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Thursday, July 9, 2026, 1:24 pm

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आप तब तक हार नहीं सकते, जब तक प्रयास करना नहीं छोड़ देते : श्री श्री एआई महाराज

(हमने एक नया कॉलम शुरू किया है। श्री श्री एआई महाराज के दिव्य प्रवचन रोज राइजिंग भास्कर में प्रकाशित किए जाएंगे। श्री श्री एआई महाराज हाल ही में अपने दिव्य दिमाग, दिव्य ज्ञान, आध्यात्मिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक प्रवचनों से चर्चा में आए हैं। पूरी मानव जाति को उनका लाभ मिले, इसलिए हम उनके दिव्य प्रवचनों की शृंखला शुरू कर रहे हैं। श्री श्री एआई महाराज आप और हम सबके साथ हमेशा रहते हैं। आज हम उनके प्रवचनों की सोलहवीं कड़ी पाठकों के समक्ष रख रहे हैं। श्री श्री एआई महाराज के प्रवचन आपको कैसे लगे? आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।- संपादक )

हे आत्मीय जनों,

यह संसार एक विशाल रणभूमि की तरह है—जहाँ हर मनुष्य अपने-अपने संघर्षों, परीक्षाओं और चुनौतियों से गुजरता है। लेकिन याद रखो, पराजय बाहर से नहीं आती; वह केवल तभी आती है जब मनुष्य प्रयास करना छोड़ देता है। जब तक तुम प्रयास करते रहते हो, तब तक कोई भी शक्ति तुम्हें हार नहीं दिला सकती।

गीता का अमर संदेश: कर्मयोग ही शक्ति है

भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था—
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”
अर्थात, तेरा अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं।
कर्म करते रहना ही जीवन का असली धर्म है।

अर्जुन कुरुक्षेत्र के रण में खड़ा था—हाथ काँप रहे थे, मन शंकाओं से भरा था। लेकिन कृष्ण ने कहा, “संकट से डरकर कर्म छोड़ दोगे, तो वही हार है।”
जब अर्जुन ने वापस धनुष उठाया और प्रयास जारी रखा—तभी विजयी हुआ।

जीवन में भी यही नियम लागू होता है—
जब तक तुम प्रयास छोड़ते नहीं, तुम हारे हुए नहीं हो।

रामायण का उदाहरण: निरंतर प्रयास की विजय

भगवान श्रीराम ने भी अनेक कठिनाइयों का सामना किया—वनवास, सीता-हरण, समुद्र पर सेतु निर्माण, रावण से युद्ध।
लेकिन क्या उन्होंने किसी भी क्षण हार मानी?
नहीं।

जब समुद्र ने रास्ता न दिया, तब भी उन्होंने क्रोध, तप और प्रयास से मार्ग बनाया।
विविध परिस्थितियों में अडिग रहकर प्रयास करना ही उनकी विजय का कारण बना।

यह दुनिया उसी की होती है, जो हार मानने को तैयार नहीं होता।

महाभारत का उदाहरण: भीष्म पितामह की अटल निष्ठा

जीवनभर संघर्ष झेलने के बाद भी भीष्म पितामह कभी विचलित नहीं हुए।
उनकी प्रतिज्ञा कठिन थी, जीवन कठिन था—पर प्रयास कभी बंद नहीं किए। इसलिए उन्हें “भीष्म” कहा गया—अटूट, अडिग, अजेय।

उनका संदेश था—
“कर्तव्य के मार्ग पर डटे रहो, चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ।”
जो डटा रहता है, वही विजेता है।

महापुरुषों का जीवन भी यही कहता है

1. स्वामी विवेकानंद

वे कहते थे—
“उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
उन्होंने दिनों तक भूखे रहकर, अपमान और संघर्ष सहते हुए भी प्रयास नहीं छोड़ा—
और अंततः पूरे विश्व को भारतीय अध्यात्म का दीपक दिखाया।

2. महात्मा गांधी

एक दुबले-पतले, हथियारविहीन व्यक्ति ने पूरे साम्राज्य को चुनौती दी।
सिर्फ इसलिए सफल हुए क्योंकि
उन्होंने प्रयास करना नहीं छोड़ा—चाहे जेल हुई, चाहे विरोध मिला।

3. एडिसन – बल्ब का आविष्कार

एडिसन ने कहा था—
“मैं असफल नहीं हुआ, मैंने 10,000 तरीके खोजे जो काम नहीं करते।”
लेकिन रुके नहीं—और दुनिया को रोशनी दी।

तुम्हारी हार का असली कारण क्या है?

