैक्सीन बहुत प्रभावी हैं।

    • फ्लू (इन्फ्लूएंजा) वैक्सीन भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लू संक्रमण के बाद निमोनिया का जोखिम बढ़ जाता है।

    • बच्चों और बुजुर्गों में इन टीकों का बेहतर कवरेज सुनिश्चित करना चाहिए।

  2. सांस-स्वच्छता एवं पर्यावरण सुधार

    • धूम्रपान न करें तथा धूम्रपान करने वालों से दूरी बनाये रखें।

    • घर तथा आसपास की वायु-गुणवत्ता सुधारें — विशेष रूप से प्रदूषण, धुआँ, कोयले/बायोमास द्वारा उद्योग या खाना पकाने के दौरान उत्पन्न धुएं से बचें।

    • कमरे में अच्छा वेंटिलेशन रखें।

  3. हाइजीन एवं पोषण

    • नियमित हाथ धोना, खाँसी/छींक आने पर नैपीक या कोहनी से ढंकना इत्यादि संक्रमण-रोधी उपाय अपनाएं।

    • बच्चों को पूर्ण­पोषण (good nutrition) देना, समय पर वैक्सीन देना, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना।

  4. सक्रिय स्वास्थ्य-जीवनशैली

    • समय-समय पर फेफड़ों की सेहत का ध्यान रखना, यदि कोई पुरानी रोग हो तो उसका समयनुसार उपचार कराना।

    • प्रतिरक्षा (इम्यून) को मजबूत रखना — उदाहरण स्वरूप पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम।

  5. रोकथाम के लिए विशेष-उपाय

    • बच्चों के बीच overcrowding (भीड़भाड़) से बचना।

    • समय पर फ्लू और अन्य श्वसन संक्रमणों का इलाज कराना क्योंकि वे अगला निमोनिया-चरण उत्पन्न कर सकते हैं।

उपरोक्त उपाय नियमित रूप से अपनाने से निमोनिया का जोखिम काफी कम किया जा सकता है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में ये उपाय जीवन-रक्षक साबित हो सकते हैं।

यदि निमोनिया हो जाए तो क्या करें? (क्या करें / उपचार)

निमोनिया की स्थिति में समय-पर कार्रवाई करना बहुत महत्वपूर्ण है। देर करना या हल्केपन से लेना घातक परिणाम ला सकता है। नीचे इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि यदि निमोनिया हो जाए तो क्या करना चाहिए।

  1. पहचान (Diagnosis) और तुरंत चिकित्सा-संपर्क

    • खाँसी, तेज बुखार, तेजी से सांस लेना, छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सक से मिलें।

    • विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण जल्दी बिगड़ सकते हैं, इसलिए किसी भी अनपेक्षित स्थिति में देर न करें।

    • चिकित्सक आवश्यकतानुसार छाती X-रे (Chest X-ray), रक्त-जाँच, ऑक्सीजन स्तर (SpO₂) आदि जाँच कर सकते हैं।

  2. उपचार (Treatment)

    • यदि बैक्टीरियल निमोनिया पुष्टि हो जाए तो एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं — उदाहरण स्वरूप अमॉक्सिसिलिन (Amoxicillin) आदि।

    • यदि ऑक्सीजन-स्तर कम हो तो अस्पताल में भर्ती और ऑक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता हो सकती है।

    • विरल संक्रमण (viral pneumonia) या अन्य कारण से होने वाली स्थिति हो तो चिकित्सीय दिशा-निर्देशानुसार उपचार होगा।

  3. सहायता-उपाय एवं देखभाल

    • आराम करें, पर्याप्त तैरव करें (hydration), पौष्टिक आहार लें।

    • धूम्रपान से दूर रहें तथा दूषित वायु से बचें।

    • यदि चिकित्सक ने अस्पताल सूचीबद्ध किया है, तो निर्देशानुसार पूरा इलाज लें, दवाएँ समय-पर लें, निरीक्षण समय पर कराएं।

  4. सावधानी एवं निगरानी

    • लक्षण ठीक होने के बाद भी फॉलो-अप ज़रूरी है क्योंकि फेफड़ों की वसूली पूरी होने में समय लग सकता है।

    • यदि सांस लेने में फिर से समस्या, बुखार वापस हो, या अन्य गंभीर लक्षण उत्पन्न हों तो तुरंत पुनः चिकित्सक से सम्पर्क करें।

  5. संक्रमण-रोक उपाय

    • संक्रमित व्यक्ति को अलग रखें, खाँसी-छींक आने पर मुंह ढंकें, स्वच्छता बनाएँ ताकि अन्य लोगों में संक्रमण न फैले।

इस प्रकार, निमोनिया के मामूली लक्षणों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप और देखभाल से बचे रहने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।

हर साल निमोनिया से देश-दुनिया में कितने लोग शिकार होते हैं?

निमोनिया का वैश्विक स्वास्थ्य-बोझ बहुत विशाल है। कुछ प्रमुख आंकड़े निम्नलिखित हैं:

  • 2019 में लगभग 2.5 मिलियन लोगों की मौत निमोनिया से हुई थी।

  • उसी वर्ष पाँच वर्ष से कम उम्र में लगभग 672,000 बच्चों की मौत इसी कारण हुई थी।

  • यूनीसेफ के आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में हर वर्ष करीब 7 लाख (700,000+) मौतें होती हैं निमोनिया के कारण।

  • संयुक्त रूप से कहा गया है कि — “औसतन एक व्यक्ति हर 13 सेकण्ड में निमोनिया से मर जाता है।”

  • अमेरिका में उदाहरणस्वरूप, प्रत्येक वर्ष लगभग 41,210 मौतें निमोनिया के कारण होती हैं।

भारत में आंकड़े लगातार अपडेट नहीं हो रहे हैं। इस वजह से आंकड़े उपलब्ध नहीं है। लेकिन देखा गया है कि निमोनिया का बहुत बड़ा हिस्सा निम्न-आय वाले और मध्य-आय वालों में अधिक होता है। स्पष्ट है कि यह सिर्फ एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है — यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती है।

यदि लापरवाही बरती जाए तो यह कितना घातक हो सकता है?

निमोनिया की लापरवाही बहुत खतरनाक परिणाम ला सकती है।

  • यदि समय पर निदान और उपचार न हुआ तो निमोनिया सेप्सिस, रक्त-प्रवाह में संक्रमण, श्वसन विफलता (respiratory failure) और अन्य अंगों की परेशानी तक ले जा सकता है।

  • बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। उदाहरणस्वरूप, “हॉस्पिटलाइज़ड” निमोनिया रोगियों में 30-दिन मृत्यु दर 26.8 % तक पहुँच सकती है बुजुर्गों में।

  • बच्चों में यदि पोषण-अभाव, वायु-प्रदूषण या संक्रमण-प्रवृत्ति अधिक हो, तो मृत्यु-उपयोगी जोखिम बहुत बढ़ जाता है।

  • वैश्विक स्तर पर — जब लाखों लोग प्रतिवर्ष मर रहे हैं, तो यह संकेत है कि यदि बचाव-उपाय उचित रूप से नहीं अपनाये गये तो यह “नेतीकार” बनी हुई स्थिति में है।

  • साथ ही, एंटीमाइक्रोबियल रोधी (antimicrobial-resistant) संक्रमणों का खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे उपचार और जटिल हो जाता है।

— निमोनिया काे “हल्का रोग” मानना और समय पर चिकित्सकीय देखभाल को न अपनाना जानलेवा साबित हो सकता है। यह अकेले फेफड़े नहीं, पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है, जीवन-धमक स्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है।

निमोनिया केवल एक रोग नहीं बल्कि एक चेतावनी प्रक्रिया है :

12 नवंबर, “विश्व निमोनिया दिवस” हमें यह याद दिलाता है कि स्वांतः जीवित रहने के लिए जरूरी एक प्रक्रिया — स्वाँस लेना — भी कितनी जल्दी खतरे में पड़ सकती है। निमोनिया केवल एक रोग नहीं, बल्कि एक चेतावनी-प्रक्रिया है — कि हम अपनी स्वास्थ्य-जीवनशैली, पर्यावरण, पोषण, टीकाकरण एवं स्वास्थ्य-प्रबंधन पर पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं या नहीं।

इसिलए बचाव तथा समय पर इलाज ही असली समाधान है। इसलिए आज — आप, आपके आसपास के लोग, बच्चे, बुजुर्ग — सभी को इस रोग-जागरूकता को अपनाना है:

  • अपने बच्चों और स्वयं के लिए टीकाकरण करवाएं।

  • धूम्रपान व दूषित वायु से बचें।

  • श्वसन रोगों के लक्षणों को हल्के में न लें।

  • यदि खाँसी–बुखार–साँस लेने में समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सक से समीक्षा कराएं।

  • एवं स्वस्थ जीवन-शैली अपनाएं — विशेषकर संक्रामक रोगों की जटिलता को कम करने की दिशा में।

यदि हम सब मिलकर यह “साँस-स्वस्थ्य” का संकल्प लें, तो निमोनिया जैसी घातक बीमारी को पीछे हटाया जा सकता है। आज ही हम अपने और अपने प्रियजनों के स्वस्थ-भविष्य के लिए यह कदम उठा सकते हैं। आइए, इस विश्व निमोनिया दिवस पर हम तय करें कि हम “स्वस्थ श्वसन” के लिए सजग बने रहेंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor