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Friday, April 10, 2026, 3:20 pm

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राजीव दीक्षित के विचारों में गणतंत्र का वास्तविक अर्थ

लेखक : शिव सिंह भाटी
9784092381

​1. व्यवस्था परिवर्तन बनाम सत्ता परिवर्तन

* ​राजीव दीक्षित जी का मानना था कि 15 अगस्त 1947 को केवल ‘सत्ता’ बदली थी, ‘व्यवस्था’ नहीं। उनके अनुसार, 26 जनवरी 1950 को हमने जो संविधान अपनाया, उसमें आज भी बहुत से कानून अंग्रेजों के समय के (जैसे Indian Penal Code या Taxation laws) ही चल रहे हैं।

* ​वास्तविक मूल्य: उनके लिए गणतंत्र का असली मतलब तब होगा जब भारत की व्यवस्था पूरी तरह भारतीय मूल्यों और संस्कृति पर आधारित हो।

​2. स्वदेशी और आर्थिक संप्रभुता

​दीक्षित जी के लिए एक गणतंत्र तभी मजबूत होता है जब वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो।

* ​स्वदेशी: गणतंत्र दिवस का मूल्य तब सार्थक है जब हम विदेशी कंपनियों के बजाय स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएं।

* ​आर्थिक गुलामी: उनका तर्क था कि यदि देश का पैसा विदेशी कंपनियों के माध्यम से बाहर जा रहा है, तो हम पूरी तरह से गणतंत्र नहीं हैं।

​3. भारतीय भाषाओं का सम्मान

​राजीव दीक्षित जी अक्सर कहते थे कि जिस देश का संविधान और न्यायपालिका की भाषा उसकी अपनी भाषा (हिंदी या क्षेत्रीय भाषाएँ) न होकर ‘अंग्रेजी’ हो, वह मानसिक रूप से स्वतंत्र नहीं है।

* ​वास्तविक मूल्य: असली गणतंत्र वह है जहाँ एक किसान भी अपनी भाषा में अदालत की कार्यवाही समझ सके।

​4. विकेंद्रीकरण (गाँव की शक्ति)

​वे महात्मा गांधी के “ग्राम स्वराज” के समर्थक थे। उनके अनुसार, दिल्ली (केंद्र) से सत्ता चलाने के बजाय, गाँवों को अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। जब भारत का हर गाँव आत्मनिर्भर होगा, तभी वास्तविक गणतंत्र आएगा।

​राजीव दीक्षित के अनुसार गणतंत्र की कसौटी

राजीव दीक्षित जी के अनुसार

* कानून: अंग्रेजों द्वारा बनाए गए पुराने कानून को बोलकर भारतीय संस्कृति और न्याय पर आधारित कानून।

* अर्थव्यवस्था : बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का दबदबा को हटाकर पूर्ण स्वदेशी और स्थानीय उद्योग को बढावा देना।

* शिक्षा : मैकाले की शिक्षा पद्धति की जगह गुरुकुल और कौशल ( skill) आधारित शिक्षा।

* कृषि : रासायनिक खेती और विदेशी बीज की जगह जैविक खेती और भारतीय नस्ल के गोवंश आधारित कृषि को बढाना।

राजीव दीक्षित जी के अनुसार, गणतंत्र दिवस हमारे लिए एक “संकल्प दिवस” होना चाहिए—एक संकल्प कि हम भारत को मानसिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गुलामी से पूरी तरह मुक्त करेंगे।

स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें आयुर्वेद अपनाये, स्वदेशी अपनाओ।

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor