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Thursday, July 9, 2026, 12:40 pm

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रेजांगला शहीदों को नमन…114 दीप प्रज्वलित किए…शहीदों के आगे झुके शीश

रेजांगला युद्ध हमारी सामरिक जीत थी : एयर मार्शल जगदीश चंद्रा

राखी पुरोहित. जोधपुर 

18 नवंबर 1962 को मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में 120 वीर अहीरों के द्वारा लड़े गए। रेजांगला युद्ध की याद में शहीद स्थल पर रेजांगला शौर्य दिवस मनाया गया तथा रेजांगला युद्ध के शहीदों की शहादत की याद में 114 दीप जलाकर पुष्पांजलि अर्पित की गई। यादव समाज के अध्यक्ष जगदीश यादव ने बताया कि यादव समाज, मेजर शैतान सिंह रेजांगला शौर्य समिति तथा सर्व समाज के लोगों ने इस शौर्य दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। एयर मार्शल जगदीश चंद्रा ने बताया कि मेजर शैतान सिंह तथा चार्ली कंपनी के 120 वीर अहीरों ने चीन को चूसुल घाटी से आगे बढ़ने से रोका। रेजांगला युद्ध हमारी सामरिक जीत थी अन्यथा हमें बहुत नुकसान होता।

ब्रिगेडियर विजयंत यादव, कर्नल प्रकाश चंद यादव ने युद्ध की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लद्दाख की विकट परिस्थितियों में भी अपने से 10 गुना चीनी सैनिकों को मार गिराना शौर्य और पराक्रम की मिशाल है। मेजर शैतान सिंह रेजांगला शौर्य समिति के अध्यक्ष एनडी वैष्णव ने कहा कि यह युद्ध सर्व समाज के बच्चों को प्रेरणा देता है तथा आने वाली पीढ़ी को जोश और जज्बे से भर देगा। यादव अहीर समाज जोधपुर के अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहां कि सामान्यत विश्वास करना आसान नहीं है लेकिन अहीरवाल के वीर अहीरों ने मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में वह करके दिखाया जो विश्व में किसी अन्य युद्ध में देखने को नहीं मिलता।

रेजांगला शौर्य दिवस के अवसर पर यादव समाज अध्यक्ष जगदीश यादव, महासचिव राजकुमार यादव, कन्वीनर कर्नल प्रकाश चंद यादव, उपाध्यक्ष मदन सिंह यादव, डॉ अजय शंकर यादव, संरक्षक नंदकिशोर यादव, डॉ रणजीत सिंह यादव, युवा अध्यक्ष चेतन यादव, युवा सचिव सूरज यादव, सत्येंद्र सिंह यादव, संगठन सचिव ललित यादव, राजेश यादव, सुरेश यादव, संतोष यादव, अमर सिंह, इंजीनियर दरिया सिंह, शेर सिंह यादव, कृष्ण कुमार , ओमप्रकाश यादव, भगवती देवी, गोपाल खातोदिया, नेत्रपाल सिंह यादव, संदीप यादव, सुनील यादव, गौरव निम्बावत, डॉ चंदन सिंह पुरोहित, विष्णु चंद प्रजापत, धर्मेंद्र यादव, नरेंद्र यादव, सुरेंद्र यादव, करण सिंह राठौड़, धर्मेंद्र कुमार, नरेंद्र सिंह राठौड़, रमेश कुमार, भोमाराम , पुरुषोत्तम डेरोलिया, ललित यादव, गजेंद्र सिंह यादव आदि सर्व समाज के सदस्यों ने सहभागिता की।

रेजांगला युद्ध 1962 : एक नजर मेंं

मारवाड़ धरा सूर्यनगरी जोधपुर के वीर सपूत मेजर शैतान सिंह 1962 भारत-चीन युद्ध में भारत के 120 सैनिकों की टुकड़ी के साथ 17000 फीट ऊंचाई पर भारत-चीन सीमा रेजांगला पर तैनात थे। 18 नवम्बर, 1962 को चीन के 5000 से अधिक सैनिकों ने अचानक रेजांग ला पोस्ट पर आक्रमण कर दिया। एक तरफ सर्दी के मौसम में बर्फबारी के कारण से आवगमन के सम्पर्क कट जाते थे उसके साथ ही सीमित मात्रा में गोला बारूद थे, इतनी दुर्गम ऊंचाई पर राहत व सैन्य सामान पहुंचाना कठिन होता था फिर भी मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में 120 अहीर सैनिकों के साथ अपने अदम्य साहस, शौर्य का परिचय देते हुए चीनी सेना से लोहा लिया तथा देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करते हुए वीर गति को प्राप्त हुए। उनके पास गोला बारूद खत्म होने के बाद प्रत्येक भारतीय सैनिक ने दो-दो चीनी सैनिकों को अपनी भुजाओं में दबोचकर मौत के घाट उतार दिया। इस युद्ध में भारतीय सेना के वीर योद्धाओं ने चीन की सेना के 1300 सैनिक को मौत के घाट उतारा। इस युद्ध में मेजर शैतान सिंह सहित 114 सैनिक वीर गति को प्राप्त हुए। बर्फबारी समाप्त होने पर 84 दिन बाद जब भारतीय सेना रेजांगला पहुंची तो सभी के शव बर्फ में दबे हुए थे। उनके हाथो में बंदूके थी या पत्थर थे सब एक्शन मोड़ में थे। भारत सरकार द्वारा मेजर शैतान सिंह को अदम्य साहस एवं शौर्य का परिचय देते हुए अपने प्राणों की आहुति देने के लिए भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सुशोभित किया गया। परमवीर चक्र के साथ ही 8 वीर चक्र तथा 4 सेना मैडल देकर सैनिको को नवाजा गया। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने ‘ए मेरे वतन के लोगो..’ देश भक्ति गीत के माध्यम इस युद्ध को आमजन तक पहुंचाया गया है। इस युद्ध पर फरहान अख्तर की फिल्म 120 बहादुर आ रही है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor