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Sunday, October 18, 2026, 9:00 am

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Lifestyle

गजल : चांद पैगाम लाया है रमजान का : कासिम बीकानेरी

चांद पैगाम लाया है रमजान का

चांद पैग़ाम लाया है रमज़ान का
सबके लब पर तराना है रमज़ान का

सिर्फ़ नेकी करो, सिर्फ़ नेकी करो
सब से बस ये तक़ाज़ा है रमज़ान का

एक के बदले सत्तर मिलें नेकियां
रहमतों का ख़ज़ीना है रमज़ान का

ज़ौक़ो-शौक़े-इबादत का अब ज़ोर है
ये मिला हमको तोहफ़ा है रमज़ान का

जिसको देखो करे बात रमज़ान की
सबके लब पर ही चर्चा है रमज़ान का

क़ैद शैतान अब हो गया है सुनो
आ गया जो ज़माना है रमज़ान का

राज़ी मौला को करने की धुन है लगी
ये महीना जो आया है रमज़ान का

मोमिनों के लिए रहमतों से भरा
‘बरकतों का महीना है रमज़ान का’

ज़िक्रो-तस्बीह में बीतेंगे रात- दिन
जो भी पल है वो प्यारा है रमज़ान का

हम पे मौला ने अपना किया है करम
फिर मिला हमको मौक़ा है रमज़ान का

यूं तो अच्छे हैं ‘क़ासिम’ महीने सभी
सबसे अफ़ज़ल महीना है रमज़ान का

क़ासिम बीकानेरी

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor