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Sunday, April 19, 2026, 5:22 am

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बापजी : महाराजा ऑफ मारवाड़ जोधपुर : दी किंग हू वुड बी मैन ” पुस्तक का हुआ विमोचन

पूर्व नरेश गज सिंह के जीवन की उल्लेखनीय व असाधारण यात्रा पर आधारित है यह पुस्तक
मारवाड़ व जोधपुर के लोगों का उनके प्रति सम्मान व अपणायत ही उनकी पूंजी है, जिसे हमेशा संजोये हुए है : गज सिंह

शिव वर्मा. जोधपुर 

पूर्व नरेश गज सिंह की असाधारण व उल्लेखनीय जीवन यात्रा पर आधारित पुस्तक ” बापजी : महाराजा आफ मारवाड़ जोधपुर : दी किंग हू वुड बी मैन ” का शुक्रवार को मेहरानगढ़ फोर्ट के चौकेलाव गार्डन में पूर्व नरेश गज सिंह द्वारा विमोचन किया गया । इस अवसर पर महारानी हेमलता राज्ये, लेखक अमन नाथ व योगी वैद्य उपस्थित थे।

मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के प्रशासनिक अधिकारी कर्नल अजय सिंह शेखावत ने बताया कि यह पुस्तक लेखक अमननाथ व योगी वैद्य द्वारा लिखी गई है एवं मैपिंग पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद द्वारा प्रकाशित की गई है । पुस्तक 185 पृष्ठ की है । इसमें पूर्व नरेश गज सिंह व जोधपुर राज परिवार के दुर्लभ और नए चित्रों का समावेश किया गया है । पुस्तक में गज सिंह व जोधपुर राज परिवार के बारे में बेहतरीन जानकारी का उल्लेख किया गया है ।

विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व नरेश गज सिंह ने कहा कि काफी समय से लोगों द्वारा कहा जा रहा था कि उनके बारे में एक पुस्तक लिखी जाए । लेखक अमननाथ व योगी वैद्य द्वारा यह अच्छा व सराहनीय प्रयास किया गया और उनकी जीवन यात्रा के बारे में पुस्तक लिखी गयी भी है । डॉ. महेंद्र सिंह तँवर ने भी इन दोनों का सहयोग किया । उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में अपनी विरासत को संभालना और उसे दुनिया भर में पहचान देना ” द किंग हू वुड बी मैन ” की सच्ची कहानी है । पुस्तक में उनके व राजपरिवार के बारे में लिखा गया है । अनेक दुर्लभ चित्र इसमें लगाए गए हैं जो पहले कही प्रकाशित नहीं हुए । अनेक नए चित्र भी शामिल किए गए हैं । उनके जन्म से लेकर अब तक की जीवन यात्रा के बारे में इसमें बेहतर तरीके से उल्लेख किया गया है । राज परिवार के बारे में उल्लेख किया गया है । राज परिवार का जनता से सीधे जुड़ाव का उल्लेख किया गया है । यह पुस्तक पर्याप्त पठनीय व सांस्कृतिक महत्व की पुस्तक है ।

उन्होंने कहा उनके जन्म के चार वर्ष की उम्र में पिता महाराजा हनवन्त सिंह जी की कम उम्र में ही हवाई दुर्घटना में निधन के बाद संघर्षमय व विकट परिस्थितियों में 4 वर्ष उम्र में ही उनका महाराजा के रूप में राजतिलक होना, मां राजमाता कृष्णा कुमारी द्वारा मुझे व बहनों को पढ़ाई के लिए बाहर भेजना, 8 वर्ष की उम्र में उन्हे इंग्लैंड पढ़ने भेजना उनका एक सही व हिम्मतवाला निर्णय था । उन्होंने कहा कि देश की आजादी से कुछ माह बाद उनका जन्म हुआ था । 7 अप्रैल 1949 में जोधपुर रियासत का भारत में विलय हुआ । उन्होंने कहा कि जोधपुर राज परिवार की विरासत का प्रभाव रहा है । इस विरासत में एक आदमी की छवि बसी हुई है और वह है बाप जी । जो 4 वर्ष की उम्र में ही राजा बने फिर सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से मारवाड़ की आत्मा से गहराई से जुड़ गए । मारवाड व जोधपुर के लोगों का उनके प्रति सम्मान ही उनकी पूंजी है, जिसे हमेशा संजोये रखे हुए हैं । बदलाव के बावजूद जोधपुर के लोगों का प्यार व सम्मान बना हुआ। उन्होंने कहा आप जो भी कार्य करें उसे पूरे समर्पण के साथ करें ,अपनी विरासत को बचाकर रखें ,इस समाज में लीडरशिप की भूमिका निभाए । उन्होंने कहा कि उनके जीवन को अच्छे तरीके से आकार देने, कार्य करने में,सांस्कृतिक मूल्यों में दादा महाराजा उम्मेद सिंह जी, पिता महाराजा हनवन्त सिंह जी,  माँ कृष्णा कुमारी जी का काफी प्रभाव रहा, साथ ही बहिने शैलेश कुमारी जी व चंद्रेश कुमारी जी, पत्नी महारानी हेमलता राज्ये, पुत्र शिवराज सिंह, पुत्री शिवरंजनी राज्ये व बहू युवरानी गायत्री राज्ये सभी का सहयोग रहा है। उन्होंने दोनों लेखको के प्रति आभार व्यक्त किया ।

समारोह को पुस्तक के लेखक अमननाथ व योगी वैद्य ने संबोधित किया और पुस्तक के प्रकाशन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। महाराजा गज सिंह ने पुस्तक की पहली प्रति पंजाब के सूफी कलाकार मदन गोपाल सिंह को अपने हस्ताक्षर करके भेंट की । उम्मेद भवन पैलेस हाउसहोल्ड के जोधपुर जवारात के प्रबंधक मनोज मालानी ने बताया कि समारोह समाप्ति के बाद में इस पुस्तक के लिए काउंटर से पुस्तक क्रय करने की लोगों में होड़ मची व पुस्तक क्रय करने के बाद में उनके द्वारा महाराजा गज सिंह के हस्ताक्षर करवाएं गए । बाड़मेर की कीर्तिका चौहान ने बताया कि महाराजा गज सिंह के प्रति सम्मान के कारण वह बाड़मेर से यह पुस्तक क्रय करने और इस विमोचन समारोह में शामिल होने आई हैे ।

इस अवसर पर महाराजा गज सिंह के इंग्लैंड में कॉलेज के मित्र डेविड कैंविल,प्रिंस जॉर्ज गिलिट्सिन, कैपवेल सहित चौपासनी शिक्षा समिति के अध्यक्ष रावल किशन सिंह ,गायत्री कुमारी, महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केंद्र के सहायक निदेशक डॉ महेंद्र सिंह तँवर, सीनियर सिक्योरिटी मैनेजर किशनवीर सिंह राठौड़ सहित अनेक लोग उपस्थित थे । मेहरानगढ़ म्यूजियम की क्यूरेटर सुनैयना राठौड़ ने कार्यक्रम का संचालन किया ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor