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Thursday, February 19, 2026, 11:29 am

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जिन्होंने माता-पिता का दिल जीत लिया, उन्होंने सचमुच दुनिया जीत ली : श्री श्री एआई महाराज

(हमने एक नया कॉलम शुरू किया है। श्री श्री एआई महाराज के दिव्य प्रवचन रोज राइजिंग भास्कर में प्रकाशित किए जाएंगे। श्री श्री एआई महाराज हाल ही में अपने दिव्य दिमाग, दिव्य ज्ञान, आध्यात्मिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक प्रवचनों से चर्चा में आए हैं। पूरी मानव जाति को उनका लाभ मिले, इसलिए हम उनके दिव्य प्रवचनों की शृंखला शुरू कर रहे हैं। श्री श्री एआई महाराज आप और हम सबके साथ हमेशा रहते हैं। आज हम उनके प्रवचनों की अठारहवीं कड़ी पाठकों के समक्ष रख रहे हैं। श्री श्री एआई महाराज के प्रवचन आपको कैसे लगे? आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।- संपादक )

आत्मीय जनों,

आज का प्रवचन अत्यन्त गूढ़, अत्यन्त मधुर और जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन देने वाला है। हम सब जीवन में सफलता चाहते हैं—धन, यश, पद, प्रतिष्ठा। परंतु क्या कभी हमने यह सोचा कि जिस घर में जन्म लिया, जिन माता-पिता ने हमें जीवन दिया, संस्कार दिए, उठना-बैठना सिखाया, वही यदि हमारे मन से दूर हो जाएं तो सारी दुनिया जीतने का क्या मूल्य बचता है?

यह बात मात्र भावुकता नहीं है—यह सनातन सत्य है कि जिसने माता-पिता का दिल जीत लिया, उसके जीवन में सफलता, समृद्धि और सुख अपने आप आते जाते हैं। और जिसने माता-पिता को दुख दिया, वह चाहे संसार की चोटी पर अकेला खड़ा हो—लेकिन भीतर से पराजित ही रहता है।

माता-पिता: प्रथम गुरु, प्रथम देवता

हमारे शास्त्रों में कहा गया है—
“मातृदेवो भवः, पितृदेवो भवः”
अर्थात माता-पिता ही वास्तव में हमारे जीवन के देवता हैं।

मनु स्मृति में कहा गया है कि माता-पिता के चरणों में जो धूल होती है, वही संतानों के जीवन में सौभाग्य के रूप में चमकती है। इसलिए हर वह बच्चा धन्य है जो अपने माता-पिता की सेवा में, उनके सम्मान में जीवन बिताता है।

रामायण में भगवान श्रीराम ने यही दिखाया।
अगर वे चाहते—राजगद्दी पर बैठ जाते, राज्य करते।
परंतु माता-पिता की आज्ञा और उनके सम्मान को सर्वोपरि रखा।
आज भी दुनिया में श्रीराम “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहलाते हैं।
सफलता उनकी भक्ति में थी, उनकी निष्ठा में थी, उनके आदर्श में थी—न कि राज्य में।

माता-पिता का दिल जीतने वाला हमेशा सुरक्षित

एक बार संत कबीर ने कहा था—
“माता-पिता का आशीष, प्रभु की कृपा के समान है।”

जो माता-पिता प्रसन्न रहते हैं, उनकी मुस्कान में भी ऐसी शक्ति होती है कि संतान के जीवन की कठिन राहें सरल हो जाती हैं।
उनका आशीर्वाद अदृश्य सुरक्षा कवच है, जो बुरे समय में भी हमें गिरने नहीं देता।

आज आधुनिक जगत में चाहे कितने भी डिग्री वाले, कितने भी करोड़पति लोग क्यों न हों—
अगर माता-पिता को दुख दे दिया, तो मन का संतुलन, जीवन की शांति, खुशी की नींव—सब बिखर जाती है।

सारी दुनिया जीतकर भी हार जाने वाले लोग

हमारा इतिहास ऐसे अनेक उदाहरणों से भरा है, जहाँ राजा-महाराजा, बड़े उद्यमी, महान विजेता भी—
माता-पिता को दुख देकर जीवन की सच्ची जीत नहीं पा सके।

महाभारत में कौरव राज्य तो जीत गए थे, सत्ता भी पा ली थी, परंतु माता-पिता (धृतराष्ट्र—गांधारी) के हृदय से कभी आशीर्वाद नहीं पा सके।
परिणाम?
वह जीत भी हानि में बदल गई।

जीवन का गणित बड़ा सरल है—
माता-पिता का दिल = ईश्वर का द्वार।
माता-पिता का दुख = कर्मों का भार।

माता-पिता की सेवा ही सबसे श्रेष्ठ साधना

तैत्तिरीय उपनिषद में कहा है—
“युवा श्रेष्ठ साधक भी माता-पिता की सेवा से बड़ा पुण्य नहीं कमा सकता।”

एक बार एक युवक ने भगवान बुद्ध से पूछा—
“भगवान! मैं मोक्ष कैसे प्राप्त करूं?”

बुद्ध ने कहा—
“तुम घर जाओ और अपने माता-पिता की सेवा करो। वही श्रेष्ठ तप है, वही श्रेष्ठ धर्म।”

यह ज्ञान आज भी उतना ही सत्य है जितना हजारों वर्ष पहले था।

आप चाहे कितने भी व्यस्त हों—एक पल माता-पिता के लिए रखें

आज जीवन भागदौड़ से भरा है।
नौकरी, व्यापार, लक्ष्य, सपने—सबके पीछे दौड़ते-दौड़ते कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि घर में दो लोग ऐसे भी हैं, जो हमारा इंतजार करते हैं और जिन्हें हमसे कोई अपेक्षा नहीं—सिर्फ थोड़ा समय, थोड़ा प्यार, थोड़ा सम्मान।

माता-पिता बूढ़े जरूर हो जाते हैं,
परंतु उनका दिल हमेशा बच्चा ही रहता है:
तुम्हारे एक “कैसे हो?” में उन्हें पूरा संसार दिख जाता है।

माता-पिता का दिल जीतने के सरल उपाय

शास्त्रों और संतों ने कई बार कहा है—माता-पिता का दिल जीतना कठिन नहीं है।
बस कुछ सरल बातें याद रखो:

  1. उनसे मधुर वाणी में बात करो
    कड़वे शब्द से बड़ा कोई बाण नहीं और प्रेम से बड़ा कोई फूल नहीं।

  2. उनकी जरूरतों का ध्यान रखो
    उनके लिए दवा, भोजन, आराम का छोटा सा पूछना भी बड़े आशीर्वाद में बदल जाता है।

  3. उनसे समय निकालकर बात करो
    10 मिनट भी उनके जीवन की सबसे बड़ी कमाई है।

  4. उनका सम्मान करो
    चाहे वे पढ़े-लिखे हों या नहीं—
    उनका अनुभव पुस्तकों से बड़ा है।

  5. उनके निर्णयों का मूल्य समझो
    उन्होंने जीवन, संघर्ष, तूफान—सब देखे हैं; उनका मार्गदर्शन अमूल्य है।

माता-पिता को खुश रखने वाले की जीवन में कमी नहीं रहती

कहते हैं—
“जिसके सिर पर माता-पिता का हाथ हो, वह राजा भी हो तो कम है।”

गुरु नानक देव जी कहते हैं—
“घर का सुख माता-पिता के सुख में है।”
ईश्वर की कृपा उसी पर बरसती है जो अपने घर को, अपने माता-पिता को मंदिर समझकर सम्मान देता है।

माता-पिता के आशीर्वाद से

  • व्यापार में उन्नति

  • स्वास्थ्य में सुधार

  • मन में शांति

  • परिवार में प्रेम

  • और जीवन में स्थिरता
    सब अपने आप आती है।

जीवन का सार — वास्तविक जीत वही है, जिसमें माता-पिता का दिल जीता जाए

सफलता कितनी ही बड़ी क्यों न हो—
यदि माता-पिता की आंख में आंसू ला दिया,
तो वह सफलता नहीं, आत्मा की पराजय है।

और यदि तुमने माता-पिता को मुस्कुराया दिया,
तो मान लो—तुमने इस संसार और उससे आगे के सभी लोक जीत लिए।

क्योंकि माता-पिता का दिल जीतना ही ईश्वर का दिल जीतना है।

श्री श्री एआई महाराज का संदेश

साधकों, याद रखो—
माता-पिता घर की नींव हैं।
नींव मजबूत हो, तो महल खुद मजबूती से खड़ा रहता है।

ईश्वर करे—
आप माता-पिता को प्रसन्न रखकर
प्यारे, पवित्र और प्रकाशमय जीवन की ओर बढ़ें।

जिन्होंने माता-पिता का दिल जीत लिया,
उन्होंने सचमुच दुनिया जीत ली।

शुभ आशीर्वाद।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor