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Saturday, January 24, 2026, 2:14 am

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₹1 में सर्वजातीय 25 जोड़ों की शादी : हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट का बड़ा हृदय, 1 लाख का बीमा भी मिलेगा

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए उम्मीद की किरण, तैयारियां जोधपुर में तेज

राखी पुरोहित. राइजिंग भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट 

8302316074 rakhipurohit066@gmail.com

समाज में शादी आज भी सिर्फ दो लोगों का नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन मानी जाती है। परंतु यह मिलन कई बार सामर्थ्य, खर्च या परंपरागत रस्मों में फंसकर वर्षों टल जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अक्सर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। ऐसे ही परिवारों के लिए हेल्पिंग पीपल ट्रस्ट ने ऐसी पहल की है, जिसने न केवल जोधपुर में बल्कि आस-पास के जिलों में भी चर्चा पैदा कर दी है। ट्रस्ट 10 दिसंबर को सर्वजातीय सामूहिक विवाह समारोह आयोजित कर रहा है जिसमें लगभग 25 जोड़ों का विवाह सिर्फ एक रुपये में कराया जाएगा।

हाँ — सिर्फ 1 रुपया!
यह रकम फीस नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक भागीदारी है ताकि यह विवाह दान आधारित न लगे, बल्कि सम्मान आधारित सामाजिक आयोजन बन सके। शादी के साथ जोड़ों को एक लाख रुपये तक का बीमा कवर भी मिलेगा, ताकि किसी आपात स्थिति में परिवार सुरक्षित रहे।

शादी होगी विधि–विधान से, सभी व्यवस्थाएं ट्रस्ट की ओर से

शिव शक्ति नाम से यह परिणय महोत्सव गोकुलजी की प्याऊ स्थित आर्य समाज भवन में संपन्न होगा। विधि–विधान पूर्ण रूप से वैदिक नियमों के तहत। पंडित, मंडप, हवन, कन्यादान, सप्तपदी—सब कुछ वही, जैसा सामान्य शादी में होता है।

इस आयोजन में ट्रस्ट दूल्हा–दुल्हन को:

विवाह वस्त्र
मंगलसूत्र
घरेलू वस्तुएँ
भोजन–व्यवस्था
पंडित व संपूर्ण रस्में

— सब कुछ उपलब्ध कराएगा।
यानी दूल्हा-दुल्हन बिना आर्थिक तनाव, बिना उधार या कर्ज के अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत कर सकेंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?

एक शादी का खर्च गरीब परिवार को सालों पीछे धकेल देता है…भारत में औसत शादी का खर्च 50,000 से लेकर लाखों तक पहुंच जाता है। मध्यम व निम्न आय वर्ग के लिए यह खर्च अक्सर उधार, कर्ज, ज़मीन बेचने या गहने गिरवी रखने जैसी स्थितियाँ भी पैदा कर देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार—

“गरीबी का सबसे बड़ा बोझ विवाह खर्च ही है।”

ऐसे में सामूहिक विवाह न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कदम भी।

सर्वजातीय आयोजन — धर्म नहीं, मानवीयता केंद्र में

यह कार्यक्रम किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं। सभी समाज के जोड़े आवेदन कर सकते हैं। ट्रस्ट के सदस्यों का कहना है:

“हम विवाह को संस्कार मानते हैं, सौदेबाजी नहीं। यह आयोजन किसी धर्म या जाति का नहीं, इंसानियत का उत्सव है।” एक–दूसरे के लिए बनी जोड़ियाँ चाहे विभिन्न समुदायों से हों—यहां सभी का स्वागत है। समाज में ऐसा चित्र कम ही देखने को मिलता है जहाँ दीवारें गिरती हों, हाथ मिलते हों, और संस्कार जाति से ऊपर उठकर मानवता से जुड़ें।

बीमा योजना — यह आयोजन सिर्फ शादी नहीं सुरक्षा भी देता है

प्रत्येक जोड़े को ₹1 लाख तक का बीमा कवर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य विवाह के शुरुआती समय में आर्थिक सुरक्षा देना है। यदि किसी कारणवश कोई संकट या दुर्घटना घटे तो परिवार को तुरंत आर्थिक सहयोग मिल सके।

यह मॉडल देशभर के सामूहिक विवाह आयोजनों में नया ट्रेंड सेट कर सकता है।

शादी + बीमा = सुरक्षित शुरुआत

शादी के साथ बीमा की सोच बताती है कि ट्रस्ट सिर्फ विवाह करवा देने भर तक सीमित नहीं—वह जीवनभर सुरक्षा का आधार देना चाहता है।

6 वर्षों से लगातार सेवा कार्य 

ट्रस्ट ने पिछले छह वर्षों में कई सेवा कार्य कर चुका है। अहमदाबाद, चेन्नई, इंदौर, जयपुर, दिल्ली, पाली क्षेत्रों में पिछले वर्ग, जरूरतमंद परिवारों और असहाय लोगों की सहायतार्थ कार्य करवा रहा है। शिक्षा सामग्री, स्कूल बैग, पुस्तकें, गरीब महिलाओं को सिलाई मशीन आदि उपलब्ध करवा रहा है।

एक महिला प्रतिभागी के शब्दों में—

“शादी की चिंता हमारे सिर से हट गई। लग रहा है भगवान ने किसी इंसान के रूप में हमारी मदद भेज दी।”

जोधपुर में तैयारियां जोरों पर—स्वयंसेवकों का नेटवर्क सक्रिय

पोस्टर जारी होते ही ट्रस्ट से जुड़े स्वयंसेवक विभिन्न गाँवों व बस्तियों तक पहुंच रहे हैं। सूची तैयार की जा रही है, जोड़े चिन्हित किए जा चुके हैं।

स्वयंसेवक—

• पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करवा चुके हैं।
• लड़का–लड़की के परिवार से बात की जा रही है।
• शादी की तारीख, स्थल, पोशाक वितरण आदि की सूची तय हो चुकी है।

कई सामाजिक संस्थाएं, व्यापारिक मंडल और दानकर्त्ता भी इसमें हाथ बढ़ाने लगे हैं। आयोजन समिति में मंडोर मंडल अध्यक्ष नीलू-मनोहर सिंह टाक सहित आर्य समाज के लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शनिवार को समारोह के पोस्टर का विमोचन किया गया। समाजसेवी तेज कंवर सांखला, रेखा चौधरी, सीमा सांखला, गीता लाडवानी, बद्रीनारायण हर्ष, मोहिनी सांखला, सरिता चौधरी, नीलम जैन, मंजू गहलोत, चंद्रसिंह टाक, बलवीर टाक, वीरेंद्र जांगिड़, शिवराम आर्य, कैलाश परिहार, प्रवीण भाटी, मनोज रंगवानी सहित युवा शामिल हुए।

समारोह के दिन कैसा होगा दृश्य?

मंडप सजेगा, पंडित मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ शुरू करेंगे।
हर जोड़ा पवित्र अग्नि के सात फेरे लेगा।
अंत में सभी नव–विवाहित दंपत्तियों को उपहार, बीमा प्रमाणपत्र व शुभकामनाएँ प्रदान की जाएंगी।

यह दृश्य न केवल भावुक करेगा बल्कि समाज को यह एहसास कराएगा—

“शादी खर्च से नहीं संस्कार से होती है।”

समाज में बड़ा संदेश — दहेज पर प्रहार, समानता की जीत

इस तरह के आयोजन दहेज के खिलाफ मजबूत संदेश देते हैं।शादी अगर संस्कार है, तो लेनदेन इसकी शर्त कैसे हो सकता है?

ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम पोहानी ने कहा कि —

“हम चाहते हैं कि शादी से पहले खर्च नहीं—प्रेम और जिम्मेदारी पर चर्चा हो। सामूहिक विवाह सामाजिक समानता का वह अध्याय है, जो सबसे कम बोला जाता है लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावी है। जब 25 जोड़े साथ फेरे लेते हैं, तब यह संदेश दिखाई देता है कि शादी व्यक्तिगत नहीं सामूहिक संवेदना है।”

राइजिंग भास्कर का विश्लेषण

क्यों बढ़ना चाहिए ऐसे आयोजनों का विस्तार?
  1. गरीब परिवारों को कर्ज में नहीं धकेलता
  2. दहेज प्रथा कम हो सकती है
  3. सामाजिक एकता व सामूहिकता बढ़ती है
  4. अनाथ व बेसहारा युवाओं को नया जीवन मिलता है
  5. शादी → सुरक्षा बीमा मॉडल देशभर में लागू किया जा सकता है

यदि हर शहर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित हों तो हजारों परिवार सालभर में राहत महसूस कर सकते हैं।

भविष्य की दिशा — क्या सरकार भी जोड़ सकती है कदम?

राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों में सरकारी सामूहिक विवाह योजनाएं चलती हैं, परन्तु निजी संस्थाएँ यदि बीमा जैसे नवीन मॉडल जोड़ दें तो यह और मजबूत हो सकता है। सरकार चाहे तो—

• वित्तीय अनुदान दे
• ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन व ऑडिट सुनिश्चित करे
• योग्य जोड़ियों की पहचान में मदद करे

तो भविष्य में यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन बन सकता है।

अंत में — यह सिर्फ शादी नहीं, सामाजिक बदलाव की शुरुआत है

25 जोड़े—
25 परिवार—
25 नई शुरुआत—

और सबसे बड़ी बात—
सिर्फ एक रुपया और आजीवन सुरक्षा।

आर्थिक रूप से कमजोर मां–बाप जिनकी आँखों में बेटी की विदाई का सपना था, अब वह सपना यथार्थ बनने वाला है।
कई युवाओं का जीवन जो सामाजिक बोझ के कारण अटका था, अब आगे बढ़ेगा।
यह आयोजन सिर्फ खबर नहीं, समाज की संवेदना और बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor