Explore

Search

Thursday, February 26, 2026, 3:27 am

Thursday, February 26, 2026, 3:27 am

LATEST NEWS
Lifestyle

राइजिंग भास्कर विशेष… USCC की 800 पन्नों की रिपोर्ट : अमेरिका का “To beat a dead horse” का प्रयास

यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट भारतीय मीडिया में छाई। 
भारत को इस रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह अमेरिका की कूटनीति का हिस्सा है और इसे पाकिस्तान को सपोर्ट और चीन के बढ़ते कदमों को हतोत्साहित करने की एक चाल माना जा सकता है। राइजिंग भास्कर ने इस रिपोर्ट के कुछ अंश पढ़े हैं, जिसमें प्रथम दृष्टया छद्म रिपोर्ट माना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब नहीं देकर भी अमेरिका को करारा जवाब दिया

डीके पुरोहित. न्यूयार्क

यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) की 800 पन्नों की रिपोर्ट की खबरें भारतीय मीडिया में छाने के बाद देश-दुनिया की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। जबकि राइजिंग भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि इस रिपोर्ट में अमेरिका ने “To beat a dead horse” का प्रयास किया है। इसे भारत को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह अमेरिका की कूटनीति का हिस्सा है और इसे पाकिस्तान को सपोर्ट और चीन के बढ़ते कदमों को हतोत्साहित करने की एक चाल माना जा सकता है। राइजिंग भास्कर ने इस रिपोर्ट के कुछ अंश पढ़े हैं, जिसमें प्रथम दृष्टया छद्म रिपोर्ट माना है।

गौरतलब है कि एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच 4 दिन की लड़ाई ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को बड़ी सैन्य कामयाबी मिली थी। इस रिपोर्ट में पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला न मानकर ‘विद्रोही हमला’ माना गया है। 800 पन्नों की इस रिपोर्ट को यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) ने जारी किया है।

क्या भारत की कूटनीतिक हार है? नहीं-भारत की जीत पर मुहर लग गई

क्या यह रिपोर्ट भारत की कूटनीतिक हार है? नहीं, यह भारत की कूटनीतिक विजय है। क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर की सच्चाई के लिए भारत ने तत्काल विश्व मंच पर अपनी आवाज उठा दी थी और 60 प्रतिशत देशों ने उसका समर्थन किया था। तब अमेरिका ने भी भारत का समर्थन किया था और इसे आतंकी हमला माना था। अब 6 महीने बाद तोड़-मरोड़कर एक ऐसी रिपोर्ट तैयार की गई है, जो “To beat a dead horse” के समान है। इसे भारत को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, क्योंकि अमेरिका समय के साथ अपना पाला बदलता रहता है।

रिपोर्ट का दावा : राफेल की  इमेज को नुकसान

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने कम से कम 6 भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराया, जिनमें राफेल जेट भी शामिल है। इससे राफेल की इमेज को नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट कहती है कि वास्तविक रूप से सिर्फ तीन भारतीय विमानों के गिराए जाने की पुष्टि होती है। जबकि इस संबंध में भारतीय सेना के शौर्य की मीडिया रिपोर्ट दुनिया भर में सामने आ चुकी है। USCC का कहना है कि चीन ने भारत-पाकिस्तान युद्ध का इस्तेमाल अपने आधुनिक हथियारों को लाइव वॉर में टेस्ट करने और दुनिया को दिखाने के लिए किया। लड़ाई के बाद दुनियाभर में चीनी दूतावासों ने अपने हथियारों की तारीफ की और कहा कि पाकिस्तान ने इनके इस्तेमाल से भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराया। भारत-पाकिस्तान संघर्ष के 5 महीने बाद चीन ने इंडोनेशिया को 75 हजार करोड़ रुपए में 42 J-10C फाइटर जे बेचने की डील की थी।

रिपोर्ट भारत को हतोत्साहित करने और चीन को बदनाम करने की साजिश 

अमेरिकी सरकार में भारत को सपोर्ट करने वाले नेताओं के एक वर्ग का मानना है कि भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ है। यह जाहिर हो चुका है कि पाकिस्तान आतंक का समर्थन करने वाला देश है और पूरी दुनिया में उसका चेहरा बेनकाब हो चुका है। जहां तक पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने कम से कम 6 भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराया, जिनमें राफेल जेट भी शामिल है। भारतीय मीडिया रिपोर्ट और सेना के सूत्र इसे झूठ का पुलींदा बता रहे हैं। इस रिपोर्ट को एक तरफा और पाकिस्तान समर्थन में, भारत को हतोत्साहित करने वाली और चीन-अमेरिका में बढ़ती हथियारों की प्रतिस्पर्धा के बीच चीन को बदनाम करने का एक दुष्चक्र भी बताया जा सकता है।

दावा : पाकिस्तान को चीन से खुफिया इंटेलिजेंस मिले

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने इस लड़ाई में चीन से मिले हथियारों का इस्तेमाल किया और अपने सैन्य फायदे को दुनिया के सामने रखा। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने चीन ने HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 मिसाइलें और J-10 फाइटर जेट का इस्तेमाल किया। भारत का दावा है कि पाकिस्तान को इस दौरान चीन से खुफिया जानकारी (इंटेलिजेंस) भी मिली। हालांकि पाकिस्तान ने इसे नकार दिया और चीन ने इस पर कुछ भी साफ नहीं कहा। रिपोर्ट के मुताबिक 2019-2023 के बीच पाकिस्तान के 82 प्रतिशत हथियार चीन से आए हैं।

चीनी मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया : रिपोर्ट पर उठाए सवाल

चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने USCC की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। अखबार लिखता है कि USCC ने एक बार फिर से चीन की आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्र में हो रही तरक्की को ऐसे दिखाया गया है कि जैसे वह दुनिया के लिए खतरा हो। यह रिपोर्ट राजनीतिक मकसद से लिखी गई है और हकीकत का पूरी निष्पक्षता से विश्लेषण नहीं करती। आयोग के भीतर चीन को लेकर गहरी गलतफहमियां है । अखबार लिखता है कि अमेरिका को चीन को और बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है। चीन की हथियार इंडस्ट्री के विकास को लेकर आरोप लगाना या इसे गलत तरीके से पेश करना, किसी भी संप्रभु देश के अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के मूल अधिकार को नकारने जैसा है। अमेरिका सप्लाई चेन को हथियार जेसे इस्तेमाल करता है। ग्लाेबल टाइम्स ने आगे लिखा है कि सप्लाई चेन को हथियर की तरह इस्तेमाल करने का काम चीन का नहीं बल्कि अमेरिका का है। अमेरिका ने चिप टेक्नोलॉजी पर रोक, मिलिट्री इक्विवपमेंट पर बैन, कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करना और अपने सहयोगी देशों पर दबाव डालकर चीन के खिलाफ मोर्चा खड़ा करने की कोशिश की है। इसके मुकाबले चीन का रिएक्शन सिर्फ अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में है न कि दुनिया को नुकसान पहुंचाने के लिए। चीन की दुर्लभ खनिज नीति सप्लाई चेन काे स्थिर रखने के लिए बनाई गई है न कि निर्यात रोकने के लिए।

झूठ के पैर नहीं होते : भारत की खामोशी में छिपा है करारा जवाब :

अभी भारतीय मीडिया में यह रिपोर्ट प्रकाशित होने के साथ ही राजनेताओं की गहरी प्रतिक्रियाएं आने लगी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारतीय कूटनीति पर सवाल उठाए हैं। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी में गहरा और करारा जवाब छिपा है। वे बिना कोई टिप्पणी किए अमेरिका का जवाब दे चुके हैं। झूठ का जवाब झूठ को देना पड़ता है। जहां सच्चाई है उसे जवाब देने की जरूरत नहीं पड़ती। यही नीति भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है। उन्होंने बिना कोई टिप्पणी किए दुनिया को जाहिर कर दिया कि इस रिपोर्ट में दम नहीं है और भारत ऐसी रिपोर्ट की परवाह नहीं करता।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor