शिव वर्मा. जोधपुर
बड़ा रामद्वारा में रविवार से रामचरितमानस का नवा्हपुराण पाठ शुरू होगा। इससे पूर्व सर्वंगसार कथा की पूर्ण आरती हुई। संतों के द्वारा राम नाम के प्रवचनों की बहु सरिता संतों के तपोस्थली श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर में आयोजित वरसी महोत्सव के अंतर्गत सन्त अमृत राम महाराज ने भक्तमाल की कथा सुनाते हुए कहा कि भक्ति का सर्वोपरि लक्षण है शरणागति कोई चाहे कैसा भी हो स्त्री हो पुरुष हो अच्छा हो बुरा हो ऊंचे कुल वाला हो नीचे कल वाला हो अगर जीवन में अपने इश्क के प्रति शरणागति का भाव है तो जीवन में आनंद प्राप्त हो जाता है।
शबरी के घर राम प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहां कि भगवान ने नौ प्रकार की भक्ति को प्रकट किया और कहा अगर कुछ ना कर सको तो जीवन को थोड़ा सहज और सरल बना लेना चाहिए। अगर कोई पूर्णतया मुझ पर भरोसा कर लेता है तो उसके जीवन भर का भार मैं अपने हाथों में ले लेता हूं । परमहंस महंतराम प्रसाद महाराज ने सर्वांगसार कथा सुनाते हुए कहा कि सेवा सर्वोपरि धर्म है, परंतु सेवा या दान हमेशा ऐसी वस्तुओं का करना चाहिए, जिसका सदुपयोग हो सके। दिखावे की सेवा से भगवान प्रसन्न नहीं होते। जैसा खुद खाते हैं वैसा ही दूसरों को खिलाना चाहिए । स्वयं के काम में आने वाली चीज या उससे भी उत्तम चीजों का दान करना चाहिए। ऐसा दान भगवत प्राप्ति करवा देता है। संत कृपाराम, संत दिव्यांशु ने भजनों के द्वारा भक्तों को भावविभोर किया। वृंदावन के संत लक्ष्मण दास जी महाराज के द्वारा रामचरितमानस का नवा्हपुराण पाठ दोपहर 12:00 बजे शुरू होगा ।





