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Sunday, August 23, 2026, 7:46 am

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Lifestyle

मिट्टी सुधरेगी, तो फसल निखरेगी: अदाणी एग्री फ्रेश का सेब बागवानों के लिए सॉइल टेस्टिंग कैंपेन

– हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के लिए 5 जनवरी से 22 जनवरी तक रोहड़ू, सेंज और रामपुर में चरणबद्ध तरीके से कैंपेन
– बेहतर और संतुलित खेती के लिए किसानों को खाद डालने से पहले मिट्टी की वैज्ञानिक जाँच कर दी जा रही पोषक तत्वों की सही जानकारी

राखी पुरोहित. शिमला

हिमाचल प्रदेश के सेब बागवान पिछले कुछ वर्षों से लगातार बदलते मौसम, कम चिलिंग आवर्स, अनियमित बारिश और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इन हालातों का सीधा असर न सिर्फ पैदावार पर पड़ा है, बल्कि सेब की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। ऐसे समय में मिट्टी की सेहत किसानों के लिए सबसे बड़ा सहारा बन सकती है। इसी विचार के साथ अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड द्वारा प्रदेश में सॉइल टेस्टिंग कैंपेन चलाया जा रहा है, जिसमें किसानों को यह समझाया जा रहा है कि खाद और उर्वरक डालने से पहले मिट्टी की जाँच क्यों जरूरी है और इससे फसल की गुणवत्ता कैसे बेहतर हो सकती है, क्योंकि जब मिट्टी स्वस्थ होगी, तभी फसल भी बेहतर होगी।

कैंपेन की शुरुआत 5 जनवरी से सेंज से हुई जो कि 12 जनवरी तक चला। इसके बाद रोहड़ू में 13 से 18 जनवरी और रामपुर में 18 से 22 जनवरी तक यह कैंप लगाया जाना तय है। इस पूरे कैंपेन में 3 से 4 हजार से अधिक किसानों के शामिल होने की उम्मीद है।

इस अभियान के दौरान सॉइल टेस्टिंग से जुड़े विशेषज्ञ, लैब टेक्नीशियन, नौनी यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिक और प्लांट पैथोलॉजी एक्सपर्ट्स किसानों से सीधे संवाद कर रहे हैं। किसानों को यह जानकारी दी जा रही है कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है, किस तरह की खाद की जरूरत है, सही प्रूनिंग कैसे करें और मिट्टी की सेहत कैसे बनाए रखें, ताकि सेब की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके।

गौरतलब है कि अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड लंबे समय से हिमाचल के सेब बागवानों के साथ ज़मीनी स्तर पर जुड़कर काम करता आ रहा है। खरीद सीज़न के दौरान लगातार सेब की खरीदी हो या किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देना, कंपनी की कोशिश रही है कि किसान सिर्फ आज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में भी टिकाऊ खेती कर सकें। एएएफएल इससे पहले भी नवंबर माह में इसी तरह का सॉइल टेस्टिंग कैंपेन चला चुका है, जिसे किसानों से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। कई किसानों का कहना है कि मिट्टी की जाँच के बाद उन्होंने खाद के इस्तेमाल में बदलाव किया, जिससे फसल की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला।

अदाणी एग्री फ्रेश का यह कैंपेन सिर्फ मिट्टी की जाँच तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे किसानों को लंबे समय तक टिकाऊ और वैज्ञानिक खेती की दिशा में मार्गदर्शन देने की एक ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor