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Sunday, August 23, 2026, 7:46 am

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Lifestyle

प्रत्याहार और धारणा पर चर्चा

लेखक : शिव सिंह

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प्रत्याहार। ​शरीर की वह अवस्था, जब पांचों इन्द्रियां शान्त हो अपने बाह्य विषयों से मुक्त होकर अन्तर्मुखी हो जाती है, प्रत्याहार कहलाती है। इस अवस्था में मन की स्वच्छन्दता समाप्त हो जाती है। चित्त शान्त रहने लगता है। साधक को अपनी आत्मिक शक्तियों का आभास होने लगता है।
​शब्द आया, चला गया, उसके अर्थ पर ध्यान न देना। देखा, अनदेखा कर देना उस पर चिन्तन नहीं करना। जिस प्रकार पानी बर्फ बनने के पश्चात् ही छलनी में टिक सकता है, ठीक उसी प्रकार प्रत्याहार में पाँचों इन्द्रियों के विषयों से ध्यान हटा लिया जाता है। प्रत्याहार को जैनागमों में प्रतिसंलीनता कहते हैं।

​धारणा

​शान्त चित्त को शरीर के किसी स्थान पर एकाग्र करने को धारणा कहते हैं। धारणा ध्यान की प्रारम्भिक अवस्था होती है।
क्रमशः

आप स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें आयुर्वेद अपनाये

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor