“यथार्थ से परिचय” पुस्तक में अनुबंध में आवासरत बुजुर्गों के अनुभव है। यह बुक रिडेबल है और राइजिंग भास्कर हर संवेदनशील पाठक को पढ़ने के लिए सुझाव देता है…।
राखी पुरोहित. जोधपुर
जोधपुर। जोधपुर के निंबा निंबड़ी में स्थित है अनुबंध। पूरा नाम अनुबंध वृद्धजन कुटीर। यह एक ऐसा ओल्ड ऐज हाउस हैं जहां अनुराधा अडवानी और उनके पति नरेंद्र अडवानी ने बुजुर्गों के लिए जीवन की ढलती सांझ में एक उम्मीद जगाई।
अनुराधा जी इसे आश्रम नहीं कहकर अपना घर जैसा स्वरूप मानती है जहां बुजुर्गों की केयर दादा-दादी और नाना-नानी के रूप में घर जैसे वातावरण में की जाती है। इस पौधे को करीब 24-25 साल पहले अनुराधाजी और नरेंद्र जी ने लगाया और आज वटवृक्ष बन चुका है। किसी कार्य की शुरुआत करना आसान नहीं होता। जब शुरुआत होती है तो उसे आगे बढ़ाना और परवान चढ़ाना और भी दुश्कर होता है। मगर पिछले 24 सालों में अनुराधा जी ने अनुबंध को देश का नामचीन ओल्ड ऐज हाउस बना दिया, जहां आशा और सपनों को उन्मुक्त मंच मिलता है।
ये वे लोग हैं जिनका परिवार तो हैं, मगर अपनों ने ही जिन्हें ठुकरा दिया। ऐसे लोगों के लिए अनुबंध आज बड़ा सहारा है। अनुराधा जी कहती हैं कि यह ईश्वर की मर्जी थी और ईश्वर का ही आदेश था, कि वह ऐसा कर पाईं। अपनी इसी सुखद यात्रा को उन्होंने 22 दिसंबर को कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर विशेष मेहमान के रूप में इस युग के महान अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ शेयर किया। करीब 4 मिनट की मुलाकात में ही उन्होंने काफी कुछ बयां किया। अनुराधा जी मानती हैं कि अमिताभ के साथ मुलाकात काफी ऊर्जावान रहीं। अमिताभ ने उन्हें मौका दिया और अनुबंध की यात्रा काे करोड़ों दर्शकों तक पहुंचाया। यह उनके लिए अविस्मरणीय पल रहे। अमिताभ बच्चन से मुलाकात के दौरान अनुराधा अडवानी ने उन्हें “यथार्थ से परिचय” पुस्तक भी भेंट की। अमिताभ ने पुस्तक के लिए अनुराधा जी का आभार व्यक्त किया। अनुराधा अडवानी ने बताया कि इस बुक में उन्होंने अनुबंध में आवासरत दादा-दादी और नाना-नानी के अनुभव लिपिबद्ध किए हैं। विशिष्ट साहित्यिक शैली में यह बुक काफी संवेदनाओं से परिपूर्ण हैं। अमिताभ ने बुक के लिए अनुराधा जी का आभार जताया।









