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Sunday, August 23, 2026, 5:55 am

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Lifestyle

​कैंसर: एक जंग, जो शरीर से नहीं, हौसले से जीती जाती है

लेखक : शिव सिंह

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​जब किसी घर में ‘कैंसर’ शब्द सुनाई देता है, तो एक पल के लिए वक्त ठहर जाता है। वह सिर्फ एक मेडिकल रिपोर्ट नहीं होती, बल्कि सपनों पर लगा एक अचानक ब्रेक होता है। लेकिन क्या कैंसर का मतलब वाकई हार है? बिल्कुल नहीं। यह कहानी है—अटूट साहस की, अपनों के प्यार की और फिर से मुस्कुराने की ज़िद की।

​वह अनकहा दर्द और डर

​कैंसर का नाम सुनते ही सबसे पहला सवाल आता है— “मैं ही क्यों?” मरीज के मन में भविष्य की चिंता और परिवार के मन में अपने प्रियजन को खोने का डर एक गहरा सन्नाटा पैदा कर देता है। कीमोथेरेपी की थकान, बालों का झड़ना और शरीर की कमजोरी कई बार इंसान को भीतर से तोड़ देती है। लेकिन याद रखें, मुरझाए हुए पत्ते गिरने का मतलब यह नहीं कि पेड़ मर गया है; वसंत फिर आएगा।

​उम्मीद की किरण: अपनों का साथ:

​कैंसर के सफर में दवाइयाँ अपना काम करती हैं, लेकिन ‘दुआ’ और ‘साथ’ चमत्कार करते हैं।

* ​परिवार का संबल: एक मरीज के लिए उसके जीवनसाथी का हाथ थामना या बच्चों की मुस्कुराहट सबसे बड़ी पेनकिलर (दर्द निवारक) होती है।

* ​हौसला: जब इंसान ठान लेता है कि उसे जीना है, तो कोशिकाएं (cells) भी हार मानने से इनकार कर देती हैं।

लक्षणों को अनदेखा न करें
(अपनों के लिए)

कभी-कभी हम अपनी तकलीफ को ‘मामूली’ समझकर टाल देते हैं, यह सोचकर कि परिवार परेशान होगा। लेकिन आपकी सेहत सिर्फ आपकी नहीं, आपके बच्चों और माता-पिता की भी अमानत है।
* ​शरीर में कोई भी अजीब गांठ या बदलाव दिखे, तो उसे छिपाएं नहीं।

* ​अचानक वजन गिरना या थकान महसूस होना सिर्फ काम का तनाव नहीं हो सकता।

* ​समय पर जांच करवाना ही अपने परिवार के प्रति आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

​कैंसर सरवाइवर्स: जीत की मिसालें

​आज हमारे बीच ऐसे लाखों लोग हैं जिन्होंने कैंसर को मात दी है। वे हमें सिखाते हैं कि:

1. कैंसर एक कोमा (,) हो सकता है, लेकिन पूर्णविराम (.) नहीं।

2. ​सकारात्मक सोच शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।

3. ​हर बीतता दिन एक उपहार है, जिसे खुलकर जीना चाहिए।

एक छोटा सा संकल्प

​आज विश्व कैंसर दिवह पर कसम लें कि हम उन चीजों का त्याग करेंगे जो हमारे शरीर को जहर दे रही हैं—चाहे वह तंबाकू हो या तनाव। अपनी सेहत को समय दें, ताकि आपके अपनों को आपके बिना समय न बिताना पड़े।

​”हारना तब नहीं होता जब बीमारी शरीर में आती है, हारना तब होता है जब उम्मीद मन से निकल जाती है।”

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor