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Saturday, January 24, 2026, 2:23 am

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मन की बात के बाद ‘मन की किताब’ की जरूरत…लाइब्रेरी संस्कृति को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने का राइजिंग भास्कर का क्रांतिकारी सुझाव

स्वयं-निर्भर, राजस्व-उत्पादक और रोजगार सृजन करने वाला राष्ट्रीय नीति मॉडल “राष्ट्रीय पाठक सुरक्षा व प्रोत्साहन योजना – 2026 (NRPIS-2026)”

यदि मन की बात ने भारत को सुनना सिखाया, तो NRPIS-2026 भारत को फिर से पढ़ना सिखा सकती है। अब नजरें इस बात पर हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक सुझाव को कब राष्ट्रीय मंच से आवाज देते हैं—और भारत कब सच में पढ़ने वाला राष्ट्र बनता है।
योजना पर एक नजर :
175 करोड़ : बीमा क्लेम
280 करोड़ : रीडर्स को रिवॉर्ड
140 करोड़ : संचालन+रोजगार
105 करोड़ : सरकार को आय

राखी पुरोहित. नई दिल्ली

जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो के माध्यम से ‘मन की बात’ कार्यक्रम शुरू कर देश में रेडियो संस्कृति को नई ऊर्जा दी, ठीक उसी तरह अब समय आ गया है कि भारत में लाइब्रेरी और पढ़ने की संस्कृति को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया जाए। इसी सोच के साथ राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी सुझाव रखा है—“राष्ट्रीय पाठक सुरक्षा व प्रोत्साहन योजना – 2026 (NRPIS-2026)”

यह योजना केवल एक कल्याणकारी प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक स्वयं-निर्भर, राजस्व-उत्पादक और रोजगार सृजन करने वाला राष्ट्रीय नीति मॉडल है, जो भारत की बौद्धिक पूंजी को नई दिशा दे सकता है।

रेडियो के बाद लाइब्रेरी: अगला राष्ट्रीय मिशन

दिलीप कुमार पुरोहित का मानना है कि

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मन की बात की शुरुआत की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि रेडियो फिर से घर-घर पहुंचेगा। आज वही रेडियो करोड़ों लोगों की आवाज बन चुका है। अब ठीक उसी तरह भारत को ‘मन की किताब’ की जरूरत है, ताकि पढ़ना फिर से आदत नहीं, बल्कि सम्मान और आय का माध्यम बने।”

उनका कहना है कि आज भारत में हजारों सार्वजनिक लाइब्रेरी, स्कूल-कॉलेज और विश्वविद्यालयों की लाइब्रेरी मृतप्राय ढांचे बन चुकी हैं। किताबें हैं, भवन हैं, लेकिन पाठक नहीं। दूसरी ओर युवा वर्ग सोशल मीडिया, रील्स और तात्कालिक मनोरंजन में उलझा हुआ है।NRPIS-2026 इसी खाई को पाटने का प्रयास है।

योजना का मूल दर्शन: सरकार खर्च नहीं करेगी, उल्टा कमाएगी

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि
सरकार सीधे एक भी रुपया नहीं देगी
योजना प्रीमियम आधारित पब्लिक-रीडर इंश्योरेंस मॉडल पर चलेगी
लाइब्रेरी, बीमा क्षेत्र और पाठक—तीनों को लाभ
सरकार को सामाजिक लाभ के साथ राजस्व और बचत भी

दिलीप कुमार पुरोहित कहते हैं—

“आज हर योजना सरकार के खजाने पर बोझ बनती है। हमने पहली बार एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसमें सरकार शून्य खर्च पर शिक्षा, रोजगार, बीमा और ज्ञान—चारों लक्ष्यों को हासिल कर सकती है।”

योजना का नाम, नारा और राष्ट्रीय उद्देश्य

योजना का नाम: राष्ट्रीय पाठक सुरक्षा व प्रोत्साहन योजना – 2026
(National Reader Protection & Incentive Scheme – NRPIS-2026)
नारा: “पढ़ेगा भारत – बढ़ेगा भारत, सुरक्षित पाठक – समृद्ध भविष्य”

राष्ट्रीय उद्देश्य

  1. भारत में रीडिंग कल्चर का पुनर्जागरण

  2. छात्रों, युवाओं, शोधकर्ताओं और सामान्य नागरिकों को आय का अवसर

  3. पाठकों के लिए बीमा सुरक्षा

  4. लाइब्रेरी आधारित नए रोजगार

  5. सरकारी खर्च घटाकर स्वयं-निर्भर मॉडल

अनिवार्य लाइब्रेरी पंजीकरण: योजना की रीढ़

NRPIS-2026 के तहत हर नागरिक को लाइब्रेरी से जुड़ना अनिवार्य होगा। यह योजना डिजिटल नहीं, बल्कि फिजिकल लाइब्रेरी को केंद्र में रखकर तैयार की गई है।

सदस्यता संरचना

प्लान वार्षिक शुल्क लाभ लक्ष्य समूह
Basic Reader ₹500 बीमा + लाइब्रेरी एंट्री आम नागरिक
Student Reader ₹400 रियायती शुल्क + बीमा स्कूल/कॉलेज छात्र
Advanced Reader ₹900 ₹5,000 मासिक रिवार्ड पात्रता सक्रिय पाठक
Scholar Reader ₹1500 ऑडियोबुक, वर्कशॉप, प्रीमियम रैंक शोधकर्ता

₹5,000 मासिक आय केवल Advanced और Scholar टियर के लिए।


फाइनेंशियल मॉडल: आंकड़ों में ताकत

राइजिंग भास्कर की टीम ने इस योजना को ठोस गणनाओं के साथ तैयार किया है।

पहले वर्ष का अनुमान

  • सदस्य: 1 करोड़

  • औसत प्रीमियम: ₹700

  • कुल फंड: ₹700 करोड़

फंड का वितरण

उपयोग प्रतिशत राशि
बीमा क्लेम रिज़र्व 25% ₹175 करोड़
रीडिंग रिवार्ड फंड 40% ₹280 करोड़
संचालन व रोजगार 20% ₹140 करोड़
सरकार की बचत/आय 15% ₹105 करोड़

सरकार को सीधा ₹105 करोड़ का लाभ,
अप्रयुक्त बीमा क्लेम और निवेश से भविष्य में और अधिक।


₹5,000 मासिक आय: सपना नहीं, गणित

दिलीप कुमार पुरोहित स्पष्ट करते हैं—

“हमने यह दावा भावनाओं पर नहीं, बल्कि गणित पर रखा है।”

  • एक पाठक को वार्षिक रिवार्ड: ₹60,000

  • ₹280 करोड़ रिवार्ड फंड

  • लगभग 46,666 पाठक प्रति वर्ष

यानी पूरे भारत में हर महीने 3,800 से अधिक श्रेष्ठ पाठकों को ₹5,000 की नियमित आय।

यह आय सभी को नहीं, बल्कि योग्य, सत्यापित और अनुशासित पाठकों को मिलेगी।

लाइब्रेरी होंगी सबसे बड़ी लाभार्थी

NRPIS-2026 लाइब्रेरी को दान पर निर्भर संस्था से निकालकर आर्थिक इकाई बनाती है।

लाइब्रेरी को लाभ

हर पंजीकृत पाठक पर 5–8% कमीशन
पुस्तक खरीद के लिए रीडिंग ग्रांट पॉइंट
स्टाफ विस्तार की अनुमति

नए रोजगार

  • लाइब्रेरी असिस्टेंट

  • रीडिंग डेटा वेरिफायर

  • जिला रीडिंग प्रमोटर

  • मोबाइल लाइब्रेरी ऑपरेटर

यदि 10 लाख लाइब्रेरी/संस्थान जुड़े—
5 से 10 लाख नए रोजगार

फर्जीवाड़े पर सख्ती: AI + लाइब्रेरियन

योजना की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन सिस्टम प्रस्तावित है।

QR कोड से बुक चेकआउट
AI आधारित सारांश/क्विज
लाइब्रेरियन द्वारा मौखिक परीक्षण
एक ही किताब दोहराने पर कम स्कोर
सालभर का रीडिंग स्कोर कार्ड

इसके लिए बनेगा राष्ट्रीय ऐप—
India Reading Mission App (IRMA)

सरकार को क्या मिलेगा?

दिलीप कुमार पुरोहित कहते हैं—

“यह योजना सरकार के लिए बोझ नहीं, बल्कि दीर्घकालिक निवेश है।”

प्रत्यक्ष लाभ

  • शिक्षा गुणवत्ता में सुधार

  • लाइब्रेरी पुनर्जीवन

  • युवाओं का नशे व सोशल मीडिया से दूरी

  • रिसर्च, प्रतियोगी परीक्षा और बौद्धिक उत्पादन में वृद्धि

  • बीमा क्षेत्र में बड़ा आर्थिक प्रवाह

  • अप्रयुक्त फंड से सरकारी राजस्व

प्रधानमंत्री के नाम सुझाव

राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर ने सुझाव दिया है कि 2026 को ‘राष्ट्रीय पाठक सुरक्षा व प्रोत्साहन वर्ष’ घोषित किया जाए।

संभावित प्रधानमंत्री घोषणा

“2026 से भारत पढ़ने वाला राष्ट्र बनेगा। मात्र ₹500 के वार्षिक पंजीकरण से नागरिकों को बीमा सुरक्षा और पढ़ने पर आय का अवसर मिलेगा। देश के श्रेष्ठ पाठक हर माह ₹5,000 तक कमा सकेंगे। यह योजना लाइब्रेरी संस्कृति को पुनर्जीवित करेगी और युवाओं को ज्ञान, रोजगार और सुरक्षा देगी।”

2030 का भारत: पढ़ता हुआ राष्ट्र

NRPIS-2026 का दीर्घकालिक लक्ष्य और भी बड़ा है—

  • 10 करोड़ पाठक सदस्य

  • 1 लाख पाठकों को मासिक आय

  • 25,000 से अधिक लाइब्रेरी पुनर्जीवित

  • 20 लाख से अधिक रोजगार

भारत के बौद्धिक भविष्य का रोडमैप

राइजिंग भास्कर का यह सुझाव केवल एक योजना नहीं, बल्कि भारत के बौद्धिक भविष्य का रोडमैप है। यदि मन की बात ने भारत को सुनना सिखाया, तो NRPIS-2026 भारत को फिर से पढ़ना सिखा सकती है। अब नजरें इस बात पर हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक सुझाव को कब राष्ट्रीय मंच से आवाज देते हैं—और भारत कब सच में पढ़ने वाला राष्ट्र बनता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor