Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 12:40 pm

Thursday, July 9, 2026, 12:40 pm

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

राइजिंग प्रोजेक्ट एडवाइजरी का पहला प्रोजेक्ट : एक रुपए में 2BHK फ्लैट!—जोधपुर का बिल्डर रच रहा रियल एस्टेट की सबसे बड़ी क्रांति

1 लाख लोगों से रोज़ ₹1… 5 साल में 200 परिवारों के सिर पर पक्की छत का सपना होगा पूरा। राइजिंग प्रोजेक्ट एडवाइजरी के चीफ दिलीप कुमार पुरोहित से 9783414079 या diliprakhai@gmail.com पर संपर्क कर तैयार करवाई जा सकती है प्रोजेक्ट रिपोर्ट

राइजिंग भास्कर. जोधपुर

राइजिंग प्रोजेक्ट एडवाइजरी के गठन के 12 घंटों में ही संस्था के चीफ दिलीप कुमार पुरोहित ने जोधपुर के एक प्रतिष्ठित बिल्डर के लिए बना दिया क्रांतिकारी प्रोजेक्ट। इस प्रोजेक्ट पर अभी अंतिम मुहर लगनी बाकी है। अगर सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो जोधपुर ही नहीं राजस्थान के प्रमुख 10 शहरों के 1 लाख लोग रोज 1 रुपया जमा करवाकर अपने सपनों का घर ले सकेंगे। राजस्थान के लाखों परिवारों के लिए यह सपना आज भी वैसा ही कठिन है जैसा दशकों पहले था। महंगे मकान, आसमान छूते होम-लोन, कड़ी बैंकिंग प्रक्रियाएं और लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ‘अपना घर’ कई परिवारों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। लेकिन अब राजस्थान के जोधपुर से एक ऐसी खबर आई है, जिसने राजस्थान के लोगों में उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है।

जोधपुर के एक प्रतिष्ठित रियल एस्टेट डेवलपर ने राइजिंग प्रोजेक्ट एडवाइजरी की एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर मंथन करने के बाद एक क्रांतिकारी घोषणा करने की ठानी है।

क्या है “1 रुपए रोज़—2 BHK फ्लैट मिशन”

यह योजना न सिर्फ राजस्थान की रियल एस्टेट इंडस्ट्री में हलचल मचा सकती है बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में भी एक ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है।

रियल एस्टेट के इतिहास में पहली बार होगा जब—

  • 1 लाख लोगों से सिर्फ ₹1 प्रतिदिन लेकर

  • हर साल 40 परिवार, और

  • 5 साल में 200 परिवार,
    30 लाख के 2 BHK फ्लैट के मालिक बनेंगे।

सबसे बड़ी बात—

विजेताओं को घर तो मिलेगा ही, पर उन्हें सिर्फ ₹5,000 प्रतिमाह EMI देनी होगी—वो भी केवल 5 वर्षों तक।

इस योजना की पूरी प्रक्रिया, मॉडल, उद्देश्य और आर्थिक गणित का खुलासा इस विस्तृत रिपोर्ट में किया गया है।

कैसे चलेगी ‘1 रुपया रोज़ – 2BHK फ्लैट मिशन’ योजना?

1 लाख लोग—1 रुपया रोज़

योजना में शामिल होने के लिए प्रत्येक सदस्य को सिर्फ ₹1 प्रतिदिन देना होगा।
1 लाख सदस्य = ₹1 × 1,00,000 × 365 दिन =

₹3.65 करोड़ प्रति वर्ष फंड

यह फंड एक केंद्रीकृत सब्सक्रिप्शन फंड में जमा होगा, जिसे—

  • बैंक

  • सुरक्षित सरकारी योजनाओं

  • या कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों
    में लगाया जाएगा ताकि पूंजी निरंतर बढ़ती रहे।

साल में 40 परिवारों को लॉटरी द्वारा 2BHK फ्लैट आवंटित

हर साल एक पारदर्शी लॉटरी निकाली जाएगी।
उसमें 40 परिवारों को 2BHK फ्लैट आवंटित किए जाएंगे।

फ्लैट की वास्तविक कीमत? ₹30 लाख

योजना के अंतर्गत बनाए जाने वाले सभी 2BHK फ्लैट लगभग 1200–1300 sq.ft. के होंगे।
डेवलपर के अनुसार, bulk construction और एक साथ 200 घरों के निर्माण से—

वास्तविक निर्माण लागत लगभग ₹12–18 लाख प्रति फ्लैट पड़ेगी।

यानि बाजार में 30 लाख के बराबर मिलने वाला घर सदस्यों के लिए सिर्फ रोज़ 1 रुपए में उपलब्ध होगा।

विजेताओं को EMI?—सिर्फ ₹5,000 प्रतिमाह, वह भी 5 साल तक

जो परिवार 2BHK फ्लैट जीतेंगे, उन्हें—

  • बैंक लोन नहीं लेना होगा

  • भारी ब्याज दर नहीं चुकानी होगी

  • लंबी EMI नहीं भरनी होगी

उन्हें सिर्फ यह करना है:
₹5,000 प्रतिमाह × 60 महीने = ₹3,00,000

यानि—

30 लाख के फ्लैट के बदले सिर्फ 3 लाख की छोटी और आसान किस्तें।

प्रतिष्ठित डेवलपर का कहना है कि EMI सिर्फ प्रतीकात्मक है।
इससे

  • सदस्यता फंड की निरंतरता बनी रहेगी

  • अगले बैचों के फ्लैट का निर्माण होता रहेगा

यह मॉडल पूरी तरह जन-आधारित वित्तीय सहभागिता पर आधारित है।

“5 साल में 200 परिवारों को अपना घर”—मॉडल का बड़ा गणित

हर साल:
40 नए विजेता × 30 लाख मूल्य के फ्लैट
5 साल:

200 परिवार = 200 घर = लगभग 60 करोड़ का आवास निर्माण

लेकिन निर्माण लागत bulk rate पर—
12 से 18 लाख / यूनिट
यानि कुल लागत:
24 से 36 करोड़

और फंडिंग कहां से आएगी?
यहीं यह मॉडल अद्भुत साबित होता है।

योजना का वित्तीय मॉडल: कैसे टिकाऊ है?

1 लाख सदस्य × 365 दिन = ₹3.65 करोड़ हर साल
EMI के रूप में:
  • दूसरे वर्ष: ₹24 लाख

  • तीसरे वर्ष: ₹48 लाख

  • चौथे वर्ष: ₹72 लाख

  • पाँचवें वर्ष: ₹96 लाख

यानी धीरे-धीरे योजना खुद को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाती जाती है।

निर्माण लागत कैसे मैनेज होगी?

पहले वर्ष कुछ शुरुआती पूंजी या बैंक सपोर्ट आवश्यक हो सकता है। लेकिन दूसरे वर्ष से EMI और निवेश आय मिलकर परियोजना को संतुलित कर देती है।

कैसे सुनिश्चित होगी पारदर्शिता और ईमानदारी?

योजना डेवलपर द्वारा नहीं, बल्कि

एक SPV (Special Purpose Vehicle) / Housing Trust

के तहत चलाई जाएगी।

जिसमें होगा—

  • चार्टर्ड अकाउंटेंट

  • तीसरी-पक्ष ऑडिटर

  • सदस्यों के प्रतिनिधि

  • कानूनी सलाहकार

  • तकनीकी टीम

हर 6 महीने में—
  • ऑडिट

  • फंड रिपोर्ट

  • निर्माण स्थिति

  • सदस्य संख्या

  • व्यय/आय रिपोर्ट

सार्वजनिक रूप से जारी की जाएगी।

क्यों जोधपुर? क्यों अभी?

जोधपुर देश का एक तेजी से विकसित होता शहर है।
यहां—

  • भूमि उपलब्ध

  • निर्माण लागत नियंत्रित

  • अवसंरचना मजबूत

  • निवेशकों का भरोसा अधिक

  • रियल एस्टेट तेजी से बढ़ रहा है

ऐसे में यह मॉडल यहां शुरू होकर

देश के 50+ शहरों में भी लागू हो सकता है।

योजना की टाइमलाइन (5 वर्षों का विस्तृत रोडमैप)

पहला 6 महीना: तैयारी
  • मोबाइल ऐप + पोर्टल लॉन्च

  • SPV/ट्रस्ट स्थापना

  • भूमि चयन

  • मार्केटिंग

  • सदस्यता अभियान

6–12 महीना: पहला लॉटरी बैच
  • पहले 40 विजेता चुने जाएंगे

  • 40 फ्लैटों का निर्माण शुरू

  • EMI सिस्टम चालू

साल 1–3: निर्माण + विस्तार
  • सालाना 40–40 नए फ्लैट

  • कुल 120 फ्लैट

  • नकदी प्रवाह मजबूत होना शुरू

साल 4–5: परिपक्वता
  • कुल 200 घर पूरे

  • EMI संग्रह peak पर

  • योजना वित्तीय रूप से पूरी तरह स्थिर

क्या-क्या सुविधाएं होंगी इन 2BHK फ्लैट्स में?

डेवलपर ने संकेत दिए हैं कि फ्लैट—

  • 2 कमरे

  • हॉल

  • 2 बाथरूम

  • मॉड्यूलर किचन

  • बालकनी

  • पार्किंग

  • लिफ्ट

  • सीसीटीवी सुरक्षा

  • 24×7 पानी

  • बिजली बैकअप

  • खेल और हरित क्षेत्र
    के साथ आधुनिक टाउनशिप में होंगे।

देशभर में हलचल: क्या यह योजना सरकारें भी अपनाएंगी?

विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल—

“जनधन मॉडल + माइक्रो फंडिंग + हाउसिंग क्रेडिट”

का नया मिश्रण है।

यह न सिर्फ शहरों बल्कि
टियर-2 और टियर-3 में भी लागू हो सकता है।

सरकारी तंत्र चाहे तो—

  • PMAY

  • Affordable Housing Mission
    के तहत इसे राष्ट्रीय मॉडल भी बना सकती है।

कौन लोग होंगे सबसे बड़े लाभार्थी?

  • नौकरीपेशा

  • छोटे व्यापारी

  • किरायेदार

  • छात्र परिवार

  • महिलाएँ

  • अकेली माताएँ

  • दिव्यांग परिवार

  • निम्न-मध्यम आय वर्ग

इन सभी के लिए—
1 रुपए रोज़ बहुत छोटी राशि है,
लेकिन इससे उनका जीवन बदल सकता है।

सामाजिक प्रभाव: 1 योजना, 200 परिवार, 5 साल—परिवर्तन की कहानी

इस योजना का प्रभाव सिर्फ “घर देने” तक सीमित नहीं है। यह—

  • सामाजिक सुरक्षा

  • आर्थिक स्वतंत्रता

  • आत्मविश्वास

  • परिवार की स्थिरता

  • बच्चों के बेहतर भविष्य
    का आधार बनेगा।

मानवता के दृष्टिकोण से देखा जाए तो—यह योजना आने वाले वर्षों में हजारों नहीं, लाखों परिवारों का जीवन बदल सकती है।

क्या यह योजना धोखा नहीं होगी?—डेवलपर ने साफ की शंका

डेवलपर ने स्पष्ट किया—
“यह योजना पूरी तरह पारदर्शी, कानूनी, ऑडिटेड और तकनीक-आधारित होगी।”
  • पैसा SPV/ट्रस्ट में जाएगा

  • ऐप पर सभी लेनदेन ट्रैक होंगे

  • लॉटरी लाइव स्ट्रीम की जाएगी

  • निर्माण प्रगति ऑनलाइन देख सकेंगे

  • EMI भी ऐप से होगी

विशेषज्ञों की राय: यह मॉडल भारत का सबसे बड़ा ‘पीपल-फंडेड हाउसिंग मिशन’ बन सकता है

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है: “देश में दर्जनों बिजनेस मॉडल आए, गए…लेकिन यह मॉडल सामान्य लोगों के लिए है। यह घर खरीदने की प्रक्रिया को लो-रिस्क, कम लागत और सामूहिक शक्ति पर आधारित करता है।”

प्रोजेक्ट का महत्व—भारत के रियल एस्टेट में एक नई क्रांति का जन्म

जोधपुर से शुरू होने जा रही यह योजना सिर्फ एक परियोजना नहीं है—यह एक सपने का हक है, जो अक्सर बैंक, महंगी EMI और औपचारिकताओं के बीच खो जाता है।

1 रुपए रोज़…
5,000 रुपए EMI…
5 साल…
200 परिवार…
और 200 पक्के आशियाने…

यह मॉडल न सिर्फ अनोखा है
बल्कि आने वाले समय में
भारत में हाउसिंग व्यवस्था के स्वरूप को बदल सकता है।

आप भी बन सकते हैं गेम चेंजर : आज ही करें नए प्राेजेक्ट के लिए संपर्क

राइजिंग प्रोजेक्ट एडवाइजर के चीफ दिलीप कुमार पुरोहित का कहना है कि सेंसेक्स-निफ्टी की 80 कंपनियों और न्यू स्टार्टअप के लिए उन्होंने रेट तय कर रखे हैं। न्यू स्टार्टअप 15 हजार और बड़ी कंपनियां 10 लाख रुपए प्रति प्रोजेक्ट देकर नया प्रोजेक्ट बनवा सकते हैं। यही नहीं आपका अगर कोई प्रोजेक्ट घाटे में जा रहा है तो उसे लाभकारी कैसे बनाया जाए उसके लिए भी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जाती है। पुरोहित का कहना है कि आने वाले समय में उनकी फर्म में और भी पेशेवर लोगों को जोड़कर वृहद स्तर पर कार्य किया जाएगा। दिलीप कुमार पुरोहित से 9783414079, diliprakhai@gmail.com या व्यक्तिश: 2 ग 27 मधुबन हाउसिंग बोर्ड जोधपुर राजस्थान में संपर्क किया जा सकता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor