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Thursday, July 9, 2026, 8:14 am

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अलविदा 2025, स्वागतम् 2026….शीत ऋतु के रंगों में सजी साहित्यिक महफिल, नववर्ष में नव ऊंचाइयां छुएगा अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब

अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब में एक माह तक चला रचनात्मक उत्सव

सृजन, संस्कृति और साहित्य से महक उठा ऑनलाइन मंच – विदा होते वर्ष 2025 की स्मृतियों के संग नववर्ष का हुआ स्वागत

राखी पुरोहित. जोधपुर 

साहित्य की गरिमामयी परंपरा, सृजन की निरंतर धारा और अभिव्यक्ति की ऊष्मा को साथ लेकर अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब ने शीत ऋतु के आगमन को “शीत ऋतु के रंग सखियों के संग” जैसी गर्मजोशी भरी थीम के साथ एक महीने तक साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से सराबोर रखा। इस महीने भर चले आयोजन में न केवल प्रतियोगिताएँ और काव्य गोष्ठियाँ हुईं, बल्कि साहित्य प्रेमियों ने अपनी कलम और भावों के माध्यम से मित्रता, जीवन, प्रकृति और संवेदनाओं को शब्दों से सजाया।

ऑनलाइन माध्यम होने के बावजूद सहभागिता और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। देश–विदेश की प्रतिभागी सखियाँ हर आयोजन में उत्साह से शामिल हुईं। काव्य पाठ, कहानी, अभिव्यक्ति संबंधी कार्यक्रम, साहित्यिक संगोष्ठी और विचार-चर्चाएँ—हर मंच पर सृजन का रंग गाढ़ा दिखा और हर प्रस्तुति में शब्दों के मोती झिलमिलाते रहे।

2025 को यादों के साथ विदा, 2026 का अभिनंदन

महीने की श्रृंखला का समापन 30 दिसंबर को फिल्मी गीतों पर आधारित आयोजन के साथ हुआ। हल्की सर्द रात, मखमली गीतों की धुन और साहित्यिक समुदाय की खिलखिलाहट—इन सबने कार्यक्रम को उत्सव में बदल दिया। हर प्रस्तुति मानो वर्ष 2025 की यादों को बांहों में समेट रही हो—किसी में पुरानी फिल्मों का रोमांटिक माधुर्य तो किसी में नए समय की उमंग।

कार्यक्रम के दौरान सखियों ने बीते साल की उपलब्धियाँ, सीखें और सुंदर क्षण साझा करते हुए कहा कि 2025 कई मायनों में विशेष रहा—नई पहचानें बनीं, संबंध गहरे हुए और मंचों ने अनेक नए लेखकों को शब्द-रूप में पंख दिए। इसके साथ ही सभी सदस्यों ने संकल्प लिया कि नए वर्ष में भी सृजन का प्रवाह इसी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगा। क्लब की ओर से सभी सदस्यों, पदाधिकारियों और साहित्य प्रेमियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ दी गईं। ईश्वर से प्रार्थना की गई कि 2026 सभी के जीवन में उजास, उल्लास और नई उपलब्धियाँ लेकर आए।

विविध साहित्यिक गतिविधियों से महका मंच

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा—विभिन्न साहित्यिक विधाओं से सजी प्रतियोगिताएँ और काव्य आयोजन, जिनमें अनुभवी रचनाकारों के साथ नए लेखकों ने भी अपनी रचनात्मकता को खुलकर व्यक्त किया। वीर बाल दिवस के अवसर पर बाल वीरता विषयक रचनाएँ प्रस्तुत की गईं जिसने मंच को भावुक, प्रेरणादायी और गर्वपूर्ण बना दिया।

साहित्य के साथ-साथ संवाद, सीख और पारस्परिक प्रेरणा ने हर आयोजन को सार्थक बनाया। प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति और रचनात्मक प्रस्तुति से क्लब की गतिविधियों को नई शक्ति दी।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से शामिल रहीं—डॉ. प्रतीक्षा शर्मा, प्रो. रेखा श्रीवास्तव, शोभा रानी तिवारी, डॉ. शशिकला अवस्थी, सपना क्षिति, डॉ. संजीदा खानम शाहीन, नीलम व्यास स्वयंसिद्धा, मीनाक्षी महाजन, डॉ. नीलम, शिवली गोस्वामी, राजलक्ष्मी श्रीवास्तव, श्रीमती संतोष तोषनीवाल, डॉ. सुमन जैन, डॉ. सुमन मेहरोत्रा, राजलक्ष्मी,  श्रीमती संध्या श्रीवास्तव सांझ, ममता सक्सेना, छाया शाह, डॉ. आनंदी सिंह रावत, राखी पुरोहित, मंजुषा दुग्गल, चंदा गुप्ता, प्रज्ञा अंबेडकर, तनुजा शुक्ला सहित अनेक साहित्यप्रेमी। इनकी सक्रियता, काव्य-पाठ, भावपूर्ण प्रस्तुति और सहभागिता ने समारोह को एक नई ऊँचाई दी।

पदाधिकारियों की मेहनत ने संवारा आयोजन

अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब की संस्थापक डॉ. अर्चना श्रेया के मार्गदर्शन और अध्यक्ष हेमाश्री के संयमित नेतृत्व में क्लब निरंतर नए आयाम गढ़ रहा है। कार्यों के कुशल संचालन में सलाहकार दीपमाला, संरक्षक वनदेवी, सांस्कृतिक सचिव तनुजा शुक्ला, संयोजक मीता लुनिवाल ‘मीत’, महासचिव क्षमा पांडेय, समीक्षक शिखा पांडेय, पटलप्रभारी विनीता लावनियां, मीडिया प्रभारी राखी पुरोहित सहित सभी पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। प्रत्यक्ष रूप से नज़र न आने वाली व्यवस्थाओं की मजबूत रीढ़ बनीं ये महिलाएँ—कार्यक्रम नियोजन, तकनीकी प्रबंधन, प्रतिभागियों से समन्वय और मंच संचालन तक हर स्तर पर तत्पर रहीं। उनकी टीमवर्क और समर्पण ने ही पूरे महीने चले आयोजन को सफल, आकर्षक और यादगार बनाया।

साहित्य के नए वर्ष की ओर—उम्मीदों के साथ

अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब साहित्य की उस मशाल को उठाए आगे बढ़ रहा है जो न केवल रचनात्मकता को प्रोत्साहित करती है, बल्कि सखियों के बीच सौहार्द और सृजनशीलता का सेतु भी बनाती है। शीत ऋतु के ठहरे मौसम में यह आयोजन एक गरमाहट भरा एहसास लेकर आया—जहाँ शब्दों ने ताप दिया, रचनाओं ने मन को महकाया और संग-साथ ने रिश्तों को मजबूत बनाया। 2025 के इस सुगंधित समापन ने 2026 की राह और अधिक उज्ज्वल कर दी है। उम्मीद है कि आने वाला वर्ष भी साहित्य, संस्कृति और सृजन के इन रंगों को और प्रखर करेगा। अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब का यह सृजन उत्सव सिर्फ समारोह नहीं—महिलाओं की रचनात्मक उर्जा और साहित्यिक चेतना का जीवंत प्रमाण बना। नव वर्ष में नई उड़ान, नए सृजन और नई संभावनाओं के साथ यह यात्रा यूँ ही आगे बढ़ती रहे—इसी शुभकामना के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor