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Thursday, February 19, 2026, 11:06 am

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दुनिया अच्छी है या बुरी (व्यंग्यात्मक कविता) : हरसहाय हर्ष

कवि : हरसहाय हर्ष 

दुनिया अच्छी है या बुरी

छल है, कपट है, नफरत है और बहुत चालाकी है।
उठापटक है, खींचतान है, बता और क्या बाकी है।
सब है दुनिया में बस प्यार नहीं है,
दुनिया अच्छी है या बुरी है मुझे नहीं पता..
हां इतना पता है कि मेरे अनुसार नहीं है।।

सलाह है, मशवरा है, हां है, ना है और खोखली बाते हैं।
नफा है, नुकसान है और मतलब की मुलाकाते हैं।
“चिंता मत कर मैं हूं ना” ये कहने वाला यार नहीं है।
दुनिया अच्छी है या बुरी है, मुझे नहीं पता..
हां इतना पता है कि मेरे अनुसार नहीं है।।

चुगली है, चर्चा है, आरोप है और प्रत्यारोप है।
तारीफ है, प्रशंसा है, झूठ है और सच्चाई का लोप है।
सबकुछ बोलो बस, सच बोलने का अधिकार नहीं है।
दुनिया अच्छी है या बुरी, मुझे नहीं पता..
हां इतना पता है कि मेरे अनुसार नहीं है।।

दौलत है, शोहरत है, मान है और सम्मान है।
इंसान की यहां खूब बड़ी बड़ी पहचान है।
वो चाहे तो सब छोड़ दे, बस छूटता अंहकार नहीं है।
दुनिया अच्छी है या बुरी, मुझे नहीं पता..
बस इतना पता है कि मेरे अनुसार नहीं है।।

रचनाकार : हरसहाय ‘हर्ष’।
जोधपुर।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor