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Thursday, February 19, 2026, 12:25 pm

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केन्द्रीय ट्रेड यूनियन संगठन जोधपुर द्वारा चार लेबर कोड पर सेमिनार का आयोजन

मजदूर विरोधी पूंजीपति परस्त चार लेबर कोड के खिलाफ 12 फरवरी की आम हडताल सफल बनाने का आव्हान

शिव वर्मा. जोधपुर 

केन्द्रीय ट्रेड यूनियन संगठन द्वारा केन्द्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को समाप्त करते हुए चार लेबर कोड बनाने के खिलाफ श्चार लेबर कोड का मजदूरों तक वास्तविक एवम् व्यवहारिक दुष्प्रभावश विषय पर सेमिनार का आयोजन नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉइज यूनियन कार्यालय में आयोजित किया गया।

सेमिनार की अध्यक्षता नॉवेरेएयू के जोनल अध्यक्ष एवम् मण्डल मंत्री कॉ. मनोज कुमार परिहार, भारतीय ट्रेड यूनियन केन्द्र (सीटू), एआईडीईएफ के अशोक यादव ने की। सेमिनार में चार लेबर कोड पर बात रखते हुए सीटू जोधपुर के महामंत्री महिपाल सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पूंजीपतियों को मुनाफा दिलवाने की नीति के तहत 44 श्रम कानूनों के स्थान पर चार लेबर कोड बनाकर मजदूरों को गुलाम बनाने की नाकामयाब कोशिश की जा रही है। वेतन सहिंता में मजदूरों को वेतन एवं काम के आधार पर विभाजित करने की कोशिश की गई है, जिससे बडी संख्या में मजदूर श्रम सहिंताओं से बाहर हो जायेंगे।

वहीं कर्मचारी भविष्य नीधि ईएसआई एवम् ग्रेच्युटी के प्रावधानों में बदलाव कर मजदूरों को आर्थिक एवम् सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर कर दिया गया है। ट्रेड यूनियन बनाने के अधिकार मे भी संख्या के आधार पर हमला किया गया है। अब कम से कम 10 प्रतिशत या 10 मजदूर जो भी कम हो उनके सदस्य होने पर ही ट्रेड यूनियन बनाई जा सकेगी। साथ ही ट्रेड यूनियन के पंजीकरण को देने या रद्द करने की मनमानी शक्तियां रजिस्ट्रार को दी गई है। मजदूरों से हडताल का अधिकारी लगभग छीन लिया गया है चूंकि जहां पहले हडताल से 14 दिन पहले अधिकतम 60 दिन की सूचना देना अनिवार्य था। वही औद्योगिक सम्बन्ध सहिंता के अनुसार नोटिस देने पर सुलह प्रक्रिया के दौरान 07 दिन तक तथा मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान और उसके बाद 60 दिनों तक हडताल वैद्य रूप से जारी नही रह सकती। साथ ही अवैद्य हडताल करने पर मजदूरों पर भारी जुर्माने और कारावास के कठोर दण्ड का प्रावधान किया गया है। काम के घण्टों को 08 से 12 घण्टे कर दिया गया है। साथ ही निरीक्षक को सुविधाकर्ता बना दिया गया है जिसको कारखाना निरीक्षण करने के लिए नियोक्ता को पहले सूचित करना होगा जबकि पहले वह औचक निरीक्षण कर कार्यवाही कर सकता था। स्पष्ट तौर पर पहले जहां 100 मजदूरों तक छंटनी, कर्मचारी निकालने और कम्पनी बंदी की सूचना देना अनिवार्य नही था इस सहिंता में इसे 100 से बढाकर 300 मजदूरों की संख्या तक कर दिया गया है जिससे 70 प्रतिशत से अधिक औद्योगित प्रतिष्ठानों में भर्ती और बर्खास्तगी का शिकार आम मजदूर होगा। सहिंताओं में महिलाओं के लिए रात्री पारी का प्रावधान उनकी गरिमा एवं सुरक्षा पर सीधा हमला है। अतः मजदूरों को एकता कायम करते हुए आन्दोलन तेज करने की आवश्यकता है।

सेमिनार में बात रखते हुए कॉ. मनोज कुमार परिहार ने कहा कि केन्द्र सरकार संगठित एवम् असंगठित क्षेत्र में यूनियनों को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। भारतीय रेल जैसे बडे सार्वजनिक क्षेत्र को खत्म कर निजी हाथों में देने की कोशिश की जा रही है। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा लगातार केन्द्र एवम् राज्य सरकारों की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आन्दोलन किये जा रहे है। आज के दौर में मजदूरों को जाति-धर्म के आधार पर विभाजित कर रोटी, कपडा, मकान जैसे आवश्यक मुद्दों से ध्यान हटाकर आन्दोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

सेमिनार में एलआईसी की ओर से बात रखते हुए कॉ. गोविन्द रांकावत ने कहा कि केन्द्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण कर देश को बेरोजगारी की तरफ धकेलने का कार्य कर रही है। एलआईसी को कमजोर कर निजी बीमा कम्पनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है वहीं एलआईसी की सम्पतियों पर भी केन्द्र सरकार की नजर है। आगामी 12 फरवरी को मजदूरों की आम हडताल को सफल बनाने की आवश्यकता है।

सेमिनार को एआईडीईएफ के अशोक यादव, कॉमरेड जयराम खंगटा, प्रीतम सिंह ने भी सम्बोधित किया। सेमीनार का समापन सीटू जिला अध्यक्ष कॉ. उगराराम रलिया ने अध्यक्षीय भाषण के साथ किया एवम् आगामी 12 फरवरी की हडताल को सफल बनाने का आव्हान किया। सेमिनार में नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉईज यूनियन, सीटू, आरएमएसआरयू एवम् अन्य ट्रेड यूनियनों से जुडे मजदूरों ने भाग लिया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor