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Saturday, January 24, 2026, 1:50 am

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गौसेवकों ने गौशाला में सुंदरकांड पाठ व गौसेवा कर किया गौ-सम्मान अभियान का शंखनाद

पंकज जांगिड़. जोधपुर 

गौसेवकों की ओर से पाली रोड, बालाजी नगर स्थित एक गौशाला में सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ और गौसेवा की गई। पाठ वाचक बाबा विजय भारती ने सुंदरकांड पाठ के वाचन के साथ गौसेवा से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति दी तो उपस्थित श्रोता भावविभोर हो गए। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 27 अप्रैल को गौ-सम्मान दिवस मनाने और संपूर्ण भारतवर्ष में गौहत्या समाप्त करने व गौमाता को राष्ट्रीय स्तरीय सम्मान दिलाने हेतु अभियान का शंखनाद किया।

बाबा विजय भारती और गौसेवक सवाई राम चौधरी ने बताया कि गौमाता (गाय) हिंदू धर्म में पूज्यनीय है, जिसे प्रेम, त्याग, और पोषण का प्रतीक माना जाता है, जिसके दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर (पंचगव्य) से स्वास्थ्य लाभ, रोगों का उपचार और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है; गाय को “चलते-फिरते मंदिर” के रूप में देखा जाता है, जिसमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है, और इसकी सेवा से सुख, समृद्धि, करुणा और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। गाय को सभी प्राणियों की माता और सभी देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है, जिससे इसकी सेवा करना स्वयं सभी देवताओं की पूजा के समान है। गौमाता की महिमा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो मानव जीवन को सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है।

सवाई राम चौधरी बताते हैं कि अक्सर लोग सड़क पर घूमती गौमाताओं को दया अथवा पुण्य समझकर रोटी-सब्जी तो दे देते हैं, परंतु पॉलीथिन में लपेटकर। अनजाने में वे यह भूल जाते हैं कि गाय भोजन के साथ पॉलीथिन भी निगल लेती है, जो पेट में रहकर जानलेवा बन जाती है। इसी समस्या को समझते हुए सवाईराम चौधरी ने अपनी आटा चक्की की दुकान पर एक जूट की बोरी रखी है, जिसमें क्षेत्रवासी प्रेम से रोटी डालते हैं। सुबह से शाम तक जितनी भी रोटियां एकत्रित होती हैं, उन्हें स्वयं निकटस्थ गौशाला में पहुंचाकर गौमाताओं को समर्पित करते हैं। यह उनका दैनिक नियम बन चुका है। आइए संकल्प लें कि गौमाता को भोजन दें, पर पॉलीथिन में नहीं। गौमाता को पॉलीथिन में खाद्य सामग्री न दी जाए। यह पहल केवल एक संदेश नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों से जुड़ी एक सतत सेवा-पद्धति का उदाहरण है। यह पहल केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य का जीवंत उदाहरण है। गौमाता हमारी धरोहर है, हमारी संस्कृति है, हमारी जिम्मेदारी है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor