गीता परिचय अभियान का उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महाभारत के युद्धभूमि में दिए गए दिव्य उपदेश—श्रीमद्भगवद्गीता को सरल, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी रूप में आम जन तक पहुंचाना है : सुधा गर्ग
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर
गीता परिचय अभियान के तहत जीवन में ज्ञान, शांति और सकारात्मक बदलाव की पहल जोधपुर में शुरू की गई है। जोधपुर में भारत समन्वय धाम में ऑफलाइन कोर्स संचालित किया जा रहा है और अब प्रथम पुलिया स्थित श्री अग्रसेन संस्थान में भी ऑफलाइन कोर्स संचालित किया जाएगा। गीता परिचय अभियान के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों कोर्स संचालित होते हैं। जोधपुर संचालिका सुधा गर्ग ने बताया कि हम भीतर की शांति, आत्मबल और सही दृष्टिकोण पैदा करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इन्हीं प्रयासों में से एक है—“गीता परिचय अभियान”, जिसका उद्देश्य है कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महाभारत के युद्धभूमि में दिए गए दिव्य उपदेश—श्रीमद्भगवद्गीता—को सरल, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी रूप में आम जन तक पहुंचाया जाए।
गीता क्यों पढ़ें?
सुधा गर्ग ने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। यह व्यक्ति को बताती है कि कठिन परिस्थितियों में निर्णय कैसे लिया जाए, कर्तव्य का पालन कैसे किया जाए, मन को स्थिर कैसे रखा जाए और जीवन के लक्ष्य को स्पष्ट कैसे किया जाए।
गीता के अनुसार—
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जीवन संघर्ष है, लेकिन भय का कारण नहीं
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कर्तव्य सर्वोच्च धर्म है
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सही ज्ञान से ही सही निर्णय जन्म लेते हैं
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मन की स्थिरता जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है
सुधा गर्ग ने कहा कि आधुनिक समय में अवसाद, तनाव, क्रोध, द्वेष और सामाजिक असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे समय में गीता न केवल आध्यात्मिक समाधान देती है बल्कि मनोवैज्ञानिक संतुलन भी प्रदान करती है। यह बताती है कि जीवन का सार कर्म, धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण में छिपा है।
जीवन प्रबंधन और आत्मविकास का प्रयास
सुधा गर्ग ने कहा कि यह किसी विशेष पंथ, संप्रदाय या धार्मिक विचारधारा का प्रचार नहीं, बल्कि “जीवन प्रबंधन और आत्मविकास” का प्रयास है। गीता का अध्ययन किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए उपयोगी बताया गया है। गीता—
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जीवन जीने की कला है
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तनाव प्रबंधन का मार्ग है
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विवेक, निर्णय क्षमता और चरित्र निर्माण का आधार है
सुधा गर्ग ने कहा कि गीता पढ़ने के बाद व्यक्ति के विचार, व्यवहार और संबंधों में सकारात्मक परिवर्तन आता है और समाज अधिक शांतिपूर्ण तथा संतुलित बन सकता है।
अभियान की शुरुआत और विस्तार
सुधा गर्ग ने बताया कि यह अभियान वर्ष 2008 में प्रारंभ हुआ और वर्ष 2020-21 में इसे “एक वर्षीय गीता कोर्स” के रूप में संरचित किया गया। वर्ष 2024 तक देशभर में 90 से अधिक गीता क्लास के अलावा 32 क्लास ऑफलाइन मोड (जयपुर, लखनऊ अलवर, जोधपुर) में है। गीता कोर्स के अलावा श्रीमद्भागवत का दो वर्षीय कोर्स भी शुरू किया गया है। गीता परिचय अभियान द्वारा दो या तीन दिवसीय गीता सेमिनार करवाई जाती है। देश के प्रमुख शहरों में अब तक लगभग 100 सेमिनार हो चुकी है।
जोधपुर में भारत समन्वय धाम में गीता कक्षाएं चल रही हैं और जल्द ही प्रथम पुलिया स्थित श्री अग्रसेन संस्थान में क्लास शुरू की जाएगी।
अभियान की प्रमुख गतिविधियां
1. एक वर्षीय गीता कोर्स
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यह कोर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध है।
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पंजीकरण शुल्क ₹550/- रखा गया है, जिसमें कोर्स बुक का मूल्य भी शामिल है।
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कोर्स पूरा करने पर परीक्षा ली जाती है।
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परीक्षा उत्तीर्ण करने पर प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है।
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सहायक सामग्री वापस करने पर ₹500/- तक की राशि लौटा दी जाती है, ताकि आर्थिक बाधा किसी के लिए अवरोध न बने।
2. श्रीमद्भगवद्गीता कोर्स दो वर्षीय
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श्री चैतन्य महाप्रभु के अनुसार श्रीमद्भागवत महापुराण वस्तुत गीता की विस्तृत व्याख्या ही है। भागवत कोर्स को अटेंड करने के लिए साधक द्वारा एक वर्षीय गीता कोर्स उत्तीर्ण करना अथवा गीता की कोई सेमिनार अटेंड करना आवश्यक है।
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पंजीकरण शुल्क ₹550/- निर्धारित है जो नॉन रिफंडेबल है। साधक को भागवत की कोर्स बुक 440 रुपए डाक खर्च सहित भेजी जाती है।
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पाठ्यक्रम में असाइनमेंट और बारह स्कंध की परीक्षाएं होती है। कोर्स के अंत में ई-सर्टिफिकेट भी दिया जाता है।
3. गीता सेमिनार
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देश के विभिन्न शहरों में बड़े स्तर पर सेमिनार आयोजित किए जाते हैं।
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होटल, विद्यालय, कॉलेज, संस्थान और सभागारों में इन कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
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सेमिनारों का उद्देश्य जन-जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को गीता से जोड़ना है।
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कई कार्यक्रम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किए जाते हैं।
समाज पर संभावित प्रभाव
सुधा गर्ग ने कहा कि यदि गीता को जीवन में अपनाया जाए तो—
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पारिवारिक तनाव कम हो सकता है
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रिश्तों में सौहार्द बढ़ सकता है
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निर्णय क्षमता मजबूत हो सकती है
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युवाओं में नैतिक और मानसिक शक्ति का विकास हो सकता है
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समाज में शांति और सकारात्मकता फैल सकती है
सुधा गर्ग ने कहा कि गीता केवल आध्यात्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों का व्यवहारिक समाधान है—चाहे वह कॅरियर हो, शिक्षा हो, परिवार हो या व्यक्तिगत संघर्ष।
अभियान से जुड़ने का तरीका
इच्छुक व्यक्ति—
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मोबाइल ऐप और QR कोड के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं
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गीता कक्षाओं में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं
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अभियान के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म—YouTube और Facebook—के माध्यम से संबद्ध हो सकते हैं
अधिक जानकारी के लिए बीएम अग्रवाल से 9414001889, महावीर बंसल से 77268551990, संतोष गुप्ता से 9414321681, सुधीर यादव से 9928015089 और जोधपुर मे नारायण सिंह चारण से 9828213469, रघुनाथ सिंह सांखला से 9414131778, सूर्यप्रकाश शर्मा से 8619718304 और सुधा गर्ग से 8619913343 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।





