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Thursday, February 19, 2026, 11:07 am

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शब्दों की सुर-सरिता में अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब चमका, साहित्य साधना में महिला शिल्पकर्मियों ने की शिरकत

अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब के साहित्यिक आयोजनों से सजी रचनात्मक ऊर्जा, महिलाओं की सशक्त अभिव्यक्ति का मंच बना जनवरी और फरवरी

राखी पुरोहित. जोधपुर

जनवरी माह और फरवरी के आरंभ में अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब द्वारा आयोजित विविध साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने साहित्य प्रेमियों के बीच रचनात्मक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और नारी सशक्तिकरण की सशक्त छवि प्रस्तुत की। एक माह की इस श्रृंखला में काव्य गोष्ठी, भजन, ग़ज़ल, गीत, शायरी, अंतराक्षरी, संगोष्ठी तथा भारतीय संस्कृति और विरासत पर केंद्रित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर की प्रतिष्ठित महिला साहित्यकारों की सक्रिय सहभागिता रही।

विशेष उल्लेखनीय रहा 2 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब की संस्थापिका अर्चना श्रेया का जन्मदिवस, जिसके उपलक्ष्य में 3 फरवरी को महिलाओं को समर्पित भव्य काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। यह आयोजन न केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति का मंच बना, बल्कि महिलाओं की संवेदनाओं, संघर्षों, उपलब्धियों और आत्मसम्मान को स्वर देने का अवसर भी रहा। इस अवसर पर प्रस्तुत कविताओं, गीतों और ग़ज़लों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

जनवरी और फरवरी माह में बसंत ऋतु की अगुवानी करते हुए “बसंत बहार” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रकृति, प्रेम, उल्लास और नवसृजन के रंग साहित्य के माध्यम से उभरे। बसंत पर केंद्रित रचनाओं ने ऋतु की सौंदर्यात्मकता और जीवन में नई ऊर्जा के आगमन को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति और भारतीय संविधान के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें देशप्रेम, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता पर आधारित रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दी गईं।

बेटी दिवस पर बेटियों को समर्पित कार्यक्रम ने समाज में बेटियों के महत्व, उनके अधिकारों और उज्ज्वल भविष्य की कामना को साहित्यिक स्वर प्रदान किया। इस अवसर पर प्रस्तुत रचनाओं ने नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव के संदेश को मजबूती से रखा। एक माह के दौरान आयोजित संगोष्ठियों में विभिन्न विधाओं पर विचार-विमर्श हुआ, वहीं भारतीय संस्कृति और विरासत पर केंद्रित कार्यक्रमों ने सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्मृति कराई।

इन सभी आयोजनों में प्रतिभागियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों को सम्मानित करते हुए सभी को “भारत रत्न सम्मान” से अलंकृत किया गया, जिससे साहित्यकारों का उत्साह और मनोबल और अधिक बढ़ा। ग़ज़ल, शायरी, गीत और कविताओं की प्रस्तुतियाँ विशेष रूप से सराहनीय रहीं और श्रोताओं ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

इन कार्यक्रमों में राजलक्ष्मी श्रीवास्तव, नेहा वाष्णेय, डॉ. पुष्पा जैन, डॉ. संजीदा खानम शाहीन, मंजुषा दुग्गल, शालिनी, सुषमा प्रेम पटेल, अनीता श्रीवास्तव, मीनाक्षी महाजन, डॉ. चंदा गुप्ता ‘नेह’, सुमन मेहरोत्रा, शोभारानी तिवारी, संतोष तोषनीवाल, डॉ. प्रतिक्षा शर्मा, शिवली गोस्वामी, सपना क्षिति, शशिकला अवस्थी, शालिनी श्रीवास्तव, प्रो. रेखा श्रीवास्तव, शिखा पांडेय, ममता सक्सेना, मीता लुनीवाल, डॉ. दविना, अमर ठकराल देविका, वनदेवी, नीरजा, नीलम व्यास ‘स्वयंसिद्धा’, विनीता, डॉ. आनंदी सिंह रावत सहित अनेक प्रतिष्ठित महिला साहित्यकारों ने भाग लिया। मीडिया प्रभारी राखी पुरोहित की सक्रिय भूमिका भी सराहनीय रही।

कार्यक्रमों का कुशल संचालन संस्था की संस्थापिका अर्चना श्रेया ने किया। उनके संचालन में अनुशासन, आत्मीयता और साहित्यिक गरिमा स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब का उद्देश्य महिलाओं को साहित्य और संस्कृति के माध्यम से एक साझा मंच प्रदान करना है, जहाँ वे निडर होकर अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें।

इन आयोजनों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब ने यह सिद्ध किया कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली जीवंत शक्ति है। महिला साहित्यकारों की सहभागिता ने कार्यक्रमों को विशिष्ट ऊँचाई प्रदान की और आने वाले समय में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता का विश्वास जगाया। कुल मिलाकर, जनवरी और फरवरी के इन साहित्यिक आयोजनों ने रचनात्मक संवाद, सांस्कृतिक चेतना और नारी सशक्तिकरण का सशक्त संदेश समाज तक पहुँचाया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor