सुनील वर्मा. जोधपुर
रामस्नेही संप्रदाय की प्रमुख तपोस्थली श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर में आयोजित वार्षिक वरसी महोत्सव का समापन भक्ति और उत्साह के साथ हो गया। इस अवसर पर संगीतमय सुंदरकांड पाठ और सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। महोत्सव का मुख्य आकर्षण परमहंस डॉक्टर रामप्रसाद महाराज का पावन सान्निध्य रहा।
खेड़ापा आचार्य पुरुषोत्तम दास महाराज तथा परमहंस डॉक्टर रामप्रसाद महाराज के मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस महोत्सव के अंतिम दिन संत सुखराम दास और संत धर्माराम ने संगीतमय सुंदरकांड पाठ का सुंदर वाचन किया। पाठ की मधुर धुन और भक्तिपूर्ण प्रस्तुति से पूरा वातावरण राममय हो गया। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर राम नाम का जाप करते नजर आए। इसके पश्चात परमहंस डॉक्टर रामप्रसाद महाराज ने सत्संग में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए सत्संग की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्संग ही वह माध्यम है जो जीव को संसार के बंधनों से मुक्त कर परमात्मा से मिलन कराता है। रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा में सत्संग को सर्वोपरि स्थान दिया गया है, जो भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का स्रोत है।
महाराज जी ने अपने प्रवचन के अंत में “राम राम रे भैया राम राम रे” भजन गाकर सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भजन की स्वर लहरियों में डूबे भक्तों की आंखों से आंसू छलक पड़े और पूरा पंडाल राम नाम के जयकारों से गूंज उठा।
रामस्नेही संप्रदाय की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसमें संतों का समागम और राम भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर जोधपुर में स्थित यह तपोस्थली भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। महोत्सव में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और संतों के दर्शन का लाभ लिया। इस आयोजन से राम भक्ति की अलख एक बार फिर जगाई गई और भक्तों के मन में राम नाम की ज्योति प्रज्वलित हुई।










