शिव वर्मा. जोधपुर
श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर में श्री रामचरितमानस नवाह्नपारायण पाठ चल रहा है। विरह भाव की चौपाई के साथ महंत परमहंस डॉ. रामप्रसाद महाराज के सान्निध्य में पाठ चल रहा है।
नवाहृपारायण पाठ के मुख्य वाचक वृंदावन के संत लक्ष्मणदास महाराज हैं। पाठ के चतुर्थ दिवस श्री राम वनवास का प्रसंग भाव पुर्ण सुनाया गया। श्रद्धालुजन पाठ में भाव विभोर हो गए । इस अवसर पर रामप्रसाद महाराज ने कहा कि भगवान का विधान कोई नहीं मिटा सकता है। सुख-दुख जो भी विधाता ने लिखा है, उसको मानना ही पड़ता है। उसको चाहे प्रसन्नता से स्वीकार करो। चाहे रो- रो कर स्वीकार करो। लेकिन जो भगवान का चरणो आश्रय ले लेता है । प्रतिकुल प्ररिस्थिति भी अनुकूल हो जाती है । यह भगवान की कथाएं हमारे जीवन के लिए मार्गदर्शन बनती है। जो जीव हमेशा भगवान का आश्रय लेना चाहिए जिसमें जीवन की नया सहजता से पार हो जाती है। सायंकालीन सत्संग में करुणा सागर ग्रन्थ की कथा को सुनाते हुए सन्त प्रेमाराम महाराज ने कहा कि भगवान कि जब विशेष कृपा होती है तब हमें भक्तों का चरित्र सुनने का अवसर मिलता है।