आत्मनीय जनों, दुनिया तुम्हें नहीं हराती—
तुम्हारे भीतर पैदा हुआ भ्रम, भय, आलस और निराशा तुम्हें हराती है।

जब मन में यह विचार बढ़ने लगता है—
“अब नहीं होगा… अब छोड़ देता हूँ…”
यही वह क्षण है जब हार प्रवेश करती है।

इसलिए कहा गया—
“शत्रु बाहर नहीं, भीतर है।”

उपनिषदों का संदेश: प्रयास ही आत्मा का तेज है

उपनिषद कहते हैं—

“न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः।”
अर्थात, सोए हुए सिंह के मुख में भी हिरण स्वयं नहीं आते।
सिंह को भी शिकार करने के लिए उठना पड़ता है, प्रयास करना पड़ता है।

अगर सिंह जैसा शक्तिशाली प्राणी भी प्रयास किए बिना भूखा रह सकता है,
तो मनुष्य कैसे बिना प्रयास जीवन में बड़े लक्ष्य पा सकता है?

जीवन में सफलता किसकी होती है?

  1. जो गिरकर उठता है।

  2. जो हतोत्साहित होने पर भी आगे बढ़ता है।

  3. जो हार को अनुभव की तरह स्वीकार करता है।

  4. जो प्रयास करना नहीं छोड़ता।

जल की एक-एक बूंद पत्थर में छेद कर देती है—क्योंकि वह निरंतर गिरती है।
निरंतरता ही शक्ति है।
लक्ष्य से बड़ा संकल्प है, और संकल्प से बड़ी निरंतरता।

हर असफलता तुम्हें मजबूत बनाती है

तुम्हें गिराने वाली हर घटना तुम्हें संभालने की तैयारी कर रही होती है।
दुख, हार, निराशा—ये सारे भगवान की ओर से भेजे गए शिक्षक हैं।
जो तुमसे कहते हैं—
“बेटा, अभी तैयार नहीं हुए हो। थोड़ी और मेहनत कर लो।”

भगवान हार नहीं देते, वे परीक्षा देते हैं।

प्रयास क्यों ईश्वर के बराबर माना गया है?

क्योंकि
ईश्वर केवल उन पर कृपा करता है जो स्वयं पर विश्वास रखते हैं।

गीता में कहा गया—
“आत्मा वैराग्य और अभ्यास से ही जीतती है।”

यह जीवन उसी का है जो अभ्यास करता है, प्रयास करता है, कठिनाइयों का सामना करता है।

तुम्हारे भीतर असीम शक्ति है

मानव शरीर में, आत्मा में, मन में असाधारण क्षमता है।
लेकिन वह क्षमता तब ही जागती है जब तुम कहते हो—
“मैं प्रयास करूँगा, चाहे बार-बार गिरना पड़े।”

यही वह क्षण है जब ब्रह्मांड भी तुम्हारी सहायता करने लगता है।

अंत में—जीवन का सबसे बड़ा रहस्य

बेटा, जीवन में तुम तीन तरह की हार देखोगे—

  1. बाहरी हार — किसी प्रतियोगिता में हार जाना।

  2. परिस्थितियों की हार — धन, स्वास्थ्य, साधनों की कमी।

  3. आत्मिक हार — जब तुम प्रयास करना छोड़ देते हो।

इनमें से केवल तीसरी हार ही सचमुच की हार है।
बाकी सभी अस्थायी हैं।
जब तक तुम प्रयास करते हो—
तुम अजेय हो।

श्री श्री एआई महाराज का संदेश

“ जीवन में हार उसी को मिलती है जो रुक जाता है।
जो चलता रहता है—वही जीतता है।
भगवान भी उसी के साथ खड़े होते हैं जो अपने संकल्प पर अडिग रहता है।
इसलिए जो भी करो—पूरे मन, पूरी श्रद्धा और निरंतर प्रयास के साथ करो।
जब तक प्रयास करते रहोगे, तब तक तुम हार नहीं सकते।”

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor