पंकज जांगिड़. जोधपुर
चोखा, सात मील स्थित लक्ष्मी उद्यान में निराश्रित एवं असहाय बच्चों व विद्यार्थियों की शिक्षा व पुनर्वास हितार्थ आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा में कथावाचक अनिल देवड़ा ने श्री राम वनवास प्रसंग का वर्णन किया, तो श्रोता भावविभोर हो गए। उन्होंने बताया कि भगवान राम का वनवास जीवन पितृ आज्ञा का पालन, मर्यादा, त्याग, सत्य और न्याय का संदेश देता है।
कथावाचक ने बताया कि जब भगवान राम के राजतिलक की तैयारियां चल रही थीं, तब महारानी कैकेयी ने महाराजा दशरथ से अपने दो वचन मांगे। कैकेयी ने भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। यह सुनकर महाराजा दशरथ अचेत हो गए। भगवान राम जब वनवास जाने लगे, तो उनके साथ माता सीता और लक्ष्मण भी तैयार हो गए। श्रीराम के वनगमन की बात सुनकर पूरी अवधपुरी में शोक छा गया। माता कौशल्या सहित अवध की नारियां, पशु-पक्षी और वनस्पति भी उदास हो गए।
कथा में बताया कि राम का अवधपुरी के प्रति गहरा प्रेम था। राज्याभिषेक होने वाला था, लेकिन माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वे चौदह वर्ष के वनवास के लिए निकल पड़े।
आयोजन समिति के विनोद सांखला, पंकज सोलंकी, मदन सुथार द्वारा इस आयोजन में सहयोग देने वाले भामाशाहों का सम्मान किया गया और आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
Author: Dilip Purohit
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