दिलीप कुमार पुरोहित के विजन पर मुकेश अंबानी की पहल
देशभर के ऑटो और लोडिंग थ्री-व्हीलर सेक्टर को डिजिटल, पारदर्शी और संगठित बनाने की पहल; राज्यों, जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की सहभागिता का सुझाव
मुकेश अंबानी यात्री को 1 लाख का एक्सीडेंटल बीमा कवर देने का प्लान भी तैयार कर रहे हैं। इस पर मंथन चल रहा है। अगर यह क्रांतिकारी प्लान लागू होता है तो अपने आपमें ऐतिहासिक पहल होगी
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली/मुंबई
9783414079 diliprakhai@gmai.com
देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बढ़ती जनसंख्या और रोज़मर्रा की यात्रा आवश्यकताओं के बीच सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ माने जाने वाले ऑटो रिक्शा और लोडिंग थ्री-व्हीलर क्षेत्र को संगठित और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित के विजन पर कार्रवाई करते हुए उद्योगपति मुकेश अंबानी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “राष्ट्रीय स्मार्ट थ्री-व्हीलर ट्रैवल पास (RASTA)” योजना लागू करने का विस्तृत खाका भेजा गया है। अगर प्रधानमंत्री योजना को हरी झंडी दे देते हैं तो मुकेश अंबानी देश को RASTA की सौगात दे सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव का उद्देश्य देशभर में संचालित लगभग 75–80 लाख यात्री ऑटो रिक्शा और 50–55 लाख मालवाहक थ्री-व्हीलर को एक संगठित डिजिटल ढांचे में लाना है, जिससे यात्रियों को निश्चित किराया, छूट और सुरक्षा मिले तथा चालकों की आय अधिक पारदर्शी और नियमित हो सके।
योजना की पृष्ठभूमि: असंगठित से संगठित क्षेत्र की ओर
देश के अधिकांश शहरों और कस्बों में ऑटो रिक्शा और लोडिंग थ्री-व्हीलर सार्वजनिक परिवहन और लघु माल परिवहन का प्रमुख साधन हैं। प्रतिदिन करोड़ों यात्री और लाखों छोटे व्यापारी इन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
हालांकि इस क्षेत्र में कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं—
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किराया विवाद और तय दरों की अनुपस्थिति
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डिजिटल रिकॉर्ड का अभाव
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यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे
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चालकों की अनियमित आय
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परिवहन डेटा प्रबंधन की कमी
इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए RASTA योजना प्रस्तावित की गई है, जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर लागू करने का सुझाव दिया गया है। अगर प्रधानमंत्री योजना को मंजूरी दे देते हैं तो मुकेश अंबानी का अगला कदम इस प्लान को लागू कर देश भर में नई क्रांति की शुरुआत करना होगा।
योजना का मुख्य उद्देश्य
प्रस्ताव में निम्न प्रमुख उद्देश्यों को रेखांकित किया गया है:
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ऑटो और लोडिंग थ्री-व्हीलर परिवहन को डिजिटल और संगठित बनाना।
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यात्रियों को निश्चित किराया और पारदर्शी भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना।
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चालकों की आय को नियमित और रिकॉर्ड-आधारित बनाना।
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ट्रैफिक पुलिस और सड़क सुरक्षा अभियानों के लिए स्थायी सहयोग निधि तैयार करना।
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राष्ट्रीय स्तर पर परिवहन डेटा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना।
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छोटे व्यापारियों के लिए सस्ती और विश्वसनीय लघु माल परिवहन सेवा सुनिश्चित करना।
पास प्रणाली: डिजिटल और प्रिंटेड विकल्प
RASTA योजना के तहत “नेशनल ट्रैवल पास” जारी किए जाएंगे। ये पास डिजिटल (मोबाइल ऐप/क्यूआर कोड आधारित) और प्रिंटेड दोनों स्वरूप में उपलब्ध होंगे।
प्रस्तावित मूल्य वर्ग इस प्रकार हैं:
₹50, ₹75, ₹100, ₹150, ₹200, ₹300, ₹400 और ₹500
इन पासों का उपयोग यात्री ऑटो यात्रा या लोडिंग सेवा के भुगतान में कर सकेंगे। प्रत्येक पास की राशि का एक निश्चित प्रतिशत विभिन्न मदों में विभाजित होगा।
वितरण मॉडल: पारदर्शी राजस्व संरचना
उदाहरण के तौर पर ₹50 पास की संरचना इस प्रकार प्रस्तावित है:
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₹5 (10%) – यात्री छूट
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₹1 (2%) – यूनियन विकास निधि
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₹1 (2%) – ट्रैफिक पुलिस सड़क-सुरक्षा सहयोग निधि
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₹3 (6%) – मुकेश अंबानी यानी संचालन एजेंसी/PPP पार्टनर
उच्च मूल्य के पासों पर भी यही प्रतिशत अनुपात लागू रहेगा।
इस मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित न रहे, बल्कि परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों—यात्री, चालक, यूनियन, पुलिस और संचालन एजेंसी—को समान रूप से लाभ मिले।
डिजिटल इकोसिस्टम: डेटा आधारित प्रबंधन
प्रस्ताव में एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें:
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प्रत्येक ऑटो और लोडिंग थ्री-व्हीलर का पंजीकरण
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चालक का सत्यापन और डिजिटल प्रोफाइल
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जीपीएस आधारित ट्रैकिंग (वैकल्पिक)
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डिजिटल भुगतान और लेनदेन रिकॉर्ड
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यात्री फीडबैक और रेटिंग सिस्टम
शामिल होंगे।
इससे सरकार को रीयल-टाइम परिवहन डेटा प्राप्त होगा, जो शहरी परिवहन नीति निर्माण में सहायक होगा।
चालकों के लिए लाभ
योजना के अंतर्गत चालकों को निम्न लाभ मिल सकते हैं:
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नियमित डिजिटल आय रिकॉर्ड
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बैंक लोन और बीमा में सुविधा
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सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ाव
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किराया विवाद में कमी
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अधिक ग्राहक भरोसा
डिजिटल लेनदेन के कारण चालकों की आय का प्रमाण उपलब्ध होगा, जिससे वे औपचारिक वित्तीय प्रणाली में शामिल हो सकेंगे।
यात्रियों के लिए फायदे
यात्रियों को:
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निश्चित किराया
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डिजिटल भुगतान सुविधा
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यात्रा का रिकॉर्ड
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सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र
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छूट आधारित पास लाभ
प्राप्त होंगे।
इससे यात्रा अनुभव अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगा।
ट्रैफिक पुलिस और सड़क सुरक्षा सहयोग
योजना में प्रत्येक पास से 2% राशि ट्रैफिक पुलिस सड़क-सुरक्षा सहयोग निधि के रूप में देने का प्रस्ताव है। यह निधि सड़क सुरक्षा अभियान, हेलमेट जागरूकता, सीसीटीवी, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और दुर्घटना नियंत्रण कार्यक्रमों में उपयोग की जा सकती है।
इससे सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों को स्थायी वित्तीय आधार मिल सकता है।
यूनियन विकास निधि
ऑटो और लोडिंग यूनियनों को भी 2% राशि विकास निधि के रूप में दी जाएगी। यह राशि चालक कल्याण, प्रशिक्षण कार्यक्रम, बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में उपयोग की जा सकती है।
संभावित वार्षिक राजस्व मॉडल
प्रस्ताव में अनुमान लगाया गया है कि यदि देशभर में प्रतिदिन 1 करोड़ पासों का औसत उपयोग होता है और औसत पास मूल्य ₹100 है, तो कुल दैनिक टर्नओवर ₹100 करोड़ हो सकता है।
यदि इसमें से 6% संचालन एजेंसी को मिलता है, तो:
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दैनिक आय: ₹6 करोड़
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वार्षिक आय (365 दिन): लगभग ₹2190 करोड़
यह केवल एक अनुमानित परिदृश्य है, वास्तविक आंकड़े राज्यों और उपयोग दर पर निर्भर करेंगे।
चरणबद्ध कार्यान्वयन
प्रस्ताव के अनुसार योजना को तीन चरणों में लागू किया जा सकता है:
पहला चरण: 10 बड़े महानगरों में पायलट प्रोजेक्ट
दूसरा चरण: राज्य स्तरीय विस्तार
तीसरा चरण: राष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण कार्यान्वयन
सरकार की भूमिका
प्रस्ताव में केंद्र और राज्य सरकारों से नीति समर्थन, नियामक स्वीकृति और तकनीकी सहयोग की अपेक्षा की गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि यह योजना “डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और “स्मार्ट सिटी मिशन” जैसी पहलों के साथ तालमेल बिठा सकती है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
यदि यह योजना लागू होती है, तो:
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लाखों चालकों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल किया जा सकेगा।
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यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिलेगी।
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छोटे व्यापारियों के लिए सस्ती लघु माल ढुलाई संभव होगी।
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सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों को अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल देश के शहरी परिवहन ढांचे में एक संरचनात्मक बदलाव ला सकती है।
देश के करोड़ों यात्रियों व लाखों चालकों के लिए बदलाव की पहल
मुकेश अंबानी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया “राष्ट्रीय स्मार्ट थ्री-व्हीलर ट्रैवल पास (RASTA)” प्रस्ताव देश के असंगठित परिवहन क्षेत्र को डिजिटल और पारदर्शी ढांचे में लाने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी पहल माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इस प्रस्ताव पर किस प्रकार विचार करती हैं और क्या इसे नीति स्तर पर समर्थन मिलता है। यदि योजना को मंजूरी मिलती है, तो यह देश के करोड़ों यात्रियों और लाखों चालकों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।




