लेखक : शिव सिंह
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सर्दियों के मौसम में हमारा शरीर सुस्त होने लगता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम हो जाती है। ठंड के कारण नसों में संकुचन और जोड़ों में जकड़न महसूस होना आम बात है। योग विज्ञान में कुछ ऐसे प्राणायाम बताए गए हैं जो शरीर में ‘अग्नि तत्व’ को बढ़ाकर प्राकृतिक रूप से गर्माहट पैदा करते हैं।
1. सूर्य भेदन प्राणायाम (Surya Bhedana)
हमारी दाहिनी नासिका (Right Nostril) को ‘सूर्य स्वर’ कहा जाता है, जो शरीर में गर्मी और ऊर्जा का प्रतीक है।
विधि:
सुखासन में बैठें। दाएँ हाथ के अंगूठे से बाईं नासिका बंद करें। अब दाईं ओर से गहरी सांस लें। फिर दाईं नासिका बंद करके बाईं ओर से सांस छोड़ें।
लाभ: यह शरीर के तापमान को बढ़ाता है, जठराग्नि को तेज करता है और सुस्ती दूर करता है।
सावधानी: उच्च रक्तचाप (High BP) वाले लोग इसे करने से बचें।
2. भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika)
इसे ‘धौंकनी’ प्राणायाम भी कहा जाता है क्योंकि इसमें सांसों की गति तेज होती है।
विधि: गहरी सांस अंदर भरें और उतनी ही तेजी से बलपूर्वक बाहर छोड़ें। यह क्रिया फेफड़ों को पूरी तरह सक्रिय कर देती है।
लाभ: यह फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है और शरीर में तुरंत गर्मी पैदा करता है। यह सर्दी-खांसी और साइनस में बेहद लाभकारी है।
सावधानी: हृदय रोगी या हर्निया की समस्या वाले विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें।
3. कपालभाति क्रिया (Kapalbhati)
हालांकि यह एक ‘शुद्धि क्रिया’ है, लेकिन इसके अभ्यास से शरीर में बहुत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
विधि: रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। नाक से सांस को झटके के साथ बाहर छोड़ें और पेट को अंदर की तरफ खींचें। सांस लेने की प्रक्रिया अपने आप (Involuntary) होने दें।
लाभ: यह चयापचय (Metabolism) को दुरुस्त रखता है और शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
सर्दियों में प्राणायाम करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
समय: सुबह का समय सबसे श्रेष्ठ है, जब पेट खाली हो।
स्थान: प्राणायाम किसी बंद कमरे में करें जहाँ ठंडी हवा के सीधे झोंके न लगें, लेकिन वेंटिलेशन अच्छा हो।
धैर्य: शुरुआत धीमी गति से करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
सर्दियों में नियमित प्राणायाम न केवल हमें जुकाम और फ्लू से बचाता है, बल्कि मानसिक स्पष्टता और आंतरिक शांति भी प्रदान करता है।





