वास्तविकता यह है कि भारत में आज भी यह रोग जितना स्वास्थ्य से जुड़ा है, उससे कहीं अधिक यह गलत मान्यताओं और सामाजिक कलंक से घिरा हुआ है। मिर्गी क्या है, क्यों होती है, इसके बारे में कौन-कौन से अंधविश्वास प्रचलित हैं, किस तरह संभालना चाहिए और भारत सहित दुनिया में इसके कितने मरीज हैं। यह जानना जरूरी है।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोध्पुर
17 नवंबर को पूरे देश में राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। उद्देश्य स्पष्ट है—मिर्गी रोग के बारे में वैज्ञानिक समझ बढ़ाना, अंधविश्वास दूर करना और रोगियों के प्रति समाज का व्यवहार बदलना। लेकिन वास्तविकता यह है कि भारत में आज भी यह रोग जितना स्वास्थ्य से जुड़ा है, उससे कहीं अधिक यह गलत मान्यताओं और सामाजिक कलंक से घिरा हुआ है।
मिर्गी क्या है, क्यों होती है, इसके बारे में कौन-कौन से अंधविश्वास प्रचलित हैं, किस तरह संभालना चाहिए और भारत सहित दुनिया में इसके कितने मरीज हैं। यह जानना जरूरी है।
मिर्गी क्या है?—दिमाग की विद्युत गतिविधि में गड़बड़ी
मिर्गी (Epilepsy) एक तंत्रिका संबंधी क्रॉनिक बीमारी है, जिसमें दिमाग की सामान्य विद्युत गतिविधि बाधित हो जाती है। दिमाग में अचानक असामान्य इलेक्ट्रिकल डिसचार्ज होता है, जिससे व्यक्ति को दौरे (seizures) आते हैं।
यह दौरे अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं—
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पूरे शरीर में झटके आना,
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कुछ सेकंड के लिए चेतना खो देना,
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हाथ-पैर अकड़ जाना,
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खाली निगाहों से देखने लगना,
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शरीर सुन्न पड़ जाना,
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अचानक गिर जाना।
डरने की बात नहीं—मिर्गी 100% एक चिकित्सकीय रोग है, न कि कोई अलौकिक या मानसिक समस्या।
मिर्गी कैसे होती है?—कई कारण, लेकिन कई मामलों में स्पष्ट वजह नहीं
मिर्गी कई कारणों से हो सकती है, जिनमें प्रमुख हैं—
1. दिमाग में चोट
सड़क दुर्घटना, गिरने, सिर पर चोट लगने से।
2. जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी
यह समस्या नवजात में मिर्गी का बड़ा कारण बनती है।
3. ब्रेन ट्यूमर या संक्रमण
मेनिन्जाइटिस, एन्सेफलाइटिस, मलेरिया आदि से भी मिर्गी हो सकती है।
4. स्ट्रोक (Brain Stroke)
आयु बढ़ने के साथ स्ट्रोक से मिर्गी के मामले बढ़ते हैं।
5. अनुवांशिक कारण
कुछ प्रकार की मिर्गी परिवार में चलती है।
6. न्यूरोलॉजिकल बदलाव
दिमाग के विकास में समस्या या असंतुलन।
7. कई मामलों में कारण स्पष्ट नहीं
लगभग 50% मरीजों में सही वजह पता नहीं चलती, फिर भी दवाओं से पूरा नियंत्रण संभव है।
मिर्गी को लेकर अंधविश्वास — मरीज से ज्यादा बीमारी समाज की सोच में
भारत में मिर्गी को लेकर इतने अंधविश्वास और भ्रांतियां हैं कि इलाज से पहले इन धारणाओं का इलाज जरूरी है।
1. मिर्गी को भूत-प्रेत या टोने-टोटके से जोड़ना
कई जगह लोग इसे देवी-देवता का प्रकोप मान लेते हैं।
यह पूरी तरह गलत है। यह सिर्फ दिमाग की मेडिकल समस्या है।
2. दौरे के समय जूता सूंघाना
कई लोग मानते हैं कि जूता सूंघाने से रोगी को होश आ जाता है।
यह न सिर्फ बेअसर है, बल्कि संक्रमण का खतरा बढ़ा देता है।
3. व्यक्ति के मुंह में चाबी, नींबू, पानी डालना
लगभग हर अस्पताल इस भ्रम को दूर करने में लगा है।
दौरे के समय मुंह में कुछ भी डालना बहुत खतरनाक है—घुटन से मौत भी हो सकती है।
4. मिर्गी वाले को विवाह योग्य या नौकरी योग्य न मानना
भारत में यह बीमारी अभी भी कलंक की तरह देखी जाती है।
सही इलाज से मिर्गी मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं।
5. मिर्गी छूने से फैलती है
यह एक बड़ा मिथक है।
मिर्गी संक्रामक नहीं है—छूने या पास बैठने से नहीं फैलती।
गलत धारणाएं बीमारी से भी अधिक नुकसान करती हैं—मरीज डर, शर्म और अवसाद में चला जाता है।
मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या करें?—सही समय पर सही कदम उठाएं
अगर किसी व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़े, तो क्या करना चाहिए?
1. घबराएं नहीं
दौरा आमतौर पर 30 सेकंड से 2 मिनट तक रहता है।
2. मरीज को गिरने से बचाएं
कठोर वस्तु दूर कर दें, ताकि चोट न लगे।
3. मरीज को एक तरफ करवट दिलाएं
इससे लार बाहर निकलती रहती है और सांस का रास्ता खुला रहता है।
4. कपड़े ढीले कर दें
विशेषकर गले के आसपास।
5. समय नोट करें
यदि दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले, तुरंत अस्पताल ले जाएं।
क्या नहीं करना चाहिए?
मुंह में पानी, चाबी, उंगली, दवाई न डालें
पकड़कर रोकने की कोशिश न करें
जबरदस्ती जगाने की कोशिश न करें
भीड़ न लगाएं
सही प्राथमिक उपचार मरीज की जान बचा सकता है।
भारत और दुनिया में मिर्गी मरीजों की संख्या
दुनिया में
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया में 6 करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से प्रभावित हैं।
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यह दुनिया की सबसे आम न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में से एक है।
भारत में
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भारत में लगभग 1 करोड़ 10 लाख (11 मिलियन) लोग मिर्गी से पीड़ित हैं।
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हर साल करीब 5–6 लाख नए मामले सामने आते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण बीमारी का पता देर से चलता है।
डॉक्टरों का मानना है कि 70% मरीजों में दवाओं से रोग पूरी तरह नियंत्रित हो जाता है।
लेकिन समस्या बीमारी से ज्यादा—समाज की सोच की है।
जागरूकता क्यों जरूरी है?
मिर्गी को लेकर जागरूकता इसलिए जरूरी है, क्योंकि—
लोग इसे गलत तरीके से समझते हैं
जिससे मरीज इलाज से दूर हो जाते हैं।
समाजिक भेदभाव बढ़ता है
शादी, रोजगार, शिक्षा में बाधाएं आती हैं।
इलाज में देरी होती है
देर से इलाज शुरू होने पर नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
गलत प्राथमिक उपचार से जान का खतरा
जूता सूंघाना, पानी डालना जैसी गतिविधियां घातक हो सकती हैं।
मरीज तनाव, अवसाद और सामाजिक अलगाव में चला जाता है
अंधविश्वासों के कारण मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ता है।
मिर्गी को लेकर क्या जागरूकता अपनानी चाहिए?
1. मिर्गी एक मेडिकल कंडीशन है—मानसिक या अलौकिक नहीं
इसके बारे में सही जानकारी स्कूल, कॉलेज, गांव और परिवारों तक पहुंचानी होगी।
2. दौरे के समय क्या करें, क्या न करें—हर नागरिक को पता होना चाहिए
सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को प्रशिक्षण और अभियान चलाने चाहिए।
3. मरीज को छिपाएं नहीं—इलाज कराएं
न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें। दवाएं नियमित लें।
4. रोजगार और विवाह में भेदभाव बंद करें
मिर्गी का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति सामान्य जीवन नहीं जी सकता।
5. महिलाओं में जागरूकता बढ़ानी होगी
भारतीय समाज में महिलाओं को बीमारी छिपानी पड़ती है, जो खतरनाक है।
6. मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म को सक्रिय भूमिका निभानी होगी
जागरूकता के लिए वास्तविक कहानियां, डॉक्यूमेंट्री और जानकारी प्रसारित की जाए।
मिर्गी इलाज योग्य है, मिथक नहीं
राष्ट्रीय मिर्गी दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक संदेश है—बीमारी से लड़ने से पहले हमें अंधविश्वासों से लड़ना है। मिर्गी न तो शर्म की बात है, न छुपाने वाली बीमारी। यह एक पूरी तरह इलाज योग्य मेडिकल कंडीशन है, जिसे समझने और स्वीकारने की जरूरत है। जब समाज समझदार बनेगा, तभी मरीज साहस के साथ जी सकेंगे। और हमारा यही लक्ष्य होना चाहिए—हर रोगी को सम्मान, सुरक्षा और सही इलाज मिले।
Author: Dilip Purohit
Group Editor





