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Saturday, October 24, 2026, 11:50 pm

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राज्य बजट में GST और VAT करदाताओं को नहीं मिली राहत, उद्योग जगत में निराशा

केडी इसरानी. स्वतंत्र पत्रकार. जोधपुर 

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत हालिया बजट में वैट (VAT) और जीएसटी (GST) से जुड़े मुद्दों पर किसी प्रकार की विशेष राहत की घोषणा नहीं किए जाने से व्यापारिक वर्ग और करदाताओं में निराशा देखी जा रही है। बजट पूर्व आयोजित प्रामाणिक डेटा कमेटी की बैठक में जीएसटी से संबंधित कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखी गई थीं, लेकिन बजट में उनका समुचित समाधान नहीं किया गया।

मारुधरा टैक्स बार एसोसिएशन, वेस्टर्न राजस्थान के अध्यक्ष पी.एम. चोपड़ा और उपाध्यक्ष गणेश शर्मा के अनुसार व्यापारिक संगठनों का कहना है कि जीएसटी बिजनेस ऑडिट के विकेंद्रीकरण, एंटी-इवेज़न (कर चोरी निरोधक) प्रावधानों में सुधार, विवाद निवारण की स्पष्ट व्यवस्था तथा कर प्रशासन के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास जैसे मुद्दों पर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इससे करदाताओं की प्रशासनिक परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं।

पहले लागू एक योजना के तहत 50 लाख रुपये तक की सीमा पर पूरी छूट का प्रावधान था, लेकिन अब एक करोड़ रुपये तक के मामलों में 50 प्रतिशत टैक्स जमा करने की शर्त रखी गई है। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि इस बदलाव से राहत मिलने के बजाय करदाताओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ेगा।

स्टैंप ड्यूटी के क्षेत्र में भी कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है। हालांकि कुछ मामूली कमी की गई है, लेकिन इसे उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। बजट में ग्रामीण विकास, सड़क और आधारभूत संरचना पर विशेष जोर दिया गया है, जिसे सकारात्मक कदम माना जा रहा है। फिर भी कर सुधारों और जीएसटी प्रशासन में पारदर्शिता व सुगमता की दिशा में अपेक्षित पहल का अभाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, जीएसटी में दो सदस्यों की नियुक्ति पिछले डेढ़ वर्ष से लंबित है, जिस पर बजट में कोई घोषणा नहीं की गई। टैक्स बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति भी अब तक नहीं हो सकी है, जबकि उन्हें बोर्ड में शामिल करने की प्रक्रिया की बात कही गई है।

कुल मिलाकर, यह बजट विकासोन्मुख अवश्य दिखता है, लेकिन जीएसटी और वैट से जुड़े करदाताओं की प्रमुख मांगों को नजरअंदाज किए जाने के कारण व्यापारिक वर्ग में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर प्रशासन में सुधार और संरचनात्मक बदलाव नहीं किए गए, तो इसका असर राज्य के व्यापारिक माहौल पर पड़ सकता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor