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Thursday, April 30, 2026, 8:42 pm

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बसंत पंचमी और आपका स्वास्थ्य

लेखक :शिव सिंह
9784092381

यह केवल एक धार्मिक त्योहार ही नहीं है, बल्कि इसका हमारी सेहत और आयुर्वेद से बहुत गहरा संबंध है। यह ऋतुओं के मिलन (ऋतु संधि) का समय है, जब सर्दियों का अंत और वसंत का आगमन होता है।

​यहाँ बसंत पंचमी और हमारे स्वास्थ्य के बीच के मुख्य संबंधों को समझाया गया है:

​1. आयुर्वेद और “कफ” का संतुलन
​सर्दियों के दौरान हमारे शरीर में कफ (भारीपन और म्यूकस) जमा हो जाता है। जैसे ही सूरज की गर्मी बढ़ती है, यह कफ “पिघलने” लगता है।

* ​डिटॉक्स (Detox): इस समय शरीर को शुद्ध करना जरूरी होता है। अगर ध्यान न दिया जाए, तो यही कफ सुस्ती, खांसी या एलर्जी का कारण बनता है।

* ​व्यायाम: आयुर्वेद के अनुसार, वसंत ऋतु में शरीर को सक्रिय रखना चाहिए। सुबह की ताजी हवा में टहलना और योग करना जमा हुए कफ को बाहर निकालने में मदद करता है।

​2. पीले रंग के भोजन का महत्व:

​बसंत पंचमी पर पीले रंग के कपड़े पहनने और पीला भोजन करने की परंपरा है। इसके पीछे छिपे स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार हैं:

* ​हल्दी और केसर: इस दिन बनने वाले पकवानों (जैसे मीठे चावल या खिचड़ी) में हल्दी और केसर का उपयोग होता है। ये दोनों ही एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले होते हैं।

* ​पोषक तत्व: पीले रंग के फल और सब्जियाँ (जैसे नींबू, कद्दू, पपीता) विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

* ​हल्का भोजन: इस दौरान भारी और तली-भुनी चीजों की जगह हल्का और सुपाच्य भोजन (सात्विक आहार) लेने की सलाह दी जाती है ताकि पाचन तंत्र मजबूत रहे।

​3. मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता
​बसंत पंचमी माँ सरस्वती (ज्ञान और विद्या की देवी) का दिन है।

* ​मानसिक स्पष्टता: यह त्योहार नई शुरुआत और रचनात्मकता का प्रतीक है। सर्दियों के आलस के बाद, यह समय दिमाग को नई ऊर्जा और फोकस देने का होता है।

* ​धूप का प्रभाव: बसंत में धूप तेज होने लगती है, जिससे शरीर को पर्याप्त विटामिन-डी मिलता है। यह “विंटर ब्लूज़” (सर्दियों की उदासी) को दूर कर मूड को बेहतर बनाता है।

एक छोटी सी सलाह :इस मौसम में सुबह उठकर गुनगुने पानी में थोड़ा शहद और अदरक का रस मिलाकर पीना कफ को संतुलित करने का सबसे अच्छा तरीका है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor