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Thursday, July 9, 2026, 3:24 am

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परमार्थ की छांव में उम्मीद का घर : मुंबई में कैंसर पीड़ितों के लिए ‘श्रीमती रूपाली देवी मदनलाल नुवाल सेवा सदन’

15 अक्टूबर 2021 को उद्घाटित यह सेवा सदन मुंबई जैसे महानगर में कैंसर पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। देश के किसी भी कोने से कैंसर का इलाज कराने मुंबई आने वाले मरीज और उनके साथ आए परिजन यहां मात्र 200 रुपये प्रतिदिन के नाममात्र खर्च पर ठहर सकते हैं। यह राशि केवल एक शुल्क नहीं, बल्कि उस विश्वास की प्रतीक है कि मानवता आज भी जीवित है।

दिलीप कुमार पुरोहित. मुंबई

आज के समय में कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसी भयावह सच्चाई बन चुका है जो न सिर्फ शरीर को तोड़ती है, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक और मानसिक रीढ़ को भी हिला देती है। इलाज की लंबी प्रक्रिया, महंगे टेस्ट, दवाइयाँ और बड़े शहरों में रहने-खाने का खर्च—ये सब मिलकर आम परिवार की कमर तोड़ देते हैं। ऐसे कठिन समय में अगर किसी को सहारा मिलता है, तो वह केवल दीवारों वाला भवन नहीं होता, बल्कि उम्मीद, संवेदना और परमार्थ का सजीव रूप होता है। मुंबई में परमार्थ सेवा समिति द्वारा निर्मित ‘श्रीमती रूपाली देवी मदनलाल नुवाल सेवा सदन’ ठीक ऐसा ही एक सहारा बनकर उभरा है।

15 अक्टूबर 2021 को उद्घाटित यह सेवा सदन मुंबई जैसे महानगर में कैंसर पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। देश के किसी भी कोने से कैंसर का इलाज कराने मुंबई आने वाले मरीज और उनके साथ आए परिजन यहां मात्र 200 रुपये प्रतिदिन के नाममात्र खर्च पर ठहर सकते हैं। यह राशि केवल एक शुल्क नहीं, बल्कि उस विश्वास की प्रतीक है कि मानवता आज भी जीवित है।

तीनों प्रहर का भोजन, नाश्ता और फल पूरी तरह निशुल्क

इस सेवा सदन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां ठहरने वाले कैंसर रोगियों और उनके परिजनों के लिए तीनों प्रहर का भोजन, नाश्ता और फल पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इलाज के दौरान रोगी को पौष्टिक आहार की जितनी आवश्यकता होती है, उतनी ही मानसिक शांति की भी जरूरत होती है। परमार्थ सेवा समिति ने इस बात को गहराई से समझा और सेवा सदन को केवल ठहरने की जगह नहीं, बल्कि एक संवेदनशील वातावरण के रूप में विकसित किया।

मुंबई जैसे शहर में 200 रुपए में कमरा कल्पना, मगर परमार्थ सेवा समिति ने हकीकत में बदला 

मुंबई जैसे शहर में, जहां एक साधारण कमरे का किराया भी हजारों रुपये प्रतिदिन होता है, वहां 200 रुपये में सुरक्षित, स्वच्छ और स्नेहपूर्ण वातावरण मिलना अपने आप में चमत्कार जैसा है। कई परिवार ऐसे होते हैं जो अपने गांव या छोटे शहरों से उम्मीद लेकर मुंबई आते हैं, लेकिन इलाज शुरू होते ही आर्थिक दबाव उन्हें घेर लेता है। ऐसे में यह सेवा सदन उनके लिए एक मजबूत सहारा बनता है, जहां वे बिना किसी अतिरिक्त चिंता के मरीज की देखभाल कर सकते हैं। यह भवन केवल ईंट और सीमेंट से बना ढांचा नहीं है, बल्कि इसमें उन असंख्य दुआओं की गूंज है जो यहां ठहरने वाले मरीज और उनके परिजन हर दिन देते हैं। कैंसर रोग की भयावहता से कहीं ज्यादा डरावना उसका इलाज और उस पर आने वाला खर्च होता है। कई बार परिवार इलाज बीच में ही इसलिए छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं क्योंकि रहने और खाने का खर्च वहन करना असंभव हो जाता है। ऐसे में ‘श्रीमती रूपाली देवी मदनलाल नुवाल सेवा सदन’ जैसे प्रयास जीवन और मृत्यु के बीच आशा की रेखा बन जाते हैं।

परमार्थ सेवा समिति का यह प्रयास यह भी दर्शाता है कि सामाजिक संस्थाएं अगर संवेदनशीलता और सेवा भाव के साथ काम करें, तो वे सरकारी योजनाओं से कहीं आगे जाकर लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती हैं। यह सेवा सदन उन परिवारों के लिए भी संबल है, जो अपनों को बचाने की जद्दोजहद में स्वयं टूट जाते हैं।

इस तरह करवा सकते हैं बुकिंग

बुकिंग और अधिक जानकारी के लिए 9892441434 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। यह नंबर केवल एक संपर्क सूत्र नहीं, बल्कि उस द्वार की चाबी है जहां से किसी परिवार को राहत, सम्मान और सहारा मिल सकता है। आज जब समाज में स्वार्थ और संवेदनहीनता की बातें ज्यादा सुनाई देती हैं, ऐसे समय में परमार्थ सेवा समिति द्वारा किया गया यह कार्य यह याद दिलाता है कि मानवता अभी जीवित है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह सेवा सदन केवल एक ठिकाना नहीं, बल्कि उम्मीद का घर है—जहां दर्द के बीच भी अपनापन मिलता है और संघर्ष के बीच भी सहारा। निस्संदेह, ऐसे सेवा भवन समाज के लिए प्रेरणा हैं और यह संदेश देते हैं कि अगर इरादे नेक हों, तो परमार्थ के छोटे-छोटे प्रयास भी किसी के जीवन में बड़ा उजाला भर सकते हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor