जस्टिस इन्द्रजीत सिंह तथा जस्टिस प्रवीर भटनागर ने संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, मुख्य सचिव उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, निदेशक सेकंडरी शिक्षा तथा निदेशक प्राथमिक शिक्षा को नोटिस जारी किया है। अधिवक्ता ने वीडियो जारी कर बताया कि सरकार और अन्य पक्षकारों को चार सप्ताह में जवाब पेश करना है।
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
द्रोणा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य संकट को लेकर काउंसलर नियुक्ति को अनिवार्य करने की मांग काे लेकर जारी जनहित याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
जस्टिस इन्द्रजीत सिंह तथा जस्टिस प्रवीर भटनागर ने संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, मुख्य सचिव उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, निदेशक सेकंडरी शिक्षा तथा निदेशक प्राथमिक शिक्षा को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए एडवोकेट मोहित सिंह चौधरी ने विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। अधिवक्ता ने इस संबंध में वीडियो जारी कर बताया कि मान्य उच्च न्यायालय ने विभिन्न पक्षकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
क्याें महत्वपूर्ण है यह याचिका?
शैक्षणिक दबाव, सामाजिक परिवर्तन और स्कूलों में उपलब्ध सहयोगी प्रणालियों की कमी के कारण यह संकट और गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में यह याचिका खासी महत्वपूर्ण है। स्कूलों में प्रशिक्षित काउंसलरों की अनुपस्थिति विद्यार्थियों के समग्र विकास में एक गंभीर बाधा है और यह उनके सुरक्षित, सहयोगी और संवेदनशील शैक्षिक वातावरण के अधिकार का उल्लंघन है। द्रोणा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के सचिव उमेद सिंह इंदा बताया कि राजस्थान के बच्चों के लिए यह ऐतिहासिक दिन है। मानसिक स्वास्थ्य समर्थन को लेकर हमारी वर्षों की पहल को आज न्यायालय की मान्यता मिली है। इस मुद्दे को लेकर संस्थान ने सभी जिला कलेक्टरों, विधायकों एवं सांसदों को ज्ञापन दिए तथा इसी सन्दर्भ में पंद्रह सौ से अधिक पोस्टकार्ड भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भेजे गए।
राइजिंग भास्कर विचार : पिछले दिनों एक निजी स्कूल में बच्ची के बिल्डिंग से कूदने से हुई मौत के बाद काउंसलर की नियुक्ति निजी-सरकारी दोनों स्कूलों के लिए अनिवार्य होनी चाहिए
पिछले दिनों एक जानी-मानी निजी स्कूल में एक बच्ची द्वारा स्कूल बिल्डिंग से कूद कर आत्महत्या करना और यह खबरें सामने आने के बाद कि स्कूल टीचर्स और स्कूल प्रशासन ने बच्ची की परेशानी को अनसुना किया। ऐसे में स्कूलों में काउंसलर की भूमिका बढ़ जाती है और यह मांग वाजिब भी है। आज सरकारी और निजी स्कूलों में काउंसलर अत्यंत आवश्यक है।
जरा टीचर का अभिभावकों को बेशर्मी भरा जवाब सुनिए : फर्स्ट पीरियड में टॉयलेट की स्वीकृति नहीं दी जा सकती, मेडिकल रिपोर्ट लाओ, नहीं तो प्रिंसिपल से मिलो
गौरतलब है कि यह वाकया 27 नवंबर 2025 का है। पीएमश्री स्कूल एयरफोर्स (केंद्रीय विद्यालय एयरफोर्स नंबर वन) की एक टीचर का एक बच्चे के अभिभावक के पास फोन आता है कि आपका बच्चा फर्स्ट पीरियड में टॉयलेट की परमिशन मांगता है। यह रोज की बात हो गई है। अभिभावक ने कहा कि मेम वह पानी ज्यादा पीता है और डॉक्टर भी पानी ज्यादा पीने की सलाह देते हैं। दूसरा सर्दी का मौसम है, क्या हुआ जो फर्स्ट पीरियड में टॉयलेट की परमिशन मांग ली। टीचर बहस करती है और अभिभावक को कहती है कि आकर प्रिंसिपल से मिलाे, हमारे यहां फर्स्ट पीरियड में टॉयलेट की स्वीकृति देने का नियम नहीं है। अभिभावक ने गुस्से में कहा- भारत के कौनसे कानून के तहत लिखा है कि फर्स्ट पीरियड में टॉयलेट करना मना है।…जब स्कूलों में ऐसे मनमाने नियम हो जाए और टीचर्स बहस और मनमाने नियमों पर उतर आए तक द्रोणा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से जारी यह पीआईएल खासी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अगर निजी और सरकारी स्कूलों में काउंसलर की नियुक्ति होती है तो कई फायदे होंगे
स्कूलों में काउंसलर की नियुक्ति का मामला काफी गंभीर है। अगर मान्य उच्च न्यायालय के आदेश से सरकारी और निजी स्कूलों में काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य की जाती है तो बच्चों और उनके अभिभावकों को काफी राहत मिलेगी। स्कूलों में व्यापक सुधार का मार्ग भी प्रशस्त करेगा, ताकि हर बच्चे को आवश्यक मार्गदर्शन और मानसिक सहयोग मिल सके। हाईकोर्ट पहल करता है तो राजस्थान के स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। सरकार द्वारा की जाने वाली आगामी जांच और मूल्यांकन से नीतिगत बदलावों एवं बजट प्रावधानों का रास्ता खुलेगा, जिसके आधार पर स्कूलों में प्रभावी काउंसलिंग सिस्टम विकसित किया जा सकेगा। द्रोण एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी, जिसकी स्थापना 2019 में जोधपुर में हुई थी, समावेशी शिक्षा और बाल मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रही है। संस्था विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, अभिभावकों और स्कूलों के साथ मिलकर मानसिक रूप से सुरक्षित और सहयोगी वातावरण बनाने में योगदान देती है। संस्था ने आश्वासन दिया है कि वह राजस्थान सरकार तथा अन्य हितधारकों के साथ मिलकर न्यायालय के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं राज्यभर में बच्चों के लिए दीर्घकालिक सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी।




