राखी पुरोहित. जोधपुर
निर्मल गहलोत चेरिटेबल फाउंडेशन के भवन रक्तशाला में रविवार को आयोजित टाईम बैंक ऑफ इंडिया सरदारपुरा चेप्टर की मासिक बैठक सामाजिक सरोकार, संवेदना और समयदान की भावना का सशक्त उदाहरण बनी। इस अवसर पर चेप्टर से जुड़े पचास से अधिक सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में अनुबंध वृद्धजन कुटीर की संस्थापक एवं विगत 25 वर्षों से वृद्धजनों की निःस्वार्थ सेवा में समर्पित श्रीमती अनुराधा आडवाणी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। बैठक के आरंभ में टाईम बैंक की सदस्या श्रीमती शोभा आंचलिया एवं अन्य सदस्यों द्वारा श्रीमती आडवाणी का आत्मीयता एवं गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
चेप्टर के एडमिन रवि सुराणा ने अपने उद्बोधन में टाईम बैंक कॉन्सेप्ट की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि टाईम बैंक एक ऐसा सामाजिक मंच है, जहाँ पैसे से नहीं, समय से सेवा की जाती है। उन्होंने कहा कि सरदारपुरा चेप्टर का मूल मंत्र “हम शोर नहीं करते हैं, सेवा करते हैं” केवल एक नारा नहीं, बल्कि व्यवहार में उतर चुकी जीवन-शैली है।
सुराणा ने बताया कि टाईम बैंक के सदस्य बुजुर्गों, बीमारों, अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों एवं जरूरतमंदों को अपना समय देकर सहयोग करते हैं और बदले में सेवा का अनुभव ही उनकी पूँजी बनता है। उन्होंने अपने उद्बोधन में श्रीमती अनुराधा आडवाणी के जीवन के पच्चीस वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने वृद्धाश्रम को सहानुभूति का नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और गरिमा का घर बनाया है। अपने उ्द्बोधन में श्रीमती अनुराधा आडवाणी ने वृद्धजनों की सेवा के व्यावहारिक पक्षों पर गहनता से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वृद्धों को दया नहीं, सम्मान और अपनापन चाहिए। सेवा का सबसे बड़ा रूप यह है कि हम उनकी गरिमा को ठेस न पहुँचाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि बुजुर्ग किसी पर बोझ नहीं होते, बल्कि वे समाज की जीवित विरासत हैं। अपने संबोधन के दौरान श्रीमती आडवाणी ने जीवन से जुड़े कई हृदयस्पर्शी संस्मरण साझा किए, जिससे पूरा सभागार भाव-विभोर हो उठा। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लोकप्रिय टीवी शो “कौन बनेगा करोड़पति” से जुड़े कुछ अनुभव भी साझा किए, जहाँ उन्हें समाजसेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि उस मंच पर जो सम्मान मिला, वह वास्तव में उन सभी बुजुर्गों का सम्मान था, जिनके साथ उनका जीवन जुड़ा हुआ है।
लगभग दो घंटे तक चले इस संवादात्मक कार्यक्रम में कई सदस्यों ने श्रीमती आडवाणी से वृद्ध सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने अत्यंत सरल, रोचक और व्यावहारिक ढंग से उत्तर दिया। इस मौके पर श्रीमती आडवाणी ने बताया कि उनके अनुबंध में रह रहे सभी वृद्धजनों की जीवन की सच्ची कहाननियों पर आधारित यथार्थ से परिचय पुस्तक के बारे में जानकारी दी।
इस अवसर पर वृद्धजन कुटीर संस्थान के संस्थापक सदस्यों में से एक एवं श्रीमती आडवाणी के जीवनसाथी श्री नरेंद्र आडवाणी ने कहा कि आज के दौर में बच्चे न होने पर हम जब बच्चे को गोद ले सकते है तो हम पेरेंट्स को गोद क्यों नहीं ले सकते हैं अगर हम पेरेंट्स को गोद लेने में आगे आयेंगे तो आने वाले समय में वृद्धा श्रम खुलने बंद हो जाएंगे । श्रीमती आडवाणी ने प्रश्न के जवाब में कहा कि उनकी माताजी श्रीमती विमला मेहता और श्री नरेंद्र आडवाणी का सतत सहयोग, मार्गदर्शन और पारिवारिक संबल ही इस सेवा-यात्रा की मजबूत नींव है। वे न केवल संस्थान के संस्थापक सदस्य हैं, बल्कि हर कठिन समय में वृद्धजनों के लिए ढाल बनकर खड़े रहते हैं।
कार्यक्रम में राजस्थान आई बैंक सोसायटी के श्री राजेन्द्र जैन, समाज सेवी सुधीर शारदा, सेवानिवृत्त विद्युत बोर्ड पूर्व निदेशक श्री एस. एल. माथुर, डॉ. रवि गुप्ता, श्री मोहन सिंह मेहता, श्रीमती कंचन सर्राफ, सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी श्री धीरेंद्र सिंघवी, एडवोकेट अनिल लिंबा, समाजसेवी श्री राजेश सिंघवी, सेवा निवृत बैंक अधिकारी श्री के के मोहनोत, श्रीमती कमलेश सुराणा, श्रीमती मधु भंडारी, श्रीमती भूमिका सिंघवी, मधु जैन, अक्षय जांगिड़, अमित व्यास, श्रीमती रतन सोनी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन अत्यंत सादगी एवं सौम्यता के साथ फॉर्च्यून ग्रुप के निदेशक श्री मनीष मेहता ने किया, जिसकी सभी ने सराहना की।
यह आयोजन न केवल एक बैठक थी बल्कि यह संदेश भी था कि यदि समाज को संवेदनशील बनाना है, तो सेवा को समय से जोड़ना होगा-और यही टाईम बैंक की सबसे बड़ी ताकत है।













