Explore

Search

Sunday, April 19, 2026, 5:05 am

Sunday, April 19, 2026, 5:05 am

LATEST NEWS
Lifestyle

राजस्थानी भाषा मान्यता आंदोलन : सरकार हमें हल्के में ना लें- नाचीज बीकानेरी

दिलीप कुमार पुरोहित. बीकानेर 

9783414079 diliprakhai@gmail.com

राजस्थानी भाषा  को मान्यता नहीं मिलने की पीड़ा को अभिव्यक्त करते हुए बीकानेर के वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार नाचीज बीकानेरी ने कहा कि सरकार हमें हल्कें में ना लें। बीकानेरी ने बताया कि राजस्थानी भाषा मान्यता एवं तीसरी भाषा के लिए लम्बे संघर्ष के बाद भी किसी भी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती क्योंकि हमारी ताकत को हमारे चुने हुए जन प्रतिनिधि भी हल्के में ले रहे हैं ।

राजस्थान के साहित्यकारों ने सरकार व जन प्रतिनिधियो को कई बार ज्ञापन भी दिए , धरने प्रदर्शन किए, विधायकों,लोकसभा / राज्य सभा , सांसदों, राज्य के मंत्रियों केंद्रीय मंत्रियों यहां तक प्रधानमंत्री तक राजस्थानी भाषा मान्यता के लिए ज्ञापन दिए। विदेशों में बैठे भारतीयों ने भी सरकार से मातृ भाषा राजस्थानी को मान्यता की हुंकार लगाई। अभी तक वही ढाक के तीन पात।

नाचीज़ बीकानेरी ने बताया कि राजस्थानी भाषा के जानकारों , विद्वानों, साहित्यकारों ने सरकार के टालमटोल बरताव का जवाब देते हुए सरकार को बताया कि राजस्थानी भाषा मान्यता के सभी मापदंड रखते हुए भी सरकार के प्रतिनिधि आश्वासन पर आश्वासन दिए जा रहे। राजस्थानी भाषा को मान्यता देने से हिन्दी भाषा को बल मिलेगा । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी मातृ भाषा से शिक्षा देने की
राजस्थान विधानसभा सभा में कई बार राजस्थानी भाषा की बात उठी, कई विधायकों ने तो विधानसभा सभा में राजस्थानी भाषा में शपथ लेने की बात कह कर वाह वाह लूटी। उन भूतपूर्व व वर्तमान विधायकगण सयुंक्त रूप से भाषा मान्यता के इस मुद्दे को कामयाब करने की दिशा में सफलता मिल सकती है। वे राजस्थान के मजबूत थंब भी हैं। अब वक्त है राजस्थान विधानसभा चल रही है यदि आप राजस्थानी भाषा के दिल से पक्षधर हैं तो मौका है 21 फ़रवरी को मातृ भाषा दिवस से सभी विधायक विधानसभा में मजबूती से मान्यता व तीसरी भाषा के लिए आवाज उठाओ जनप्रतिनिधि अनिश्चितकाल के लिए कोई भी कदम उठा कर राजस्थान में भाषा के लिए सभी राजनैतिक दल एक मंच से राजस्थान में आंदोलन शुरू करते हैं तो राज्य व केंद्र सरकार के विधानसभा व देश की संसद में राजस्थानी भाषा का मसला हल हो सकता है वरना मातृ भाषा दिवस पर ज्ञापन देते रहो ।
राजस्थानी भाषा मान्यता एवं तीसरी भाषा के लिए लम्बे संघर्ष के बाद भी किसी भी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती क्योंकि हमारी ताकत को हमारे चुने हुए जन प्रतिनिधि भी हल्के में ले रहे हैं । राजस्थान के साहित्यकारों ने सरकार व जन प्रतिनिधियो को कई बार ज्ञापन दिए , धरने प्रदर्शन किए , विधायकों,लोकसभा / राज्य सभा सांसदों,राज्य के मंत्रियों केंद्रीय मंत्रियों यहां तक प्रधानमंत्री तक राजस्थानी भाषा मान्यता के लिए ज्ञापन दिए , विदेशों में बैठे भारतीयों ने सरकार से मातृ भाषा राजस्थानी को मान्यता की हुंकार लगाई अभी तक वही ढाक के तीन पात ।
राजस्थान विधानसभा सभा में कई बार राजस्थानी भाषा की बात उठी ,कई विधायकों ने तो विधानसभा सभा में राजस्थानी भाषा में शपथ लेने की बात कह कर वाह वाह लूटी , यदि भूतपूर्व व वर्तमान विधायकगण सयुंक्त रूप से भाषा मान्यता के इस मुद्दे को कामयाब करने की दिशा में ईमानदारी से काम करते हैं तो सफलता मिल सकती है वे राजस्थान के मजबूत थंब भी हैं अब वक्त है राजस्थान विधानसभा चल रही है यदि आप राजस्थानी भाषा के दिल से पक्षधर हैं तो मौका है 21 फ़रवरी को मातृ भाषा दिवस से सभी विधायक विधानसभा में मजबूती से मान्यता व तीसरी भाषा के लिए आवाज उठाओ जनप्रतिनिधि अनिश्चितकाल के लिए कोई भी कदम उठा कर राजस्थान में भाषा के लिए सभी राजनैतिक दल एक मंच से राजस्थान में आंदोलन शुरू करते हैं तो राज्य व केंद्र सरकार के विधानसभा व देश की संसद में राजस्थानी भाषा का मसला हल हो सकता है वरना मातृ भाषा दिवस पर ज्ञापन देते रहो । फिर भी मान्यता के इस आंदोलन को साहित्य से जुड़े सभी संगठनों को एक जाजम पर बैठ कर अनवरत जारी रखने से ही भारत सरकार को मानना होगा, राजस्थान सरकार को भी सोचना होगा, हमारे जनप्रतिनिधियों के हाथ में है 10 करोड़ राजस्थानियों को मान्यता दिलाने की बात को बुलंदगी से उठाएं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor