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Thursday, July 9, 2026, 9:23 am

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Lifestyle

हाड़ कंपकंपाती सर्दी में दें स्वेटर की गर्माहट…आपकी संवेदना का संबल बच्चाें को देगा नई ऊर्जा

पुण्यार्थम् : पुण्य अर्जित करने की वेला

राजस्थान में कुल मिलाकर 12500 बच्चे हैं और अकेले जोधपुर में ही 2540 बच्चे हैं। इतनी बड़ी तादाद में बचपन ठंड में कांप रहा है। जहां बचपन के सपनों को नव आयाम लेना है। जहां सपने नव आकार ले रहे हैं। उन सपनों को आपके संबल की जरूरत है। आप करूणा की ऊष्मा से स्वेटर की गर्माहट बांटकर सहयोग कर सकते हैं।

राखी पुरोहित. जोधपुर

दिसंबर का महीना चल रहा है। आसमां में बादलों की दस्तक और कोहरे में लिपटी सर्द हवाओं से भरी सर्द सुबह शरीर को निढ़ाल कर रही है। अल सुबह बच्चे पढ़ने के लिए स्कूलों का रुख करते हैं। सोचिए जरा उन बच्चों के बारे में जो अर्थ के अभाव में स्वेटर से वंचित है। सर्दी तो उन्हें भी लगती है। हमारा भविष्य कंपकंपाए और हम एसी और हीटर वाले रूम में रहें तो यह हमारे लिए और हमारी पीढ़ी के लिए स्थिति अच्छी नहीं होगी। पुण्यार्थम के तहत संस्कार केंद्र संचाललित किए जाते हैं। जहां बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। ये बच्चे विभिन्न वर्गों से और आर्थिक रूप से कमजोर और निर्धन हैं।

राजस्थान में कुल मिलाकर 12500 बच्चे हैं और अकेले जोधपुर में ही 2540 बच्चे हैं। इतनी बड़ी तादाद में बचपन ठंड में कांप रहा है। जहां बचपन के सपनों को नव आयाम लेना है। जहां सपने नव आकार ले रहे हैं। उन सपनों को आपके संबल की जरूरत है। आप करूणा की ऊष्मा से स्वेटर की गर्माहट बांटकर सहयोग कर सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ नहीं करना है। आप चाहे अमीर हैं चाहें मध्यम वर्ग के। आपके भीतर बस संवेदना है तो बच्चों को संबल मिल जाएगा। बच्चों की डिमांड भी ज्यादा नहीं हैं। बूंद-बूंद से घड़ा भर सकता है। अगर आप 100 रुपए का भी सहयोग करते हैं तो एक बच्चे के तन को सर्दी से बचाने का जतन हो जाएगा और स्वेटर का बंदोबस्त हो जाएगा। अगर आप बड़े भामाशाह हैं और आप सहृदय रखते हैं तो आप अकेले ही सभी बच्चों का खर्च उठा सकते हैं। यह समय आपके लिए संवेदना का संबल बांटने का है। आप कंबल बांटते हैं। आप वस्त्र बांटते हैं। जरा इन बच्चों के प्रति भी कुछ करुण दृष्ट डालिए और दे डालिए अपनी भावनाओं की गर्माहट। ईश्वर ने हमें अगर काबिल बनाया है और कुछ दिया है तो समाज के लिए इतना तो हम कर ही सकते हैं। हर बच्चा ईश्वर का ही प्रतिरूप होता है। हम मंदिरों में मूर्तियों को कंबल और रजाई ओढ़ाते हैं ताकि भगवान को सर्दी ना लगे और जो साक्षात भगवान के प्रतिनिधि है वे सर्दी से कांपे तो?…आप समझदार है और जान सकते हैं जिस समाज में बचपन कांप रहा है वहां सपने भी ठहर जाते हैं। सपनों को बुलंद कीजिए, बचपन को जवां कीजिए।…धन्यवाद।

आप अपनी सहयोग राशि निम्न प्रकार भेज सकते हैं। 

SHRI MADHAV SEWA SAMITI

AU BANK

2501220875013038

IFSC-AUBL0002208 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor