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Friday, April 10, 2026, 2:27 pm

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स्वराष्ट्र, स्वभाषा, स्वभूषा और स्वतंत्रता के प्रबलतम पक्षधर थे महर्षि दयानंद : सुधांशु टाक

हर्षोल्लास के साथ मनाई गई महर्षि दयानंद जयंती

शिव वर्मा. जोधपुर

स्वराष्ट्र, स्वभाषा, स्वभूषा, स्वसंस्कृति और स्वतंत्रता के प्रबलतम पक्षधर महर्षि दयानंद सरस्वती ऐसे दिव्य राष्ट्र पुरुष थे जिनका संपूर्ण चिंतन और कार्य जहां आध्यात्मिकता से भरा पूरा था वही राष्ट्र उनके लिए प्रथम था । महर्षि दयानंद मानते थे कि व्यक्ति की सर्वांगीण उन्नति ‘ स्व ‘ से ही प्रारंभ होती है । यह विचार आर्य समाज शास्त्री नगर के मंत्री सुधांशु टाक ने उपस्थित व्यक्तियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए । मौका था महान समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद की 202 वी जयंती के शुभ अवसर पर आयोजित यज्ञ और सत्संग का ।

मुकेश रावल ने बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर विशेष यज्ञ का आयोजन आर्य समाज शास्त्री नगर की यज्ञशाला में किया गया । इस यज्ञ के मुख्य यजमान पुखराज प्रजापति और सुनीता प्रजापति थे । यज्ञ के ब्रह्मा रामदयाल आर्य थे । रामदयाल ने वैदिक मंत्रों के साथ आहुति देते हुए बताया कि भारतीय इतिहास के पन्नों में जब भी समाज सुधार और आध्यात्मिक क्रांति का जिक्र होता है, महर्षि दयानंद सरस्वती का नाम सबसे अग्रिम पंक्ति में आता है।

विशिष्ट अतिथि वैद्य हनुमानराम ने बताया कि वेदों की ओर लौटें का अमर संदेश देने वाले और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद की जयंती केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि सत्य, साहस और ज्ञान के उत्सव का दिन है। उन्होंने न केवल धर्म के नाम पर फैली कुरीतियों पर प्रहार किया, बल्कि स्वराज की भावना को भी जन-जन के मन में बोया।

इस अवसर पर रोहित और दीक्षा ने भजन प्रस्तुत किया । नन्ही बालिका वेदिका और स्नेहा ने ईश्वरस्तुति उपासना के मंत्रों का जाप किया । इस अवसर पर मीना टाक , रीटा रावल , प्रियांशु, ललिता वैष्णव सहित अनेक आर्यजन मौजूद थे । अंत में मुकेश रावल ने धन्यवाद ज्ञापित किया

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor