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Thursday, February 19, 2026, 12:46 pm

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मेहल शारदा का अरंगेत्रम नृत्य 17 जनवरी को

भगवान पंवार. जोधपुर 

भारतीय शास्त्रीय नृत्य की पावन परंपरा को संजोते हुए शिवम् नाट्यालय पुनः एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। संस्थान का 64वाँ अरंगेत्रम 17 जनवरी को सुबह 10 बजे कल्पवृक्ष पावटा मेन रोड सनसिटी अस्पताल के पास जोधपुर में आयोजित किया जा रहा है। अरंगेत्रम प्रतिभाशाली शिष्या मेहल शारदा द्वारा मंचस्थ किया जा रहा है।

मेहल शारदा राजमाता कृष्ण कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल की कक्षा सातवीं की एक मेधावी, अध्ययनशील एवं अनुशासित छात्रा हैं। वे शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करती रही हैं। अध्ययन के साथ-साथ उन्हें अबैकस का विधिवत ज्ञान है तथा वे तैराकी में भी दक्ष हैं। कला के अतिरिक्त साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी विशेष रुचि है। उन्होंने The Dreadful Nightmares तथा The Scar – Volume 1 नामक दो पुस्तकों का लेखन कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया है।

मेहल एक सुसंस्कृत एवं प्रेरणादायी परिवार से संबंध रखती हैं। उनकी माताजी श्रीमती मनीषा शारदा एक अत्यंत शिक्षित, विदुषी एवं समर्पित शिक्षिका हैं। पिताजी रवि शारदा एक परिश्रमी, कर्मठ एवं उद्यमशील व्यवसायी हैं। उनकी बड़ी बहन डॉ. मेहा शारदा, गीतांजलि, उदयपुर से दंत-चिकित्सा में स्नातक होकर एक सफल दंत चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं तथा मेहल के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं।

मेहल शारदा बचपन से ही नृत्य की लय, भाव तथा भावनात्मक अभिव्यक्ति से परिपूर्ण रही हैं। उनकी इस स्वाभाविक रुचि, श्रद्धा एवं समर्पण को पहचानते हुए उन्हें शिवम् नाट्यालय में गुरु डॉ. मंजूषा चन्द्र भूषण सक्सेना के सान्निध्य में भरतनाट्यम के विधिवत अध्ययन हेतु प्रविष्ट कराया गया। गुरु के स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन तथा सात वर्षों की कठोर, अनुशासित एवं निरंतर साधना के फलस्वरूप आज मेहल अपना अरंगेत्रम मंचस्थ कर रही हैं। यह क्षण न केवल उनकी व्यक्तिगत साधना, संकल्प और उपलब्धि का प्रतीक है, बल्कि उनके परिवार, गुरुजनों एवं शिवम् नाट्यालय के लिए भी अपार गर्व और आनंद का अवसर है। उनकी यह नृत्य-यात्रा भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध परंपरा, अनुशासन और भाव-सौंदर्य का सजीव प्रतिबिंब है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor