Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 5:07 am

Thursday, July 9, 2026, 5:07 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

जोधपुर में ट्रैफिक, ईंधन खर्च और प्रदूषण से राहत की नई राह गढ़ रहा “कारपूल”…बढ़ते-फलते जोधपुर में कारपूल ही बड़ा और सशक्त विकल्प

जोधपुर में आठ से दस प्रतिशत ट्रैफिक का दबाव कम करने में कारपूल संस्कृति का योगदान माना जा सकता है…अगर इसे बढ़ावा मिले तो भविष्य में उत्साहजनक परिणाम सामने आ सकते हैं…आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मोर्चे के साथ ट्रैफिक कंट्रोल में मिलेगा फायदा

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprkahai@gmail.com 

नीले रंग, ऐतिहासिक किलों और तेज़ी से बढ़ते शहरी विस्तार के लिए पहचाना जाने वाला जोधपुर अब एक और कारण से चर्चा में है—कारपूल। बदलती जीवनशैली, बढ़ते पेट्रोल-डीज़ल के दाम, ट्रैफिक की समस्या और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता ने शहरवासियों को एक नई दिशा दी है। अब जोधपुर में अकेले कार चलाने की जगह मिल-जुलकर यात्रा करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

सुबह सड़कों पर दिखने लगा बदलाव

सुबह 8 से 10 बजे। बनाड़ रोड से सरदारपुरा की ओर जाने वाली सड़क पर पहले जहां कारों की लंबी कतारें दिखती थीं, अब वहां कई कारों में दो से चार लोग एक साथ सफर करते नजर आते हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि धीरे-धीरे लोगों की सोच में परिवर्तन के साथ उभरा है। यही हाल शहर की अन्य सड़कों का है। झालामंड स्थित न्यू हाईकोर्ट की तरफ कारपूल की संस्कृति बढ़ी है।

पाल रोड निवासी अमित जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, बताते हैं, “पहले मैं रोज़ अकेले कार से ऑफिस जाता था। पेट्रोल खर्च भी ज्यादा था और पार्किंग की भी समस्या रहती थी। अब मेरे साथ कॉलोनी के दो साथी भी कारपूल करते हैं। खर्च आधा हो गया और सफर भी आसान लगने लगा।”

ऑफिस जाने वालों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय

जोधपुर में कारपूल का सबसे अधिक प्रचलन ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों के बीच देखने को मिल रहा है। खासकर कंपनियों, बैंक, निजी अस्पताल, शिक्षण संस्थान और औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग इस व्यवस्था को अपना रहे हैं।

बासनी औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले चंपालाल कहते हैं, “हम चार मित्र एक ही समय पर काम पर जाते हैं। पहले अलग-अलग स्कूटी से जाते थे, अब एक कार में जाते हैं। सुरक्षित भी लगता है और समय की बचत भी होती है।”

महिलाओं के लिए सुरक्षा और सुविधा

कारपूल का एक बड़ा फायदा महिलाओं के लिए सुरक्षा और सुविधा के रूप में सामने आया है। देर शाम या सुबह-सुबह यात्रा करने वाली महिलाएं अब भरोसेमंद सहकर्मियों या परिचितों के साथ सफर करना ज्यादा सुरक्षित मान रही हैं।

शास्त्री नगर निवासी पूजा बताती हैं, “अकेले स्कूटी से लौटते समय डर लगता था। अब ऑफिस की ही दो महिलाएं और एक सीनियर सर कार में साथ होते हैं। मन भी निश्चिंत रहता है।”

कॉलेज और कोचिंग स्टूडेंट्स में भी बढ़ा चलन

जोधपुर शिक्षा का भी बड़ा केंद्र है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग के लिए दूर-दराज से छात्र आते हैं। इन छात्रों में भी कारपूल लोकप्रिय हो रहा है।

प्रताप नगर में रहने वाले मेडिकल छात्र रोहित कहते हैं, “हम पांच दोस्त हॉस्टल से कॉलेज जाते हैं। एक दोस्त की कार है। हम सब मिलकर पेट्रोल का खर्च बांट लेते हैं। इससे हर महीने अच्छी बचत हो जाती है।”

पेट्रोल के बढ़ते दाम बने बड़ा कारण

विशेषज्ञ मानते हैं कि कारपूल के बढ़ते चलन के पीछे ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी एक बड़ा कारण है। आम आदमी के बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

रेलवे कर्मचारी महेंद्र बताते हैं, “पहले महीने में चार से पांच हजार रुपये पेट्रोल में खर्च हो जाते थे। कारपूल शुरू करने के बाद यह खर्च लगभग आधा रह गया है।”

पर्यावरण को लेकर बढ़ी जागरूकता

जोधपुर जैसे शहर में प्रदूषण धीरे-धीरे चिंता का विषय बनता जा रहा है। लोग अब यह समझने लगे हैं कि ज्यादा वाहन मतलब ज्यादा धुआं और ज्यादा बीमारियां।

पर्यावरण कार्यकर्ता कल्पना कहती हैं, “अगर एक कार में चार लोग बैठकर सफर करें, तो तीन कारें सड़क से कम हो जाती हैं। इससे प्रदूषण घटेगा और शहर की हवा बेहतर होगी। कारपूल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक छोटा लेकिन प्रभावी कदम है।”

सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप की भूमिका

कारपूल को बढ़ावा देने में सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स की भी अहम भूमिका है। कई कॉलोनियों, ऑफिसों और संस्थानों में कारपूल के लिए अलग-अलग ग्रुप बनाए गए हैं, जहां लोग अपनी टाइमिंग और रूट साझा करते हैं।

चोपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी संदीप बताते हैं, “हमारी कॉलोनी का एक व्हाट्सएप ग्रुप है। जो भी ऑफिस जाता है, वह उसमें मैसेज डाल देता है। जरूरतमंद लोग संपर्क कर लेते हैं।”

ट्रैफिक जाम से राहत की महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है कारपूल

जोधपुर में सोजती गेट, नई सड़क, जालोरी गेट, पावटा, सर्किट हाउस रोड, एम्स रोड, बनाड़ रोड और प्रतापनगर जैसे इलाकों में ट्रैफिक जाम आम समस्या रही है। कारपूल से वाहनों की संख्या कम होने पर ट्रैफिक में भी कुछ हद तक सुधार हो सकता है।ट्रैफिक पुलिस से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि “अगर कारपूल को और बढ़ावा मिले, तो शहर की सड़कों पर ट्रैफिक दबाव काफी कम हो सकता है। यह प्रशासन और जनता दोनों के लिए फायदेमंद है।”

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि कारपूल के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। समय की पाबंदी, भरोसे का सवाल और आपसी तालमेल की कमी कई बार परेशानी बन जाती है। सरदारपुरा निवासी नितिन कहते हैं, “अगर किसी एक की टाइमिंग बिगड़ जाए तो सबको दिक्कत होती है। इसलिए कारपूल में अनुशासन जरूरी है।”

भविष्य में और बढ़ेगा चलन

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जोधपुर में कारपूल का चलन और बढ़ेगा। अगर सरकारी स्तर पर इसे प्रोत्साहन मिले—जैसे कारपूल लेन, पार्किंग में छूट या जागरूकता अभियान—तो यह शहर की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है।

शहरी विकास से जुड़े जानकार कहते हैं, “कारपूल स्मार्ट सिटी की दिशा में एक जरूरी कदम है। इससे आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय—तीनों स्तर पर लाभ होता है।”

बदलती सोच, बदलता जोधपुर

कुल मिलाकर, कारपूल जोधपुर में सिर्फ एक यात्रा का तरीका नहीं, बल्कि बदलती सोच का प्रतीक बनता जा रहा है। लोग अब ‘मैं’ से ‘हम’ की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव न केवल जेब के लिए फायदेमंद है, बल्कि शहर और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी शुभ संकेत है। नीले शहर की सड़कों पर जब एक कार में चार मुस्कुराते चेहरे नजर आते हैं, तो यह साफ संदेश देता है—जोधपुर अब मिलकर आगे बढ़ रहा है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor