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Sunday, April 19, 2026, 3:56 am

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‘‘नगर पालिका भीण्डर जिला उदयपुर के आदेश पर रोक’’

राइजिंग भास्कर. जोधपुर
राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ के न्यायाधीश कुलदीप माथुर ने पींजारा समाज भीण्डर जिला उदयपुर को दी गयी दो बीघा जमीन के भू उपयोग परिवर्तन के आदेश दिनांक 30.09.2023 को नगर पालिका भीण्डर के अधिशाषी अभियन्ता द्वारा आदेश दिनांक 13.01.2026 से निरस्त करने के आदेश पर रोक लगायी।
पींजारा समाज भीण्डर द्वारा पार्क बनाने के उद्देश्य से स्वायत शासन विभाग को 2 बीघा जमीन शहरी क्षेत्र की सुपुर्द की गयी। इस जमीन के बदले स्वायत शासन विभाग द्वारा उन्हें 2 बीघा जमीन ग्र्रामीण क्षेत्र में पींजारा समाज को आंवटित की गयी। इस जमीन के बदले जमीन का आवंटन करते वक्त स्वायत शासन विभाग द्वारा यह शर्त अंकित की गयी कि यह जमीन केवल कब्रिस्तान के लिये उपयोग में ली जायेगी। पींजारा समाज द्वारा इस शर्त को हटाकर जमीन को स्कूल, हॉस्टल व अन्य उपयोग में लेने के लिये लगातार स्वायत शासन विभाग से निवेदन किया गया।
पींजारा समाज द्वारा वर्ष 2010 से इसके लिये स्वायत शासन विभाग से निवेदन करने पर स्वायत शासन विभाग द्वारा दिनांक 30.09.2023 को उनके निवेदन को जायज ठहराते हुए। कब्रिस्तान की शर्त को हटाकर जमीन को अन्य उपयोग में लेने की छूट प्रदान की गयी।
दिनांक 19.01.2025 को राज्य सरकार द्वारा मंत्रालयिक स्तर पर एक कमेठी का गठन किया गया। जिसके द्वारा दिनांक 01.04.2023 से 14.12.2023 के मध्य पूर्ववर्ती सरकार द्वारा विभिन्न समाज को जो भूमि आवंटन करने की प्रक्रिया निर्णयाधीन थी उन सब को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस मंत्रालयिक कमेटी द्वारा पींजारा समाज को जो जमीन का उपयोग संशेाधित करने का आदेश 30.09.2023 को पारित किया गया था। उसको भी निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
अधिशाषी अभियन्ता नगर पालिका भीण्डर द्वारा पींजारा समाज को भूमि उपयोग संशोधन का जो आदेश वर्ष 2023 में पारित किया गया था, उसे मंत्रालयिक कमेटी के प्रस्ताव के आधार पर दिनांक 13.01.2026 को निरस्त कर दिया गया। इस निरस्तीकरण के आदेश दिनांक 13.01.2026 से व्यथित होकर पींजारा समाज के अध्यक्ष अनवर हुसैन ने एक रिट याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष अपने अधिवक्ता प्रमेन्द बोहरा के माध्यम से प्रस्तुत की। बोहरा का न्यायालय के समक्ष यह तर्क था कि मंत्रालयिक कमेटी द्वारा उन जमीनों का आवंटन रद्द किया गया, जो 01.04.2023 से 14.12.2023 के मध्य आवंटन होने की प्रक्रियाधीन थी जबकि प्रार्थी पींजारा समाज को आंवटन तो वर्ष 2010 में ही हो चुका है, दिनांक 01.04.2023 से 14.12.2023 के मध्य तो केवल भूमि के उपयोग को परिवर्तित किया गया है, जिसके तहत भूमि का उपयोग कब्रिस्तान के स्थान पर अन्य उपयोग हेतु करने का आदेश पारित किया गया था। इसके बावजूद भी मंत्रालियक कमेटी द्वारा प्रस्ताव एवं अधिशाषी अभियन्ता द्वारा मंत्रालियक कमेटी द्वारा जो प्रस्ताव पारित किया गया है एवं उसकी आड में अधिशाषी अभियन्ता नगर पालिाक भीण्डर द्वारा जो आदेश पारित किया गया है वो अनुचित एवं विधि विरूद्ध है। इसका भूमि उपयोग निरस्तीकरण आदेश पारित करने से पूर्व पींजारा समाज को ना तो कोई नोटिस दिया गया ना ही कोई सुनवाई का मौका दिया गया जो कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्तों के विरूद्ध है।
प्रार्थी के तर्को से सहमत होते हुए उच्च न्यायालय ने स्वायत शासन विभाग, नगर पालिका भीण्डर, जिला उदयपुर व कलक्टर, उदयपुर को नोटिस जारी किये व साथ ही अधिशाषी अभियन्ता नगर पालिका भीण्डर जिला उदयपुर के आदेश दिनांक 13.01.2026 की क्रियान्विती पर रोक लगायी।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor