राइजिंग भास्कर की पहल — पत्रकार परिवारों के भविष्य को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम
कलम की ताकत, लेकिन कलमकार की मजबूरी
दिलीप कुमार पुरोहित | जोधपुर
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पत्रकार वह है जिसकी कलम भ्रष्टाचार के किले हिला देती है, जिसकी आवाज़ से सत्ता के गलियारों में हलचल मच जाती है, और जिसकी सच्चाई समाज को नई दिशा देती है। लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ देश की आत्मा का प्रहरी है। लेकिन विडंबना यह है कि जो पत्रकार समाज के अधिकारों के लिए लड़ता है, वह अक्सर अपने और अपने परिवार के अधिकारों के लिए लड़ने में असहाय रह जाता है।
बीमारी, दुर्घटना, आर्थिक संकट या बच्चों की उच्च शिक्षा — ये सभी ऐसी चुनौतियाँ हैं, जिनके सामने एक आम पत्रकार खुद को अकेला महसूस करता है। अधिस्वीकृत पत्रकारों को कुछ सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिलता है, लेकिन देश और शहर की पत्रकारिता की रीढ़ कहे जाने वाले गैर-अधिस्वीकृत पत्रकार आज भी इन योजनाओं से बाहर हैं।
इसी सामाजिक असमानता और पत्रकार परिवारों की पीड़ा को समझते हुए राइजिंग भास्कर एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है —“पत्रकार पुत्र-पुत्री उच्च शिक्षा सहयोग कोष” की स्थापना। यह कोष सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि पत्रकार परिवारों के भविष्य में निवेश होगा। यह उस भरोसे का प्रतीक होगा कि समाज अपने प्रहरी को अकेला नहीं छोड़ेगा।
योजना का उद्देश्य और दर्शन
इस कोष का मूल उद्देश्य है —कम से कम 20 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों के पुत्र और पुत्रियों को उच्च शिक्षा में पूर्ण या आंशिक फीस सहायता प्रदान करना, ताकि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र सिर्फ आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों को अधूरा न छोड़े।
इस पहल का दर्शन तीन मूल स्तंभों पर आधारित है:
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समानता — अधिस्वीकृत और गैर-अधिस्वीकृत पत्रकारों में कोई भेद नहीं।
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पारदर्शिता — हर लेन-देन, हर निर्णय स्पष्ट और सामूहिक सहमति से।
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सहयोग — यह अधिकार नहीं, बल्कि परस्पर सहयोग की भावना पर आधारित योजना है।
योजना की आवश्यकता: क्यों जरूरी है यह कोष?
आज का पत्रकार कई मोर्चों पर एक साथ लड़ता है —
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आर्थिक असुरक्षा
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सामाजिक दबाव
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राजनीतिक दबाव
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सीमित वेतन
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और अस्थिर नौकरी व्यवस्था
इन परिस्थितियों में बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च एक बड़ी चुनौती बन जाता है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ, मैनेजमेंट और अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज की फीस लाखों में होती है। एक आम पत्रकार के लिए यह राशि जुटाना आसान नहीं होता।
पत्रकार स्वाभिमानी होता है। वह मदद मांगने से कतराता है। ऐसे में यह कोष मांगने की नहीं, पाने की गरिमामयी व्यवस्था बनेगा।
पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)
इस योजना का लाभ उन्हीं पत्रकार परिवारों को मिलेगा, जो निम्नलिखित शर्तें पूरी करते हों:
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पत्रकार कम से कम 20 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता कर रहा हो।
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वह प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया से जुड़ा हो।
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अधिस्वीकृत या गैर-अधिस्वीकृत — दोनों ही पात्र होंगे।
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योजना के अंतर्गत पंजीकृत सदस्य होना अनिवार्य होगा।
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लाभ अधिकतम दो संतान (पुत्र/पुत्री) तक सीमित रहेगा।
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संतान किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में उच्च शिक्षा (ग्रेजुएशन या उससे ऊपर) में अध्ययनरत हो।
कोष का ढांचा और संचालन प्रणाली
1. बैंक खाता और साइन होल्डर व्यवस्था
कोष के लिए एक समर्पित बैंक खाता खोला जाएगा, जिसमें तीन प्रमुख पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधि साइन होल्डर होंगे, यह एक सुझाव है पत्रकारों को एक झंडे के नीचे लाने के लिए। अगर पत्रकार संगठन राजी नहींं होंगे तो हम कोई और रास्ता तलाशेंगे, मगर यह समस्या आम पत्रकार के जीवन से जुड़ी है इसलिए हम कुछ करना चाहते हैं:
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मारवाड़ प्रेस क्लब
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जोधपुर प्रेस क्लब
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श्रमजीवी पत्रकार संघ
इन तीनों में से एक-एक प्रतिनिधि संयुक्त रूप से खाते का संचालन करेंगे।
2. संचालन समिति (Core Committee)
एक स्वतंत्र और निष्पक्ष समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें शामिल होंगे:
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शहर के प्रमुख पत्रकार संगठनों से दो-दो प्रतिनिधि
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एक वित्तीय सलाहकार
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एक कानूनी सलाहकार
समिति की जिम्मेदारियाँ:
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आवेदन प्रक्रिया का संचालन
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पात्रता की जांच
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प्राथमिकता सूची बनाना
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सहायता राशि की स्वीकृति
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वार्षिक ऑडिट और रिपोर्टिंग
सदस्यता प्रणाली
मासिक सहयोग राशि
हर सदस्य पत्रकार को प्रतिमाह ₹500 की सहयोग राशि जमा करनी होगी।
इस राशि का उपयोग:
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पत्रकार की दो संतानों का एजुकेशन बीमा
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पत्रकार का ₹1,00,000 का दुर्घटना बीमा
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कोष का संचालन और प्रशासनिक खर्च
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शिक्षा सहायता कोष का विस्तार
यह राशि सहयोग है, कोई शुल्क नहीं। यह भावना है — आज मैं दूंगा, कल मेरा साथी पाएगा।
भामाशाहों की भूमिका: कोष की रीढ़
इस योजना की सबसे मजबूत कड़ी होंगे शहर के भामाशाह, उद्योगपति और समाजसेवी।
भामाशाह सहयोग मॉडल:
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न्यूनतम सहयोग: ₹10,000 प्रति वर्ष
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लक्ष्य: प्रारंभिक चरण में 100 भामाशाह जोड़ना
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वार्षिक सहयोग अभियान
भामाशाहों का नाम सम्मान सूची में प्रकाशित किया जाएगा और उन्हें वार्षिक कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।
वित्तीय मॉडल और फंड मैनेजमेंट
अनुमानित प्रारंभिक फंड संरचना:
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100 पत्रकार × ₹500 × 12 महीने = ₹6,00,000 प्रति वर्ष
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100 भामाशाह × ₹10,000 = ₹10,00,000 प्रति वर्ष
कुल अनुमानित वार्षिक फंड: ₹16,00,000
निवेश रणनीति:
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कुल फंड का एक हिस्सा SIP (Systematic Investment Plan) में लगाया जाएगा।
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एक हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में सुरक्षित रखा जाएगा।
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शेष राशि से शिक्षा सहायता वितरित की जाएगी।
इस मॉडल से कोष हर साल मजबूत होता जाएगा।
शिक्षा सहायता वितरण प्रणाली
प्राथमिकता निर्धारण:
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आर्थिक स्थिति
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छात्र की मेरिट
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परिवार की सामाजिक स्थिति
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बीमारी या आकस्मिक परिस्थितियाँ
सहायता का स्वरूप:
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कॉलेज/विश्वविद्यालय को सीधे फीस भुगतान
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छात्र के खाते में राशि स्थानांतरण नहीं (पारदर्शिता हेतु)
पारदर्शिता और जवाबदेही
हर वर्ष:
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ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी
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आय-व्यय विवरण प्रकाशित होगा
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सभी सदस्यों और भामाशाहों को रिपोर्ट भेजी जाएगी
विस्तार योजना (5 वर्षीय विज़न)
वर्ष 1:
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100 पत्रकार सदस्य
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100 भामाशाह
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10 छात्रों को सहायता
वर्ष 3:
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300 पत्रकार सदस्य
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250 भामाशाह
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30 छात्रों को सहायता
वर्ष 5:
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500+ सदस्य
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स्थायी निवेश फंड
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शहर स्तर से राज्य स्तर पर विस्तार
समाज और पत्रकार संगठनों से अपील
राइजिंग भास्कर सभी पत्रकार संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और भामाशाहों से अपील करता है कि इस पहल को एक संगठन की नहीं, एक समाज की योजना बनाएं।
यह अधिस्वीकृत बनाम गैर-अधिस्वीकृत की लड़ाई नहीं है। यह पत्रकार परिवारों के भविष्य की लड़ाई है।
क्योंकि हम एक हैं : सहयोग से सशक्तिकरण की ओर
“पत्रकार पुत्र-पुत्री उच्च शिक्षा सहयोग कोष” केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक आंदोलन है —एक ऐसा आंदोलन, जो यह साबित करेगा कि पत्रकार सिर्फ सवाल पूछना ही नहीं जानता, बल्कि समाधान भी खड़ा कर सकता है।
आज अगर हम एक बच्चे की शिक्षा में मदद करते हैं, तो कल वही बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, अफसर या शिक्षक बनकर समाज को लौटाएगा — और उस समय गर्व से कहा जाएगा: यह उस पत्रकार का बेटा/बेटी है, जिसे उसके समाज ने कभी अकेला नहीं छोड़ा।








