सोहनी देवी काबरा नारी सशक्तिकरण अभियान के माध्यम से आत्मनिर्भर मेड़ता सिटी की ओर एक मजबूत कदम
जोधपुर। मेड़ता सिटी में सामाजिक परिवर्तन की एक ऐसी कहानी लिखी जा रही है, जो न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रही है। इस कहानी के केंद्र में हैं वरिष्ठ समाजसेवी और सफल उद्यमी डॉ. रामानंद काबरा, जिन्होंने अपनी माताजी की उपस्थिति में सोहनी देवी काबरा नारी सशक्तिकरण अभियान की स्थापना कर महिलाओं और बालिकाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई रोशनी जगाई है। यह अभियान केवल एक संस्था नहीं, बल्कि उन महिलाओं और बालिकाओं के लिए एक परिवार है जो हैं आगे बढ़ना चाहती हैं, जिसमे हौसला हैं, जिनके पास इच्छा शक्ति हैं, लेकिन संसाधन नहीं हैं। डॉ. रामानंद काबरा का मानना है कि जब महिलाओं को हुनर, सम्मान और अवसर मिलता है, तो वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए परिवर्तन की वाहक बन जाती हैं। सिलाई-कढ़ाई से लेकर कंप्यूटर, ग्राफिक डिज़ाइन, ई-मित्र सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोज़गार तक—यह संस्था हर स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है। मेड़ता सिटी को आदर्श शहर बनाने का उनका सपना केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस योजनाओं और ज़मीनी कार्यों के माध्यम से साकार हो रहा है। यह इंटरव्यू उसी दूरदृष्टि, समर्पण और करुणा की कहानी है, जो समाज को नई दिशा देने का साहस रखती है।
इंटरव्यू: रामानंद काबरा से विशेष बातचीत
प्रश्न 1: सबसे पहले हमें बताइए कि सोहनी देवी काबरा नारी सशक्तिकरण अभियान की स्थापना का विचार आपको कैसे आया?
डॉ. रामानंद काबरा: मेरी माताजी सोहनी देवी का मानना है कि समाज की असली ताकत उसकी महिलाएं होती हैं। मैंने अपने जीवन में देखा कि कितनी महिलाएं परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को छोड़ देती हैं—कभी विधवा होने के कारण, कभी परिवार के सहारे के बिना। कभी आर्थिक स्थिति के कारण या कभी संसाधन नहीं होने के कारण… मुझे लगा कि अगर हम उन्हें सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सम्मान दे सकें, तो वे खुद अपनी और समाज की तस्वीर बदल सकती हैं। इसी सोच से इस अभियान की शुरुआत हुई।
प्रश्न 2: आपकी संस्था किन-किन महिलाओं और बालिकाओं के लिए काम करती है?
डॉ. रामानंद काबरा: हमारा मुख्य फोकस उन तमाम महिलाओं और बालिकाओं पर है, जो एक रौशनी की किरण के इंतजार में हैं, सिंगल हैं, या प्रेरणा का वातावरण नहीं हैं या जिनका कोई पारिवारिक सहारा नहीं है। हम उनके लिए अभिभावक की भूमिका निभाते हैं। हमारा उद्देश्य है कि वे आत्मनिर्भर बनें, अपने पैरों पर खड़ी हों और सम्मान के साथ जीवन जिएं।
प्रश्न 3: मेड़ता सिटी में आपकी संस्था के तहत कौन-कौन से प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं?
डॉ. रामानंद काबरा: हमने यहां सिलाई प्रशिक्षण केंद्र, कुकिंग क्लास, केक और बेकरी कोर्स, चॉकलेट और आइसक्रीम प्रशिक्षण, एंकरिंंग और कोरियोग्राफी क्लास, ब्यूटी पार्लर कोर्स, मेहंदी क्लास, कंप्यूटर बेसिक कोर्स, जीएसटी, टैली और ग्राफिक डिज़ाइन जैसे कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसके अलावा ई-मित्र सेवाओं का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे महिलाएं लोगों को सरकारी सेवाओं ओर लाभों से जोड़कर उनका एवं अपना हित चिंतन कर सकें।
प्रश्न 4: ई-मित्र प्रशिक्षण के बाद हमने सुना हैं आपने बालिकाओं और महिलाओं को लैपटॉप गिफ्ट किये, यह विचार कैसे आया?
डॉ. रामानंद काबरा: मैंने देखा कि कई महिलाएं बहुत मेहनत करती हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उन्हें आगे बढ़ने से रोकती है। हमने बालिकाओं के मध्य एक लक्ष्य रखा कि जो बालिका 30 नये आधार कार्ड या आयुष्मान कार्ड जैसे कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लाएगी उन्हें लैपटॉप देकर सम्मानित करेंगे और हमने उन्हें लैपटॉप देकर सम्मानित भी किया । देखते देखते ही देखते 21 बालिकाओं ने इसे पूरा किया, इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, उनको समाज कल्याण विभाग में केबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत के हाथ से लैपटॉप दिलवाकर डिजिटल दुनिया से जोड़ा।
प्रश्न 5: महिलाओं को रोजगारोन्मुख कराने में आपकी क्या भूमिका रहती है?
डॉ. रामानंद काबरा: जैसे सिलाई प्रशिक्षण के पश्चात जो बालिका या महिला मशीन मैनेज़ कर लेती हैं, तो ठीक, लेकिन नहीं ले पाए तो हम उसकी मदद के लिए खडे हैं। इसी तरह हमने अपने सेंटर में सिलाई संबंधित मशीनों के एडवांस वर्जन लगा रखे हैं, जो यंहां आकर निःशुल्क अपना काम करके जा सकती हैं। यह केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की चाबी है। हम चाहते हैं कि महिलाएं अपने घर से ही काम शुरू कर सकें। जब वे अपने हाथों से कमाई करती हैं, तो उनके चेहरे पर जो आत्मसम्मान की चमक आती है, वही हमारे लिए सबसे बड़ी सफलता है।
प्रश्न 6: आपने जल संकट के समय निशुल्क टैंकर सेवा शुरू की, इसके पीछे क्या सोच थी?
डॉ. रामानंद काबरा: पानी जीवन है। मई-जून में जब पानी की किल्लत होती है, तो गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और यह समस्या महिलाओ को झेलनी पड़ती हैं। मैंने तय किया कि एक फोन पर निशुल्क उस मोहल्ले में टैंकर पहुंचाया जाएगा, ताकि कोई प्यासा न रहे। यह हमारी हर समस्या पर महिलाओ के साथ खडे रहने की भावना है।
प्रश्न 7: आपने 51 जोड़ों की सामूहिक शादी करवाई, वह अनुभव कैसा रहा?
डॉ. रामानंद काबरा: वह मेरे जीवन के सबसे भावुक क्षणों में से एक था। अपने भाई के बेटे की शादी की वर्षगांठ पर मैंने सोचा कि क्यों न इस खुशी को समाज के साथ बांटा जाए। 51 जोड़ों की निशुल्क शादी करवा कर मुझे लगा कि मैं सच्चे अर्थों में कुछ सार्थक कर पाया।
प्रश्न 8: शिक्षा के क्षेत्र में आपकी संस्था क्या योगदान दे रही है?
डॉ. रामानंद काबरा: हम गणित और अंग्रेजी के कोर्स चला रहे हैं। एक कंपनी के साथ एमओयू किया है ताकि JEE और NEET की ऑनलाइन फ्री तैयारी करवाई जा सके। हमारा मानना है कि शिक्षा ही वह साधन है, जिससे समाज का भविष्य बदला जा सकता है।
प्रश्न 9: आपने 6000 स्क्वायर फीट का हॉल बनवाया है, इसका उद्देश्य क्या है?
डॉ. रामानंद काबरा: यह हॉल महिलाओं के लिए स्वरोजगार उद्योग प्रशिक्षण केंद्र बनेगा। यहां विभिन्न छोटे-छोटे उद्योग लगाए जाएंगे, ताकि महिलाएं प्रशिक्षण के बाद अपनी क्षमता और पसंद के अनुसार अपना काम अपने घर से शुरू कर सकें। हमारा सपना है कि यह हॉल आत्मनिर्भरता का एक ऐसा राष्ट्रीय केंद्र बने। जंहा विभिन्न शहरों से संग़ठनों के माध्यम से महिला आकर प्रशिक्षण ले, अपने गांव शहर, मोहल्ले में यह कार्य कर सकें।
प्रश्न 10: होम केयर प्रॉडक्ट्स या अन्य क्या क्या उत्पाद बनाने की अपनी योजना के बारे में बताइए।
डॉ. रामानंद काबरा: हमने पहले सभी को सर्फ, हैंडवॉश, डिटर्जेंट, टॉयलेट क्लीनर, ग्लास क्लीनर, शैम्पू, फिनाइल, नहाने का साबुन जैसे उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी थी। लेकिन इसे क़ोई भी महिला शूरू नहीं कर सकी। हमने अध्ययन किया और पाया की इतनी सारी चीज़ों, विभिन्न कैमिकल , पैकेजिंग के अलग अलग सामान, लेबलिंग, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज, मार्केटिंग, इन्वेस्टमेंट संबंधित तमाम कार्य उनके द्वारा घर से अकेले करना संभव नहीं था। अंत इन तमाम समस्याओ का एक छत के नीचे समाधान देने के लिए यह उत्पाद हमारे शेड में बनेंगे और लागत मूल्य पर उनको उपलब्ध कराया जाएगा और हर महिला अपनी पहुंच के दायरे तक अपने काम का विस्तार कर सकेगी और अपने व्यापार और मुनाफे में इजाफा कर सकेंगी। उनका अपना क़ोई फिक्स इन्वेस्टमेंंट नहीं होगा और वो अपने घर की चारदीवारों के भीतर ही यह कर सकेंगी।
प्रश्न 11: कोल्ड प्रेस ऑयल मिल और सोया प्रॉडक्ट्स डीह्यड्रेटेड फ्रूट्स, मसालाँ आदि की आपकी बहुत सी योजनाए हैं वो कैसे और कब शुरू होंगी?
डॉ. रामानंद काबरा: हमारे औद्योगिक शेड में हम सभी मशीनों के माध्यम से उत्पादन करेंगे। अब जो इसको अपने घर परिवार से शुरू करना चाहेंगी। उनको हमारी हर तरफ़ की हर संभव मदद रहेगी। हम शुद्धता, गुणवत्ता, स्वास्थ्य वर्धन उत्पादों में विश्वास करते हैं। महिलाएं बादाम, तिल, मूंगफली, नारियल और सरसों का तेल निकालेंगी। साथ ही सोया मिल्क और सोया पनीर बनाकर व्यवसाय करेंगी। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलेगा और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद बाजार में आएंगे।
प्रश्न 12: ब्रांड वैल्यू बनाने पर आप इतना जोर क्यों देते हैं?
डॉ. रामानंद काबरा: अगर हम गुणवत्ता से समझौता नहीं करेंगे, तो हमारा ब्रांड खुद पहचान बनाएगा। जैसे लिज्जत पापड़ और अमूल ने किया, वैसे ही हम भी महिलाओं के बनाए उत्पादों को एक मजबूत ब्रांड बनाएंगे और हमारा ब्रांड का नाम हमने नारी गौरव तय किया हैं। यह एक विश्वास का प्रतीक बनेगा।
प्रश्न 13: फाइनेंशियल सपोर्ट के लिए आपकी क्या रणनीति है?
डॉ. रामानंद काबरा: हम कंपनियों के सीएसआर फंड से, सरकारी योजनाओं और माइक्रो फाइनेंस और महिला उद्यमी को सपोर्ट करने वाली योजनाओं से मशीनें और संसाधन जुटाएंगे। महिलाओं को बिना गिरवी के लोन दिलवाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।हम वित्तीय सालाहकारों से सम्पर्क में हैं, सरकारी योजनाओं का भी अध्ययन कर रहे हैं, हम उनके लिए एक अभिभावक के रूप में जितना कर सकते हैं, उससे अधिक करने का मन रखते हैं।
प्रश्न 14: स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपकी संस्था का योगदान क्या है?
डॉ. रामानंद काबरा: हम आंखों और घुटनों का निशुल्क इलाज के नियमित कैंप करवाते हैं। भविष्य में हार्ट और अन्य गंभीर बीमारियों के लिए भी काम करेंगे। हम सरकार और भामाशाहों के बीच सेतु बनकर काम करते हैं और आम आदमी महिला को लाभ पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
प्रश्न 15: सरकारी योजनाओं से लोगों को जोड़ने में आपकी संस्था की क्या भूमिका है?
डॉ. रामानंद काबरा: आज सरकार ने जन कल्याण के लिए सैकड़ों योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन लोगों को पता ही नहीं हैं। हम विभिन्न योजनाओं के निःशुल्क कार्ड बनाने के लिए शिविर लगाते हैं, ताकि कोई भी सरकारी सुविधा से वंचित न रहे। हमारा मानना हैं सभी सामाजिक संगठन अपने स्तर पर इसका लाभ घर घर पहुंचाएं।
प्रश्न 16: सरकारी स्कूलों के बारे में आपने क्या विचार हैं?
डॉ. रामानंद काबरा: सरकारी स्कूलों में बहुत ही सक्षम अध्यापकों के हाथों में देश का भविष्य हैं, परन्तु कुछ गैर जिम्मेवार अध्यापकों के कारण अन्य साथी अध्यापक भी अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं करते हैं। कभी कभी छोटी छोटी चीज़ों की कमी से बच्चे अपने हक से वंचित रह जाते हैं। अभी हमने बहुत सैकंडरी स्कूलों में विजिट किया, बहुत सामान्य मगर मूलभूत बातों के कारण सरकारी स्कूलों के बच्चों के साथ घोर अन्याय हो रहा हैं, लाइट नहीं हैं, पंखे खराब हैं, कम्प्यूटर सिस्टम खराब पड़े हैं, लैब में पूरे सामान नहीं हैं, स्पोर्ट्स के नाम पर कुछ नहीं होता हैं। इन तमाम बातों के लिए मेरा प्रयास हैं कि इसे जनता केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़े, यह अपना दायित्व समझें और जरा सी अपनी मदद से बच्चोंं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता हैं तो यह हम नागरिकों का, उस स्कूल से पढ कर निकले छात्रों का भी दायित्व बनता हैं। हमने कई स्कूलों में कंप्यूटर लैब, प्रयोगशाला और फर्नीचर दुरुस्त करवाए हैं। हमारा लक्ष्य है कि बच्चे सुविधाओं की कमी के कारण स्कूल न छोड़ें और जो निजी स्कूलों के बच्चों से संसाधनों के कारण पीछे नहीं रहें।
प्रश्न 17: ड्रॉपआउट बच्चों को रोकने के लिए आपकी क्या योजना है?
डॉ. रामानंद काबरा: हम स्कूलों में माहौल बेहतर बनाना चाहते हैं, ताकि बच्चे वहां रहना पसंद करें। शिक्षा से ही समाज आगे बढ़ता है। उनको प्रोत्साहन और माहौल की जरूरत हैं।
प्रश्न 18: महिलाओं की भूमिका को वर्तमान में आप कैसे देखते हैं?
डॉ. रामानंद काबरा: महिलाएं और बालिकाएं दुनिया बदल सकती हैं। समाज की सफलता उनके हाथों में है। अगर वे मजबूत होंगी, तो पूरा देश मजबूत होगा। यदि चीन आज हमसे बहुत आगे हैं तो उस देश ने अपनी महिला शक्ति और मेधा का सम्पूर्ण उपयोग अपने देश के विकास के लिए लिया हैं।
प्रश्न 19: मेड़ता सिटी को एक आदर्श शहर देखने का आपका सपना क्या है?
डॉ. रामानंद काबरा: मैं चाहता हूं कि मेड़ता सिटी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्वच्छता में मिसाल बने। यहां की हर महिला आत्मनिर्भर हो, हर बच्चा शिक्षित हो और हर परिवार सम्मान के साथ जीवन जिए और महिलाओ और बालिकाओं की राह में आने वाली हर बाधाओं से हम जूझने और उससे आगे निकलने के लिए हम हर स्तर तक तैयार हैं।
प्रश्न 20: महिलाओं और बालिकाओं के साथ समाज के लिए आपका संदेश क्या है?
डॉ. रामानंद काबरा: समाज की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। अगर हर व्यक्ति थोड़ा-सा भी योगदान दे, तो हम मिलकर एक बेहतर भारत बना सकते हैं।
नीयत साफ हो तो कोई भी काम असंभव नहीं :
नीयत साफ हो तो कोई भी काम असंभव नहीं। आज सामाजिक कार्यकर्ता होने का मतलब समाज की मीटिंगो में भाग लेने से नहीं हैं, हमको विभिन्न विकास और उत्थान कार्यक्रमों को चिन्हित कर उनके क्रियान्वयन के प्रयास करने चाहिये। रामानंद काबरा की यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है, जो समाज को नई दिशा देने का साहस रखती है। सोहनी देवी काबरा नारी सशक्तिकरण अभियान के माध्यम से वे साबित कर रहे हैं कि अगर नीयत साफ हो और उद्देश्य बड़ा हो, तो बदलाव अवश्य संभव है। मेड़ता सिटी आज जिस राह पर चल रही है, वह आने वाले समय में पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकती है।









