पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस ओळूं उच्छब, जोधपुर में पुष्पांजलि और ज्ञान गोठ सम्पन्न
शिव वर्मा. जोधपुर
राजस्थानी शब्दकोश के निर्माता पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस की 117 वीं जयंती मायड़ भासा प्रेमियों ने जोधपुर में ओळूं उच्छब के रूप में मनाई। संयोजक हरी सिंह भाटेलाई ने बताया कि जोधपुर के गौरव पथ पर स्थित पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस की प्रतिमा पर सैंट्रल जेऴ के बैंड की मधुर स्वर लहरियों के साथ मायड़ भासा प्रेमियों ने पुष्पांजलि अर्पित की ।
उन्होंने बताया कि जोधपुर चारण सभा भवन में हुए पद्मश्री डॉ सीताराम लालस – व्यक्तित्व और कृतित्व विषयक संगोष्ठी की अध्यक्षता कोषकार के सुपुत्र इंजीनियर कैलाश दान लालस ने की और मुख्य अतिथि थे राजस्थान उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ।
कार्यक्रम में रूंखड़िया बालाजी धाम नेरवा के संस्थापक स्वामी नारायण दास जी महाराज और भेळू झूंपड़ी धाम के संत चन्द्रशेखर जी का आध्यात्मिक सानिध्य भी रहा । जस्टिस व्यास ने अपने उद्बोधन में बताया कि राजस्थानी भाषा को तो हमारे तीज -त्योहार,पर्व- उत्सवों और दैनिक जीवन में तो मान्यता मिली हुई ही है । राजकीय मान्यता भी मिल जाए तो युवाओं को रोजगार में फायदा मिल सकेगा । उन्होंने बताया कि सीताराम जी का शब्दकोष निर्माण किसी तपस्या से कम नहीं था । अपने उद्बोधन में जस्टिस व्यास ने कई राजस्थानी लोकगीतों के मुखड़े गाकर भी सुनाए, जिससे माहौल खुशनुमा हो गया ।
स्वामी नारायण दास जी ने कहा कि जग में चर्चा उसी की होती है जो औरों के हित मे त्याग करता है । और राजस्थानी भाषा को हम मान्यता दिलाने का संकल्प लें तो ही माड़साब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी । मंच संचालन करते हुए नारायण सिंह तोलेसर ने सीताराम जी के जीवन की कई घटनाओं को रेखांकित किया । डॉ राजेन्द्र बारहठ और डॉ. जीवराज सिंह जुढिया ने भी अपने विचार साझा किए। कैलाश दान लालस ने अपने पिता की साहित्यिक यात्रा और शब्दकोश निर्माण की उनकी साधना पर विस्तार से प्रकाश डाला ।
संयोजक हरी सिंह भाटेलाई ने धन्यवाद ज्ञापित किया । कार्यक्रम में भीम सिंह तोलेसर, मदनदान ढाढरवाला, हेतु सिंह दईपडा़, गोविंद सिंह सिहू, सज्जन सिंह जुढिया, डॉ राजेन्द्र बारहठ, डॉ जीवराज सिंह जुढिया, साहित्यकार कौशल्या अग्रवाल,खेमकरण लालस, नरेंद्र लालस, गोविंद सिंह राजोला, राजेन्द्र सिंह गहलोत, जैसलमेर पूर्व जिला प्रमुख नैनदान रतनू, अमरदत्त मित्तल,मुकनदान रतनू भींयाड़, नृसिंह दान,नैनदान मेड़वा सहित कई विद्यार्थी और भाषा प्रेमी उपस्थित थे ।
Author: Dilip Purohit
Group Editor









