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Sunday, August 23, 2026, 7:46 am

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शिक्षा, सेवा, संस्कार की ज्योत आज भी प्रज्वलित… छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति वितरित की, जरूरतमंदों को राशन सामग्री दी

मधु मां ने कहा कि युग प्रवर्तक नंदकिशोर शारदा बहुत ही ब्रिलिएंट स्टूडेंट थे। उनके चार-चार सब्जेक्ट में डिस्टेंक्शन मार्क्स थे। उनका इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन हो चुका था। पर जब उनके पिताजी की आकस्मिक मृत्यु हो गई तो उन्हें लगा कि जीवन क्षणभंगुर है। मैं कितना भी कमा लूं, यहीं छोड़कर जाना है। मेरे पिताजी भी मुझे छोड़कर नहीं जाना चाहते थे, मगर उन्हें जाना पड़ा। नंदकिशोर जी ने जब सोचा कि वो कौनसी शक्ति थी जो पिताजी को चलायमान रखे हुए थी। उनके मन में आया कि वे उस शक्ति की खोज करके रहेंगे। वे चूंकि शोध विद्यार्थी थे तो उन्होंने ठान लिया कि वे ईश्वरी शक्ति को खोज कर ही रहेंगे।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

अध्यात्म में बड़ी शक्ति होती है। जो भूमि अध्यात्म से पुष्पित-पल्लवित होती है वहां हर कार्य शुचिता, सादगी और पवित्रता से संपन्न होते हैं। जहां उद्देश्य मानवता से प्रेरित होता है वहां राह स्वत: निकलती है। युग प्रवर्तक श्री नंदकिशोर शारदा ने आध्यात्मिक जीवन को जिया है। उन्होंने अपनी आध्यात्मिक साधना से साक्षात ईश्वर के दर्शन किए और बताया कि ईश्वर को कैसे प्राप्त किया जा सकता है। बात जब युग प्रवर्तक श्री नंदकिशोर शारदा की चली है तो उनकी आध्यात्मिक साधना को नमन करने का मन होता है।

जय मां भैया जी की जगत जननी मां, शिव बाबूजी एवं मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से युगप्रवर्तक श्री नंदकिशोर शारदा मिशन विश्व बंधुत्व, विश्व शांति एवं मानव कल्याण के अंतर्गत ज्ञान योगी श्री नंदकिशोर शारदा अध्यात्म केंद्र द्वारा राशन वितरण किया गया और छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित की गई। इसी तरह स्वामी विवेकानंद स्टूडेंट वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा बालिकाओं को छात्रवृत्ति वितरण का कार्यक्रम शनिवार 17 जनवरी को ईशकृपा धाम में रखा गया। कार्यक्रम का संचालन श्री नवल शारदा ने किया। उन्होंने सफल संचालन कर बालिकाओं को बारी-बारी से छात्रवृत्ति के चेक अतिथियों के हाथों वितरित करवाए।

इन लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही : 

इस अवसर पर श्री राजेश, श्री नरेश जाजड़ा अपने परिवार के साथ मौजूद थे। श्री शिवरतन मानधना , श्री नवरत्न मानधना,  श्री वासु राठी, श्री अरुण जैसलमेरिया, श्री कमल जैसलमेरिया, श्री प्रदीप चौधरी, श्री कुलदीप सांखला, श्री दिलीप पुरोहित, श्रीमती विमला मारडिया, श्री चेतन सोनी, श्री नंदकिशोर फोफलिया, श्री नरेंद्र माहेश्वरी, श्री गोपाल सोनी इत्यादि कार्यक्रम में शामिल हुए। 270 से अधिक परिवारों को खाद्य सामग्री वितरित की गई।

युग प्रवर्तक नंदकिशोर शारदा ने अपनी साधना से ईश्वरीय शक्ति का साक्षात्कार किया : मधु मां

मधु मां ने कहा कि युग प्रवर्तक नंदकिशोर शारदा बहुत ही ब्रिलिएंट स्टूडेंट थे। उनके चार-चार सब्जेक्ट में डिस्टेंक्शन मार्क्स थे। उनका इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन हो चुका था। पर जब उनके पिताजी की आकस्मिक मृत्यु हो गई तो उन्हें लगा कि जीवन क्षणभंगुर है। मैं कितना भी कमा लूं, यहीं छोड़कर जाना है। मेरे पिताजी भी मुझे छोड़कर नहीं जाना चाहते थे, मगर उन्हें जाना पड़ा। नंदकिशोर जी ने जब सोचा कि वो कौनसी शक्ति थी जो पिताजी को चलायमान रखे हुए थी। उनके मन में आया कि वे उस शक्ति की खोज करके रहेंगे। वे चूंकि शोध विद्यार्थी थे तो उन्होंने ठान लिया कि वे ईश्वरी शक्ति को खोज कर ही रहेंगे। उनके मन में यह विचार था कि जो शक्ति मनुष्य को चलायमान रखती है वह मृत्यु के बाद कहां चली जाती है। वे इसकी खोज में लगे रहे। इसके लिए वे साधु-संतों के पास गए। मगर उन्हें संतुष्टि नहीं मिली। वे जादूगरों के पास गए। भोपा-भोपी के पास गए। मगर कहीं उन्हें संतुष्टि नहीं मिली। फिर उन्होंने खुद ही इस शक्ति को खोजने का निर्णय लिया। वे लगातार साधना में लगे रहे और आखिर उन्होंने मृत्यु के बाद के अलौकिक संसार को देखा और अपनी पुस्तक में इसे विस्तार से लिखा। वाकई नंदकिशोर जी शारदा जैसे व्यक्ति धरती पर कभी कभी जन्म लेते हैं। नंदकिशोर जी शारदा आध्यात्मिक शक्ति से ओतप्रोत थे। हम उन्हें नमन करते हैं।

मणिद्वीप शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी देता है : प्रो. वीके भंसाली

मैं मणिद्वीप से 10 साल से जुड़ा हूं। यह ऐसा परिवार है जो निस्वार्थ भाव से विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देता है। मणिद्वीप में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी मिलते हैं। अगर छात्राओं में पढ़ने की इच्छा है तो मणिद्वीप उनकी मदद करता है। छात्राओं को आत्मविश्वास भी मिलता है। कोई भी छात्रा अर्थ अभाव में शिक्षा से वंचित ना रहे ऐसा प्रयास रहता है। साथ ही जरूरतमंद परिवारों को अन्न वितरण भी किया जाता है।

मणिद्वीप में सभी हंसते-मुस्काते लोग मिलेंगे : चंद्रशेखर चौहान

मणिद्वीप से 15 साल से जुड़ा हुआ हूं। यह एक परिवार है। यहां सभी हंसते-मुस्काते लोग मिलेंगे। यहां बहुत ही अच्छा कार्य हो रहा है। पहले मां बसंती जी कार्य देखती थी। अब मधु मां कार्य देख रही हैं। मां बसंती जी कहा करती थी कि अपने सद्गुणों को विकास कीजिए। वाकई मणिद्वीप आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण भूमि है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor