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Thursday, February 19, 2026, 11:50 am

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राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा का राष्ट्रीय कवि चौपाल में सम्मान हुआ

“साच में नूंवों बरस, नूंवी रंगत दे वैसा अपणायत रा रंग भरैला”

राखी पुरोहित. बीकानेर 

राष्ट्रीय कवि चौपाल की 549वीं कड़ी नव वर्ष में समाहित संकल्प-हर्ष को समर्पित रही। इस महत्वपूर्ण करीम कड़ी में राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा व लीलाधर सोनी को सम्मानित किया गया। आज के कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. हरिदास हर्ष, अतिथि कमल रंगा, लीलाधर सोनी व सरदार अली पड़िहार आदि मंच पर सुशोभित हुए।

कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने अपने बौद्धिक में कहा कि नव हमारा चैत्र मास में आता है लेकिन लोकिक व अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता में मनाएंगे क्योंकि नव वर्ष में समाहित संकल्प व हर्ष कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ हरिदास हर्ष साहित्य सदन को नव वर्ष की बधाई देते हुए काव्य धारा में “द्विभ्रमित सा मैं विस्मृति के स्तूप को, मानसिक सतल में प्रतिष्ठित करते हुए, बह रहा हूं भ्रांतियों में चौराहे की और ” अपनी बात रखी विशिष्ट अतिथि राजस्थानी भाषा मान्यता – मूर्त रूप देखने के आतूर जांबाज सिपाही कमल रंगा नव वर्ष मंगलमय संदर्भ राजस्थानी भाषा में “साच में नूंवों बरस, नूंवी रंगत दे वैसा अपणायत रा रंग भरैला” विशिष्ट अतिथि सरदार अली परिहार : तूं जो दुखी, तूं खुद कारण, क्यों तूं खून जलाता है।

अतिथि समाजसेवी आध्यात्म हृदय लीलाधर सोनी (महामंत्री स्वर्णकार समाज) ने भटकती क्यों फिरें मां गाय। आज दुखी भारत वर्ष में करता न कोई सहाय। प्रख्यात शाइर क़ासिम बीकानेरी ने कहां की कमल गंगा राजस्थानी भाषा के एक ऐसे मूल धनिया विद्वान है जिन्होंने अपना पूरा जीवन राजस्थानी भाषा की सेवा में समर्पित कर दिया उनका सम्मान करके संस्था ने स्वयं गौरवान्वित हुई है। इस अवसर पर क़ासिम बीकानेरी ने अपनी ताज़ा ग़ज़ल के इस शे’र-‘सदी इक्कीसवीं में क्यूं हर इन्सां/ भरे घर में अकेला हो गया है’ के जरिए आज के दौर के मानव जीवन के अकेलेपन को रेखांकित किया। जिसे श्रोताओं ने भरपूर पसंद किया।
इससे पूर्व के के व्यास व्यास ने पय पश्यन्ती पर बिखरी विद्या,वाणी की देवी नमोस्तुते। सरस्वती वंदना की
डॉ कृष्ण लाल विश्नोई : रही न गुलजार की बातें, अब गुलजार न रही .. आध्यात्म दार्शनिक लेखक प्रमोद शर्मा ने ये क्या मैं देख रहा हूं पगला … शिव दाधीच बीकानेरी : जहां बसंत अंगड़ाई लेता है, दिनकर भी भी अठखेलियां करता है … के के व्यास : घुट रहे भाव अन्तर्मन में वाणी की सीढ़ी न चढ़ पाए।

रामेश्वर साधक : रे जीव..! हे जीव..!! तू फिर से खुशियां क्यों उधार लेता है… राजकुमार ग्रोवर : गगन मे जिसके लहराता है ऊँचे से ऊँचा सदा तिरंगा, देश मेरा वो भारत है, सब देशो में सबसे चंगा…विशाल भारद्वाज : बाहर बर्फ गिरे या कोहरे का पहरा है, पर भीतर जज्बातों की आग जलाने दिलाने आ रहे हैं… मधुरिमा सिंह : विगत से सीख उसकी पुनरावृत्ति न कर, धूमधाम से नव वर्ष का स्वागत कर.. कृष्णा वर्मा : स्वागत है नववर्ष का, नववर्ष पर संकल्प करें देश को नई दिशा दिखाएगे.. सुभाष विश्नोई : दिसंबर पर जनवरी भारी पड़ रही है, वर्ष 25 जीने से उतर आया है..

पवन चड्ढ़ा,कैलाश चारण देशनोकवी निधि रचनाएं प्रस्तुत कीं।
आज के विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि चौपाल में राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा का उनके
जन्मोत्सव के उपलक्ष में सम्मानित किया गया तथा समाज सेवी कवि गीतकार लीलाधर सोनी के स्वर्णकार समाज के महामंत्री चयन होने पर उपरोक्त दोनों शख़्सियतों का शाॅल, श्री फल, माल्यार्पण द्वारा आत्मीय अभिनंदन किया गया तथा इनके शतायु अधिक ईश कामना की गई। आज़ के कार्यक्रम में विधिवेत्ता कवि गंगाबिशन विश्नोई ‘ब्रह्’मा, घनश्याम सौलंकी, महेश कुमार हर्ष, छोटू खां, परमेश्वर सोनी, सोनिया भगोरिया, साकिर, भवानी सिंह, नत्थू, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले अंदाज में शिव दाधीच बीकानेरी ने किया जबकि आभार साधक ने किया

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor